मुंबई, तारीख 1 मार्च 2025 की शाम को, देश के अति प्रतिष्ठित ‘अंतर्राष्ट्रीय मंच विश्व मैत्री मंच’ की महाराष्ट्र शाखा द्वारा चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम डोंबिवली पलावा में सुश्री मनवीन कौर पाहवा के आवास पर किया गया । सर्वप्रथम मनवीन जी ने, भाषा पर आधारित एक पंजाबी गीत ‘… मेरी माँ बोली (मातृ भाषा ) पंजाबी, मैनु मान है अपनी बोली ते…’ प्रस्तुत किया। गीत ने सभी को भाव-विभोर कर दिया । सुश्री कामिनी अग्रवाल ने चादर को प्रेम-प्रतीक बनाकर कविता पढ़कर वातावरण को प्रेममय बना दिया। सुश्री उषा साहू ने, जीवन में, पति-पत्नी के सामंजस्य के आधार पर कहानी ‘साब’, प्रस्तुत की। मंच की अध्यक्ष सुश्री मृदुला मिश्रा ने राधा, गोपियाँ और कृष्ण की प्रीत से भरी हुई कविता ‘कुंवार की पूर्णिमा’ और डॉ. प्रभा शर्मा सागर ने अपनी कविता ‘ क्या तुम्हें मालूम है…’ में पति-पत्नी के बीच अतुल्य प्यार की व्याख्या प्रस्तुत की। सुश्री शिल्पा सोनटक्के ने शेर और क्षणिकाओं के साथ एक कविता ‘बहारों का मौसम सुहाना न होता, अगर उसमें तेरा फसाना न होता’ पढ़कर सभी को प्रेम रंग में डुबो दिया। सत्यवती मौर्य की ‘फूंक’ कविता ने, मानव जीवन के हरेक क्षेत्र को फूंक के द्वारा स्पर्श किया।
कामिनी अग्रवाल ने मानवीन जी को श्रीमद भगवत गीता की प्रति देकर उनका सम्मान किया।
मनवीन जी ने सुस्वादु भोजन से और गरिमामय आतिथ्य से वातावरण को अपनत्व से भर दिया।
अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की महाराष्ट्र शाखा का चौपाल
कार्यक्रम बहुत अच्छा रहा होगा ऐसा पढ़कर महसूस हुआ।मातृभाषा चाहे किसी भी प्रांत की हो, माँ सी प्रिय होती है। साहित्यिक गोष्ठियाँ सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करती बल्कि भाषा को समृद्ध कर उत्सव की तरह आनंद देती हैं। आप सभी को बहुत-बहुत बधाइयाँ ऐसे आयोजन होते रहें। हम जैसे लोग पढ़कर ही आनन्द महसूस कर लेते हैं।