साभार : Web Dunia
कुछ जीवन शापित होते हैं
प्रारब्ध कर्म से लेपित होते हैं ।
गीतों के होते हैं राजकुमार,
संघर्ष सदा जम कर करते है।
जनकवि होकर भी आत्महंता होते हैं।
प्रेम प्यार समर्पण से ध्वनित होते हैं।
आधी आबादी ऑ सर्वहारा के होते हैं मसीहा,
तिस पर भी पग पग पर अपमानित होते हैं।
कुछ जीवन शापित होते हैं।
करुणा दया मित्रता छलकते
श्वास निच्छवास उसांस
से प्रतिध्वनित होते हैं,
शैलेंद्र से शंकर से विरल होते हैं।
स्वयं गरल पीकर,
मोहिनी रुपा विष्णु होते हैं,
दुनियादारी से नावाकिफ होते हैं
कुछ जीवन शापित होते हैं।

बस यूं ही प्रेम प्यार से
पूरित होते हैं।
मानवीय संवेदना
जनित गुण दुर्गुण से
होते हैं द्विगुणित,
क्योंकि कहा ना
कुछ जीवन शापित होते हैं!

– सूर्य कांत शर्मा

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