Friday, June 21, 2024
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अंजू केशव की दो ग़ज़लें

1.
आप जब व्यवहार की बातें करें
ख़ुद के भी किरदार की बातें करें
जानते हैं वो भी सूई की सिफ़त
लोग जो तलवार की बातें करें
हक़ दिलाने की हो कोशिश भी कोई
या कि बस हक़दार की बातें करें
कुछ अलग अपना नज़रिया भी तो हो
या कि बस अखबार की बातें करें
बात तूफ़ानों की लहरों की हो क्यों
क्यों न हम उस पार की बातें करें
हाथ पर धर हाथ ये क्या ठीक है
हर दफ़ा सरकार की बातें करें
बैठने का हो बहाना साथ बस
हम भले बेकार की बातें करें
2.
जिंदगी नें इस तरह बहला दिया
दर्द में जीना मुझे सिखला दिया
कामयाबी की न सुनवाई हुई
केस मेरा भाग्य नें टहला दिया
आ गए सपने खिलौने ले के फिर
नींद में सर माँ नें जब सहला दिया
मुस्कराए आज हम लगने पे चोट
रब! तेरे नहले पे लो दहला दिया
कह दिखाता तू इधर का है उधर
आइने को आइना दिखला दिया
कर दिया खुश दिन को सूरज दे के और
रात को दीये से ही फुसला दिया
हसरतें भी डूबतीं जा कर कहाँ
ख्वाबों नें दरिया बहुत छिछला दिया
रहनुमाई का हुनर कब सीखते
वक्त नें तो वक्त ही पिछला दिया
अंजू केशव
जमशेदपुर, झारखंड
8210046398
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2 टिप्पणी

  1. अच्छी ग़ज़ल है आपकी अंजू जी!
    कुछ शेर जो अच्छे लगे-

    आप जब व्यवहार की बातें करें
    ख़ुद के भी किरदार की बातें करें।

    बात तूफ़ानों की लहरों की हो क्यों
    क्यों न हम उस पार की बातें करें

    बैठने का हो बहाना साथ बस
    हम भले बेकार की बातें करें।

    2.
    जिंदगी ने इस तरह बहला दिया
    दर्द में जीना मुझे सिखला दिया

    कामयाबी की न सुनवाई हुई
    केस मेरा भाग्य नें टहला दिया

    आ गए सपने खिलौने ले के फिर
    नींद में सर माँ नें जब सहला दिया

    मुस्कराए आज हम लगने पे चोट
    रब! तेरे नहले पे लो दहला दिया

    कर दिया खुश दिन को सूरज दे के और
    रात को दीये से ही फुसला दिया
    वैसे दूसरी ग़ज़ल ज्यादा अच्छी लगी।
    बहुत-बहुत बधाइयाँ आपको।

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