Monday, July 22, 2024
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पाटीदार सेंटर, वेम्ब्ले में लंदन जीमन कार्यक्रम का आयोजन

25 जून को सत्ताविस  पाटीदार  सेंटर,वेम्ब्ले  में लंदन जीमन कार्यक्रम मनाया गया।लंदन में जीमण का नाम आते ही हम राजस्थान की यादों में खो जाते है। राजस्थान का अहसास, अपनी सांस्कृतिक विरासत को यूके के हर घर तक पहुँचाने वाली राजस्थान एसोसिएशन यूके के 2-3 महिने को अथक परिश्रम इस  बात का गवाह है कि यह कार्यक्रम सदैव की तरह इस बार भी शानदार जानदार और अत्यधिक सफल रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ रजिस्ट्रेशन, स्वागत सत्कार और गजानन जी की आरती द्वारा हुआ । हॉल चारों तरफ़ से मारवाड़ थीम पर सुसज्जित हो रहा था। सभी पारम्परिक वेशभूषा में दिख रहे थे। एक दूसरे से मिलना, फोटो लेना, नम्बर एक्सचेंज करना, प्रत्येक व्यक्ति व्यस्त दिख रहा था।
युवा और नयी पीढ़ी को जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम का विचार किया गया जो पूरे समय कुछ गतिविधियां करेगा। दिलीप जी और अन्य ने इसकी रूपरेखा कार्यक्रम में रखी। राजस्थानी संस्कृति को प्रदर्शित करने के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए। स्थल और फोटोबूथ को सजावट टीम द्वारा विशेष रूप से डिजाइन और सजाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप आश्चर्यजनक तस्वीरें आई हैं जो मेहमानों को वर्षों तक पसंद आएंगी। डिजिटल मीडिया  टीम ने सभी को सुचारु रूप से संप्रेषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
श्री राजीव खीचर ने बताया कि राजस्थान एसोसिएशन आपसी प्रेम और टीम वर्क को महत्व देता है। 100 स्वयंसेवकों ने  2 महीने से अधिक समय तक अथक परिश्रम किया है। सभी ने  लोगों के पास जाकर उन्हें आमंत्रित कर यात्रा की शुरुआत की।  राज्यपाल महामहिम श्री कलराज जी मिश्रा, विदेशों से अनेक राजस्थानी संगठनों और गणमान्य लोगो ने शुभकामना सन्देश भेजे।
हमारे वॉलेंटियर टीम के सदस्य आलोक जी ने बताया कि कार्यक्रम में प्रभावशाली राजस्थानी कला का प्रदर्शन, लोक संगीत और नृत्य, स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन, और मेहमानों के लिए पारंपरिक “मनवार” आतिथ्य। इस कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा के स्पीकर डॉक्टर सी पी जोशी जी , ब्रिटिश सांसद वीरेंदर शर्मा जी , प्रचारक चंद्रकांत जी शर्मा , महिला रोज़गार प्रेणता  रुमा देवी जी , संत शिवज्योतिषानन्द जी  , ब्रिटिश आर्मी में कार्यरत राजस्थानी अधिकारी ,भारतीय उच्चायोग से श्री हरीश जी , अक्षयपात्र के श्री भवानी सिंह जी आदि गणमान्य लोगो ने शिरकत की।
श्री डॉक्टर सी पी जोशी जी ने राजस्थानी लोगों के उत्साह की भरपूर प्रसंशा की। राजस्थान भवन लंदन  में बनाने की मांग पर उन्होंने गौर किया। सभी मेहमानो ने अन्य कार्यक्रम जैसे मिर्चीबड़ा फेस्ट, गणगौर  आदि कार्यक्रमों की जानकारी जो लंदन में ये संगठन आयोजित करता है।
*कार्यक्रम की प्रवक्ता पुष्पा चौधरी ने बताया की लंदन जीमण मे बाड़मेर से ख़ास तौर पर सिरकत कर पधारी नारी शक्ति अवार्ड से पुरुस्कृत रुमा देवी जी से मिलना सभी के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।*
मंच का संचालन कर रहे अनुजा जी , सृष्टि जी ने बताया कि हर बच्चा हो या बड़ा सबकी प्रस्तुति बहुत बढिया रही । जब सात साल की बच्ची “बाजूबंद की लूम पर “नृत्य करती है तो सबका उत्साह अपने समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर मोहित हो उठता है।
जयपुर की चुनरी गाने पर सानवी, मानवी व चुक्कु का नृत्य देखने लायक था। रुही, ताशी, हैजल का नृत्य और सुरभि जैन की प्रस्तुति देखकर प्रत्येक व्यक्ति अपनी राजस्थानी समृद्धि को देखकर खुश और गर्वित महसूस कर रहा था।
RAUK के  प्रतिनिधि श्री राजीव जी डांगा के अनुसार, लंदन जीमन कार्यक्रम मे इस वर्ष लगभग 1000 लोगों की उपस्थिति रही , लगभग 200 से अधिक व्यक्तियों के नाम प्रतीक्षा सूची में रहे । हर साल क्षमता बढ़ने के बावजूद इसकी काफी मांग रहती है।  क्योंकि लोग उत्सुकता से इसके आगमन की प्रतीक्षा करते हैं । समय अपनी द्रुत गति से चले जा रहा था पर मन था कि भरने का नाम ही नहीं ले रहा था और हो भी कैसे ? साल भर बाद जो आता है ये उत्सव।
एक के बाद एक प्रस्तुति चल रही थी,प्रियंका,सुमन और पुष्पा की प्रस्तुति ने सबके चेहरे पर चमक लादी वहीं राखी, हेम,सोहम और शिवि की प्रस्तुति ने मन मोह लिया तथा प्रेरणा दी कि हम विदेश में रहकर अपने बच्चों के साथ किस तरह अपनी संस्कृति को प्रसारित करें।
लंदन जीमन एक ऐसा कार्यक्रम  है जो बच्चों, वयस्कों और वरिष्ठों के लिए खुशी लेकर आता है; इस साल कुछ खास था वो था” राजस्थानी प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता “ जिसमें थीम के अनुसार मारवाड़ तथा मोटा अनाज के बारे में प्रश्न पूछे गये, ये बहुत ही सराहनीय प्रयास रहा बच्चों को राजस्थान के बारे में जानकारी देने का। जिसने उत्तर दिया उसको मोटिवेशन ईनाम भी दिया गया।
इस साल लंदन जीमन इवेंट की थीम ‘मारवाड़’ थी । थीम के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर सजावट, पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन जैसे चूरमा, दाल, गट्टा करी, केर सांगरी, राबोडी, लहसुन की चटनी, बाजरा रोटी , और बेसन की चक्की। टीम ने पंगत में लोगो को बिठाकर जीमण की मनवार की जो आधुनिक युग में बड़े शहरों से लुप्त हो रही है।  पाक विशेषज्ञ नन्द लाल जी ने उल्लेख किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मार्च में अपने 75 वें सत्र में 2021 ने 2023 को बाजरा का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया। “हम भाग्यशाली हैं कि राजस्थान उनकी बहुतायत है। इसलिए, हमने उनके नियमित मेनू और में कुछ नया करने का फैसला किय। ‘श्री-अन्ना’ (बाजरा) का उपयोग करके अधिक प्रामाणिक व्यंजन तैयार करें”।
सभी उम्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया, और कई हफ्तों तक अभ्यास किया। कार्यक्रम में भाग लेना न केवल मनोरंजक था बल्कि विभिन्न पारंपरिक प्रदर्शनों में भाग लेना भी रोमांचकारी था। हमने 20 से अधिक प्रस्तुतियाँ देखीं, जिनमें एकल कलाकार, युवा कलाकार, पारिवारिक नृत्य समूह, लोक नृत्य समूह, गायक और वादक शामिल थे। कुछ कलाकार वास्तव में प्रभावशाली थे, जिन्होंने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा। प्रत्येक प्रदर्शन के बाद, तालियाँ कुछ देर तक गूँजती रहीं, जो दर्शकों की सराहना को दर्शाती थीं।
RAUK के  प्रतिनिधि श्री राजीव जी डांगा के अनुसार, लंदन जीमन कार्यक्रम मेइस वर्ष लगभग 1000 लोगों की उपस्थिति रही , लगभग 200 से अधिक व्यक्तियों के नाम प्रतीक्षा सूची में रहे । हर साल क्षमता बढ़ने के बावजूद इसकी काफी मांग रहती है।  क्योंकि लोग उत्सुकता से इसके आगमन की प्रतीक्षा करते हैं ।
राजस्थान एसोसिएशन यूके के सरंक्षक श्री कुलदीप सिंह जी शेखावत ने बताया की एक बार फिर उच्च स्तरीय सफल लंदन जीमन २०२३ आयोजन कर अपना परचम फहराया है।  ।
हमारे सभी प्रायोजकों “डीएनएस अकाउंटेंट,एम टी वी चैनल 711 ,अक्षय पात्र फाउंडेशन यूके ,पैट्रन प्रोडक्शन, श्री जगन्नाथ सोसाइटी यूके, आर्यन हर्बल्स यूके ,5वीं पीक मीडिया”को भामाशाह बनकर जीमण को सफल बनाने के लिये  हार्दिक धन्यवाद।
लंदन से इंदु जी बरौठ की “राजस्थानी कैसे सीखें“ पुस्तक का विमोचन डा. सी पी जोशी तथा डॉ. रुमा देवी जी तथा अन्य सभी अतिथि द्वारा किया गया , ये एक ऐसी पुस्तक है जिससे भारत तथा भारत से बाहर रहने वाले लोग राजस्थानी भाषा सीख सकते हैं ।
लंदन जीमण  एक खुशी का अवसर है जो लोगों को राजस्थान की खुशबु , संस्कृति  , पहनावा , भोजन  , श्रृंगार , भाषा और अपणायत  का आनंद लेने के लिए एकजुट करता है। पारंपरिक व्यंजनों , हँसी का आदान-प्रदान, और अपने रिश्तों को मजबूत करने का अनूठा उत्सव है । ये भारत से बाहर राजस्थनीयों का सबसे बड़ा उत्सव है जिसमें लोग मिलते है। अपनी संस्कृति को जीते है तथा अगले साल फिर से आने का वादा करते है।
ये जीमण केवल एक दिन का नहीं है क्योंकि कि सब यहाँ से इतनी यादें ले जाते हैं जो अगले साल तक उन यादों को सहेज कर कखते है, पुनः आने के लिये , अपनो से मिलने के लिये, अपनी संस्कृति को जीने के लिये।
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