होमपुस्तकसौम्या पाण्डेय 'पूर्ति' की कलम से - निराशा में आशा का प्रतीक... पुस्तक सौम्या पाण्डेय ‘पूर्ति’ की कलम से – निराशा में आशा का प्रतीक है काव्य संग्रह “मुट्ठी में सूरज” By Editor March 8, 2025 4 96 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पुस्तक–समीक्षा : “मुट्ठी में सूरज“ लेखक : डॉ संतोष खन्ना समीक्षक : सौम्या पाण्डेय “पूर्ति“ प्रकाशन वर्ष : 2023 मूल्य : ₹ 150 पेपरबैक, पृष्ठ : 50 प्रकाशक : साहित्यपीडिया वर्तमान समय काव्य बहुलता के लिए जाना जाएगा। आज काव्य सृजन अपने विविध आयामों के साथ उपस्थित है, किंतु विपुल साहित्य की उपलब्धता के बावजूद भी श्रेष्ठ कविताएं यदा–कदा ही देखने को मिलती हैं। वैसे तो कविताओं की श्रेष्ठता उनके भाव सौंदर्य के साथ ही शब्द संयोजन पर निर्धारित रहती है, फिर भी मेरी दृष्टि में कोई भी सृजन तभी महत्वपूर्ण होता है जब उसका उद्देश्य जनहित हो अथवा जिसे पढ़कर जनसामान्य को प्रेरणा मिले। ऐसे ही लोकहित की आकांक्षा के साथ “आदरणीया सन्तोष खन्ना” जी का काव्य संग्रह “मुट्ठी में सूरज” पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस संग्रह में मात्र 25 कविताएं ही हैं परन्तु सभी रचनाएँ स्वयं में सारगर्भित एवं प्रेरक हैं। आदरणीया सन्तोष खन्ना जी के शब्दों में उनके इस काव्य संग्रह का उद्देश्य -” ‘स्व‘ की सीमा से मुक्त हो ‘परहित‘ का ही प्रतिमान बने” है, जो कि वास्तव में भी अपने लक्ष्य की सिद्धि करता हुआ प्रतीत होता है। इसी संदर्भ में सर्वप्रथम शीर्षकीय रचना को ही देखें– मुट्ठी में सूरज भरने की ख्वाहिश तो कर वह पास आ मुस्कुराएगा अपनी रश्मियों से तन मन को चूम चूम जाएगा। कभी सागर के सीने पर चलने का मन तो बना सूरज के दहकते साये में लहरों का रेला लहक लहक किनारे छूने आएगा। गगन के सितारे गिनने का तसव्वुर तो कर खुलेंगे गणित गलियारे आर्यभट्ट भास्कर मुस्कुराएंगे अनसुलझे रहस्य खुलते जाएंगे। अदम्य साहस को प्रेरित करती यह रचना किसी भी भीरू हृदय को निर्भीक बनाने में सक्षम है। इसी प्रकार अगली रचना “एकात्म” युद्ध पर प्रहार करती एवं अहंकार का मर्दन करती प्रतीत होती है– फिर क्यों हर रोज होते हैं युद्ध जबकि आ चुके हैं बुद्ध। कितनी बार आना होगा बुद्ध को बनो हर कोई बुद्ध कर के आत्मा को शुद्ध फैलाओ प्रकाश अपने–अपने उजले आकाश के लिए।। इन्हीं रचनाओं के मध्य अगली रचना ग़ज़ल है, जो कि निराश मन में आशा का संचार कर रही है– नहीं कभी होते अकेले साथ चलती है कायनात रात में तो नींद रहती ले चंद तारों की बारात। खुलती जब आँख तो प्रात का वंदन करें जब हाथ में ले लालिमा सूर्य रश्मियां देती जवाब। रखें सदा दूरी बनाकर निराशा हो या अवसाद भीतर की वादियों में सुनें निरंतर अनहद नाद। एक अन्य रचना देखें, “आनन्द नृत्य” जिसमें प्रकृति के विनाश को रोकने के लिए शिव का आराधन कुछ इस प्रकार परिलक्षित है– कल्याणकारी सुनो, हे शिव! मत करो तांडव नृत्य तुम आशुतोष, करना ही है नृत्य करो आनन्द नृत्य, ओ शिव बचा लो यह धरा यह गगन भर दो मानव में शिवत्व। आदरणीय सन्तोष खन्ना जी का नाम उनकी स्वयं की निरंतर कर्मठता के बल पर आज उचाईयों पर है, उन्होंने अनेकों कीर्तिमान स्थापित किये हैं, अतः स्वयं स्त्री होकर अन्य स्त्रियों को उनका महत्व स्मरण कराती रचना “स्वयंभू” स्त्रियों के उत्थान का प्रतीक है– जब सारी शक्तियां स्त्रियों के पास हैं नहीं है वह अबला उसी का राज है। ज्ञान की देवी माँ शारदे है वह घर से लेकर हर ज्ञान मंदिर में उसी के सिर पर गुरु का ताज है। धन धान्य की वही तो है लक्ष्मी हर प्राणी को तो उसी पर नाज़ है। वही तो है शक्ति का साकार रूप शेर उसका वाहन त्रिशूल हाथ है। वह जगत जननी ममतामयी माँ जन्म लेते उसी की कोख से अवतार हैं। स्त्रियों में अग्रणी माता सीता के जीवन वृत्त को भी आपने अपनी लेखनी के माध्यम से उकेरा है तो वहीं भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री “स्व. इंदिरा गांधी” पर भी कलम चलाई है, कुछ पंक्तियां देखें– प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी, वह दुर्गा मात भवानी थी, शहीद हुई वतन की खातिर, वह ऐसी ही बलिदानी थी। वह वीर जवाहर की बेटी, कमला नेहरू की जायी थी, अवतरण हुआ प्रयाग में जब, आज़ादी की छिड़ी लड़ाई थी। पली बढ़ी योद्धाओं के संग, खुद बानर सेना बनाई थी, गई जेल सदा थी समर्पित, सेनानी वह कहलाई थी।। अंत में इसी संग्रह से “शब्द” नाम की कविता के द्वारा, भाव व्यक्तता के लिए शब्दों के महत्व को देखें– शब्दों ने मुझे सुबह के सूर्य के साथ पक्षियों – सा चहचहाना सिखाया शब्दों ने मुझे बहार में फूलों की सुगंध – सा महकना सिखाया शब्दों से ही जान पाई कैसे होती है इबादत कैसे जुड़ा जा सकता है आदमी से कैसे सीखते हैं आदमी की रिवायत शब्दों ने ही सिखाया सबका दुख दर्द शब्दों ने सिखाया होना सबका हमदर्द शब्द न होते तो हर कोई गूंगा होता न बनता कोई रत्न न कोई मूंगा होता ब्रह्मांड में गूंज रहा शब्द आदरणीय सन्तोष खन्ना जी की रचनाएं अनुभव जन्य हैं। उन्होंने प्रत्येक रचना गहन अनुभूति के साथ, पाठक को आशान्वित करते हुए लिखी है। वैसे तो मैम किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं फिर भी उनके विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी यहाँ प्रस्तुत कर रही हूँ क्योंकि विविध कार्यक्षेत्रों में उनकी सहभागिता व उपलब्धि उनकी गहन अध्धयन शीलता की परिचायक है। आप पिछले तीस वर्षों से निरंतर प्रकाशित ‘महिला विधि भारती‘ त्रैमासिक पत्रिका की प्रधान संपादक है, साथ ही संसद से अधिकारी तथा राष्ट्रीय महिला आयोग से कंसल्टेंट के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उपभोक्ता फोरम, उत्तरी जिला में जज के रुप में पांच वर्ष तक अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। आप इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनीवर्सिटी, नई दिल्ली की काउंसलर हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी और अंग्रेजी में एम. ए तथा एल. एल.बी करने के साथ ही आपको डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी प्राप्त हुई है। अब तक उनके पांच काव्य संग्रह, तीन हिंदी नाटक, एक उपन्यास,एक कहानी संग्रह, समालोचना और अनुवाद विषय पर एक एक पुस्तक तथा एक पुस्तक ‘भारत की महान विभूतियां’ तथा ‘विधि विषयों पर पांच पुस्तकों समेत 20 मौलिक पुस्तकें तथा विधि विषयों पर 16 संपादित पुस्तकें प्रकाशित हैं। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों को देखते हुए वर्ष 2020 के लिए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से विधि भूषण पुरस्कार प्राप्त हुआ है, साथ ही उन्हें दो दो साहित्यिक संस्थाओं से विद्या वाचस्पति तथा विद्या सागर (डि लिट्) की उपाधि सहित कई सरकारी और गै़र–सरकारी संस्थाओं ने सम्मान और पुरस्कारों से सम्मानित किया है। उनका नाम वर्ल्ड बुक आफ रिकार्ड, लंदन और गोल्डन वर्ल्ड आफ रिकार्ड में भी अंकित हो चुका है । सौम्या पाण्डेय “पूर्ति“ संपर्क – [email protected] Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखगुड़िया कुमारी का लेख – सामाजिक कुप्रथा का दस्तावेज़ : कहानी ‘हड्डी’अगला लेखलखनलाल पाल की कलम से – रमकल्लो की पाती (भाग – 2) : मायके में रमकल्लो Editor RELATED ARTICLES पुस्तक डॉ. उर्मिला पोरवाल की कलम से दोहा-संग्रह ‘आरोही’ की समीक्षा February 8, 2026 पुस्तक दीपक गिरकर की कलम से – पवन शर्मा की लघुकथाओं में घर-परिवार और मानवीय संवेदनाएँ February 8, 2026 पुस्तक डॉ. मीनाक्षी जोशी की कलम से – अनुभवों के खुरदुरे धरातल पर आधारित लघुकथाएं February 8, 2026 4 टिप्पणी प्रतीत होता है कि अच्छी पुस्तक की सार्थक सहज समीक्षा। लेखिका और समीक्षिका दोनों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हो। जवाब दें जी निस्संदेह पठनीय पुस्तक है। उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका सादर आभार सर, बहुत बहुत धन्यवाद जवाब दें आदरणीया सौम्या जी ने काव्य संग्रह “मुट्ठी में सुरज” की बहुत सुन्दर व प्रेरणादायी समीक्षा लिखी लेखिका संतोष जी खन्ना व समीक्षक सौम्या जी को बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई, बहुत ही शानदार काव्य संग्रह, जवाब दें जी इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका अनंत आभार, सादर धन्यवाद जवाब दें कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! 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Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest रितेश ऽ निगम की कविता – यादों के तार February 8, 2026 कमलेश कुमार दीवान की नज़्म – ओ दस्तगीर February 8, 2026 दिलीप कुमार का व्यंग्य – माफी की दुकान February 8, 2026 डॉ मुकेश असीमित का व्यंग्य – हुक्का-वार्ता February 8, 2026 और अधिक लोड करें
प्रतीत होता है कि अच्छी पुस्तक की सार्थक सहज समीक्षा। लेखिका और समीक्षिका दोनों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हो। जवाब दें
जी निस्संदेह पठनीय पुस्तक है। उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका सादर आभार सर, बहुत बहुत धन्यवाद जवाब दें
आदरणीया सौम्या जी ने काव्य संग्रह “मुट्ठी में सुरज” की बहुत सुन्दर व प्रेरणादायी समीक्षा लिखी लेखिका संतोष जी खन्ना व समीक्षक सौम्या जी को बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई, बहुत ही शानदार काव्य संग्रह, जवाब दें
प्रतीत होता है कि अच्छी पुस्तक की सार्थक सहज समीक्षा।
लेखिका और समीक्षिका दोनों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हो।
जी निस्संदेह पठनीय पुस्तक है। उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका सादर आभार सर, बहुत बहुत धन्यवाद
आदरणीया सौम्या जी ने काव्य संग्रह “मुट्ठी में सुरज” की बहुत सुन्दर व प्रेरणादायी समीक्षा लिखी लेखिका संतोष जी खन्ना व समीक्षक सौम्या जी को बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई, बहुत ही शानदार काव्य संग्रह,
जी इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका अनंत आभार, सादर धन्यवाद