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कामिनी गुप्ता की कविता

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कभी बेमतलब सी बातों पे भी मुस्कुराते थे वो,
कोई गीत भी फिर सहज ही गुनगुनाते थे वो।
दिल में हलचल है उनके न जानता था कोई,
हर ग़म छुपाकर जाने कैसे मुस्कुराते थे वो।
तुम कुछ बातों की गहराई कहां समझते हो,
गहरी बात को बातों- बातों में समझाते थे वो।
भुलाकर कड़वी यादें आगे कदम बढ़ा लो तुम,
मुश्किल हालात को भी आसान बनाते थे वो।
मैं चमन में पुष्पों को ही देखता रहा यहां फिर,
कांटों से भी यूं दिल से दोस्ती निभाते थे वो।
उनके जैसा कोई और भी तो होगा जहां में भी,
जाने खुद को सबसे अलग ही बताते थे वो।

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