Tuesday, March 10, 2026
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बिमल सहगल की कविता – सफर : प्रारब्ध का नियति तक

प्रारब्ध की लेखनी ही
तय करती है
किसी मनुष्य का
जग में अकस्मात चले आना
मगर स्वयं-लिखी
कर्मों की किताब का
उपसंहार ही
अंत में बताता है
वहाँ उसके होने में थी भला
कोई कभी सार्थकता,
नियति जबकि
निर्धारित कर देती है, बेशक
बहुत पहले से वो समय
जब तय है
उसका लौट जाना।
मिटाये कहाँ मिटते हैं
यह प्रारब्ध और नियति-द्वय
जिनसे रहता है जीवन चक्र बंधा;
और वश में कहाँ अपने होता है
किसी का जग में आना-जाना।
वो लिखी हुई
किताब की जिल्द, मगर
और उसमें कैद
रहस्य और रोचकता भरी
कोई आत्मकथा,
जरूर बांध कर रखती हैं
प्रारब्ध की संभावना भरी
शुरुआत को
नियति के पूर्व-आदेशित
समापन काल तक,
कर्मों के हिसाब भरे
उन्हीं पन्नों के फैलाव से।
बिमल सहगल
बिमल सहगल
नवंबर 1954 में दिल्ली में जन्मे बिमल सहगल, आई एफ एस (सेवानिवृत्त) ने दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। अंग्रेजी साहित्य में ऑनर्स के साथ स्नातक होने के बाद, वह विदेश मंत्रालय में मुख्यालय और विदेशों में स्तिथ विभिन्न भारतीय राजदूतवासों में एक राजनयिक के रूप में सेवा करने के लिए शामिल हो गए। ओमान में भारत के उप राजदूत के रूप में सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने जुलाई, 2021 तक विदेश मंत्रालय को परामर्श सेवाएं प्रदान करना जारी रखा। कॉलेज के दिनों से ही लेखन के प्रति रुझान होने से, उन्होंने 1973-74 में छात्र संवाददाता के रूप में दिल्ली प्रेस ग्रुप ऑफ पब्लिकेशन्स में शामिल होकर ‘मुक्ता’ नामक पत्रिका में 'विश्वविद्यालयों के प्रांगण से' कॉलम के लिए रिपोर्टिंग की। अखबारों और पत्रिकाओं के साथ लगभग 50 वर्षों के जुड़ाव के साथ, उन्होंने भारत और विदेशों में प्रमुख प्रकाशन गृहों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और भारत व विदेशों में उनकी सैकड़ों रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। अंत में, 2014-17 के दौरान ओमान ऑब्जर्वर अखबार के लिए एक साप्ताहिक कॉलम लिखा। संपर्क - [email protected]
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4 टिप्पणी

  1. भारतीय दर्शन ,अध्यात्म,कर्म और पुरुषार्थ को एक लड़ी में पिरो कर , आज के पाठकों को एक शानदार मंजर पेश करती कविता।

  2. आदरणीय सर,

    प्रारब्ध, नियति एवं जीवन चक्र से जुड़ी सारगर्भित कविता के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई सर जी।

  3. आदरणीय सूर्य कांत जी व नीलिमा जी, मुझे प्रसन्नता है कि कविता के भावों ने आपके हृदय को छुआ। अपने विचार सांझा करने और प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद। किसी कवि, लेखक के लिए पाठकों से सीधे जुड़ना और उनकी राय जानना एक सुखद अनुभव होता है।

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