Saturday, May 18, 2024
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विभाकर दीक्षित की कविता : मैं अपने गाँव में शहर का विकास ला रहा हूँ

मैं अपने गाँव में शहर का विकास ला रहा हूँ
बगीचे को काट कर पार्क बना रहा हूँ।
स्विमिंग पुल के लिए खेतों को खुदवा रहा हूँ।
आम लीची जामुन अब बोतल में बंद मिलेंगे।
आप सभी को पुराने जीवन से छुटकारा दिला रहा हूँ।
मैं अपने गाँव में शहर का विकास ला रहा हूँ। 
बीच जंगलों से हमने हाइवे लाने का फैसला किया है।
जंगल के जानवरों का तबादला चिड़ियां घरों में हुआ है।
स्वच्छ हवा की चिंता मत करो,   सिलिंडर में ऑक्सीजन भर भर कर रख लिया है।
जीवजंतुवो को देखने के लिए हमने साल में दो बार सर्कस का टिकट बुक कर लिया हैं।
इस साल के बजट में कुछ और नई योजनाएँ गढ़ रहा हूँ।
मैं अपने गाँव में शहर का विकास ला रहा हूँ।
गाँव की झलक को किताबों के पाठ्यक्रम में हम लाएँगे।
खेत खलिहान धूल मिट्टी से आपके बच्चों को पूरी तरह बचायेंगे।
नहर नदी तालाब झरने भी भूगोल के पाठ बन जाएंगे।
प्रैक्टिकल के लिए हम बच्चों को वाटरपार्क जरूर दिखलायेंगे।
चापाकल हटवा कर पानी को बोतलों में भरवा रहा हूँ।
मैं अपने गाँव में शहर का विकास ला रहा हूँ।
बड़े बड़े गाँव अब ऊँची अपार्टमेंट्स में बदल जाएँगे।
तीज त्योहार पर ही सब अपने कमरे से बाहर नज़र आएंगे।
कौन किस गाँव में रहता है ये पूछने के लिए अब लोग हमें नहीं सताएंगे।
दो कमरों में बंद हम अपनी ज़िंदगी बिताएँगे।
संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार को बढ़ावा दिला रहा हूँ।
मैं अपने गाँव में शहर का विकास ला रहा हूँ।
संस्कृत और अंग्रेज़ी दोनों के शिक्षा में हम सामानता खोज लाए है।
संस्कृत पढ़े पुरुष और अंग्रेज़ी पढ़ी स्त्री के बदन पर वस्त्र कम पाए है।
संस्कार की बात आजतक हम वेद पुराणों में पाएँ है।
अपने बच्चे मॉडर्न बन सके इसलिए हम डिस्कोबार खुलवाएं है।
छोटी छोटी दुकानों को तोड़ कर सिटी कॉम्प्लेक्स बनवा रहा हूँ।
मैं अपने गाँव में शहर का विकास ला रहा हूँ। 
बड़ो के पैर छूने वाली कमरतोड़ परम्परा को जड़ से मिटाऊंगा।
हाथ से हाथ मिलाने और होठ से गाल चूमने की सभ्यता को खूब फैलाऊंगा।
दादी नानी की सेवा की समस्या से निजात पूरा दिलाऊंगा।
हर गाँव को मैं एक नहीं दो दो वृद्धाश्रम दिलवाऊँगा।
कुछ इस तहर से अपने गाँव को सजा रहा हूँ।
मैं अपने गाँव में शहर का विकास ला रहा हूँ।
पोंगो और डोरेमोन और पबज्जि के विषय पर क़्यूज कॉम्पटीशन करवाऊंगा।
कुछ इसतरह इन्डोरगेम्स को लोकप्रिय बनाऊंगा।
वाईफाई, स्मार्ट फोन , टिकटॉक की सभी सुविधाएं दिलवाऊंगा।
वादा है आपसे हरेक हाथ को इसी तरह काम दिलाऊंगा।
पूरब के सूरज को डुबोकर पश्चिमी सभ्यता को भीख में ला रहा हूँ।
मैं अपने गाँव में शहर का विकास ला रहा हूँ।
विभाकर दीक्षित
विभाकर दीक्षित
संपर्क - vibhakardixit20166@gmail.com
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