Monday, March 9, 2026
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किरण यादव की तीन ग़ज़लें

1.
वक़्त नहीं है और नहीं है फ़ुरसत भी,
कैसे दिन दिखलाती है ये क़िस्मत भी।

आईने तुझ से ये शर्त रही इक दिन,
पहचानी जायेगी अपनी सूरत भी।

सच को सबके आगे कह देना पल में,
हम रखते है ख़ुद में इतनी हिम्मत भी।

जिसको हम खो बैठे है जीवन भर को,
फिर है उसको पा लेने की चाहत भी।

जिस दिन साँसें मिट जायेगी दुनिया से
मिट जायेगी उस दिन दिल से नफ़रत भी।

2.
वो तो इक दीवाना है
उसको क्या समझाना है
कुछ खोना, कुछ पाना है
जग का ताना – बाना है
ये दुनिया कुछ और नहीं
एक मुसाफ़िरख़ाना है
राजा, रंक, गृहस्थ, फ़क़ीर
इक दिन सबको जाना है
अपनी तो क़िस्मत में ही
हर दिन धोखा खाना है
3.
इश्क़ में दोनों हैं शामिल
तेरी आँखें, मेरा दिल
जब भी देखूँ दिखता है
इन आँखों में तेरा दिल
मंज़िल-मंज़िल भटके हैं
तब पाया है ऐसा दिल
रात अँधेरी, तन्हाई
सहमा-सहमा मेरा दिल
आओ कभी इन राहों में
बैठेंगे दो दिल हिल-मिल
दुनिया भर की सुनता है
मेरी भी तो सुन ऐ दिल !
तेरे दिल पर नज़रें हैं
थाम के रखना अपना दिल
किरण यादव, दिल्ली
ईमेल – kirany15880@gmail।com
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