Monday, July 22, 2024
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डॉ तारा सिंह अंशुल की कविता – वतन प्रहरी जांबाज़ वो सरहदों पर डटे हैं

बर्फ़ओढ़े वतन प्रहरी जांबाज़ वो सरहदों पर डटे हैं
कर देते हैं जां कुर्बान पर सीमाओं से न कभी हटे हैं
देश की सीमा में जब जब अरि करते हैं घुस पैठ
जवान देश के टूट पड़ते यूं देते हैं उनके कान ऐंठ
मारते उन्हें घूंसो डंडो से जिससे उनके अंग फटे हैं
बर्फ़ ओढ़े वतन प्रहरी जांबाज वो सरहदों पर डटे हैं
घुसपैठिये कोई हों चाहे चीन के हों या पाकिस्तानी
सीमा लांघते ही सैनिक उनके गंवाते हैं जान जानी
गर्व है हमें वीर सैनिकों पर वह न कभी नक कटे हैं
बर्फ ओढ़े वतन प्रहरी जांबाज वो सरहदों पर डटे हैं
मां के वीर सपूत जवान शत्रु के छक्के छुड़ाने वाले
भारतीय सैनिक पराक्रमी जां की बाजी लगाने वाले
बर्फीले तूफ़ां में हौसले बुलंद जवान सीमा पर डटे हैं
बर्फ़ ओढ़े वतन प्रहरी जांबाज वो सरहदों पर डटे हैं
डॉ. तारा सिंह अंशुल
डॉ. तारा सिंह अंशुल
विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मानों से नवाजी़ गयी वरिष्ठ कवयित्री , लेखिका , कथाकार , समीक्षक , आर्टिकल लेखिका। आकाशवाणी व दूरदर्शन गोरखपुर , लखनऊ एवं दिल्ली में काव्य पाठ , परिचर्चा में सहभागिता। सामाजिक मुद्दे व महिला एवं बाल विकास के मुद्दों पर वार्ता, कविताएं व कहानियां एवं आलेख, देश विदेश के विभिन्न पत्रिकाओं एवं अखबारों में निरन्तर प्रकाशित। संपर्क - [email protected]
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