होमकवितासूर्यकांत शर्मा की कविता - युद्ध कविता सूर्यकांत शर्मा की कविता – युद्ध By Editor March 22, 2026 2 244 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp युद्व की भीषणता का बढ़ता जा रहा शैतानी आकार। दिन पर दिन बारूदी सतह का होता जा रहा विस्तार। हिंसा -हमला घात- प्रतिघात सुरसा मानिंद बढ़ाते जा रहे अपना हिंसक व्यवहार। साँसों पर युद्ध जनित प्रदूषण का शेषनागी अवतार ज़कड़ता जा रहा हलाहल विष सा धिक्कार। तिस पर भी सत्ता-लिप्सा औ लोलुपता-लम्पटता का दिन दूना,रात चौगुना बढ़ता जा रहा अय्यारी अवतार । सूर्यकांत शर्मा संपर्क – [email protected] Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखडॉ मुकेश असीमित का व्यंग्य – इलाज का टेंडरअगला लेखवामा अन्तरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव नागपुर 2026 – (एक रिपोर्ट) Editor RELATED ARTICLES कविता राजेश नरोलिया की कविता – चेहरे March 22, 2026 कविता डॉ. विपिन पवार की कविता – मुंबई की कामकाजी महिलाएं March 21, 2026 कविता डॉ शोभा स्वप्निल की कविता – साइकिल March 21, 2026 2 टिप्पणी हमारे आस पास कई देशों में हो रहे युद्धों की विभीषिका से आज सारा संसार और सारी मानव जाति प्रभावित है। युद्ध जो अपने आप में समस्या होते हैं किसी समस्या का हल नहीं हो सकते। आपने इस सामयिक चिंतन को विचारोत्तेजक शब्द दिए हैं। जवाब दें प्रिय बिमल सहगल जी, आपका हृदय से आभार। जवाब दें कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest वामा अन्तरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव नागपुर 2026 – (एक रिपोर्ट) March 22, 2026 डॉ मुकेश असीमित का व्यंग्य – इलाज का टेंडर March 22, 2026 दिलीप कुमार का व्यंग्य – संपूर्ण समाधान March 22, 2026 डॉ. गरिमा भाटी की लघुकथा – वो फूलों-सी महकती एक लड़की March 22, 2026 और अधिक लोड करें
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हमारे आस पास कई देशों में हो रहे युद्धों की विभीषिका से आज सारा संसार और सारी मानव जाति प्रभावित है। युद्ध जो अपने आप में समस्या होते हैं किसी समस्या का हल नहीं हो सकते। आपने इस सामयिक चिंतन को विचारोत्तेजक शब्द दिए हैं।
प्रिय बिमल सहगल जी,
आपका हृदय से आभार।