वारणानगर (कोल्हापुर- महाराष्ट्र) स्थित वारणा विश्वविद्यालय अंतर्गत यशवंतराव चव्हाण वारणा महाविद्यालय में वारणा संवाद क्लब एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतर विश्वविद्यालयीय अंतरराष्ट्रीय काव्य संमेलन एवं काव्यपाठ प्रतियोगिता में देश-विदेश के सौ से अधिक लेखक, कवि, साहित्यकार और विद्यार्थी -विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस आयोजन में संयोजक महाविद्यालय के साथ-साथ तात्यासाहेब कोरे अभियांत्रिकी एवं तंत्रशिक्षण महाविद्यालय तथा औषध निर्माण शास्त्र महाविद्यालय के छात्रों ने भी विशेष भागीदारी निभाई। कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. प्रकाश चिकुर्डेकर ने किया। अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एम. शेख ने की।
इस अवसर पर श्री वारणा विभाग शिक्षण मंडल के अध्यक्ष विधायक डॉ. विनय कोरे-सावकर, वारणा विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलाधिकारी एन. एच. पाटील, कुलगुरु प्रा. डॉ. डी. टी. शिर्के एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. व्ही. व्ही. कारजीनी ने शुभेच्छा संदेश प्रेषित किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ रोपण एवं पौधों को सिंचित कर किया गया। यह आयोजन नागरी लिपि परिषद ऑस्ट्रेलिया, नागरी लिपि परिषद नई दिल्ली, रूसी राज्य मानव्यविद्या विश्वविद्यालय (मास्को-रूस), शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर, महाविद्यालय का आंतरिक गुणवत्ता हमी कक्ष, संशोधक विचार महासंघ और शिवाजी विश्वविद्यालय हिंदी प्राध्यापक परिषद के विशेष सहयोग से अंतर्जालीय माध्यम से संपन्न हुआ।
स्वागत भाषण में संयोजक डॉ. प्रकाश चिकुर्डेकर ने कहा—
“उच्च शिक्षा का माध्यम अब हिंदी बन रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को अब भाषा की किसी प्रकार की भीतियां नहीं पालनी चाहिए। हिंदी भारतीय संस्कृति, परंपरा और एकात्मता की प्रेरणा देती है। हिंदी के माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों के लिए केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में उद्योग, व्यवसाय एवं रोजगार की व्यापक संभावनाएं उपलब्ध हैं।”
अध्यक्षीय समारोप में प्राचार्य डॉ. शेख ने कहा—
“हिंदी एक मधुर भाषा है, जिसकी एक सुदीर्घ परंपरा है। हिंदी के माध्यम से हम अपने विचारों, भावनाओं और आदर्शों का व्यापक रूप समूचे विश्व के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं।”
आभासी माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अतिथि कवियों में कवयित्री डॉ. सुनीता शर्मा (ऑस्ट्रेलिया), साहित्यकार डॉ. रत्नाकर नराले (कनाडा), लेखिका प्रा. डॉ. इंदिरा गाजिएवा (मास्को-रूस), लेखिका ममता तिवारी (बहरीन), डॉ. हरिसिंह पाल (नई दिल्ली), कवयित्री डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’ (मेरठ- दिल्ली), डॉ. मुक्ति शर्मा (अनंतनाग-कश्मीर) सहित मास्को विश्वविद्यालय के हिंदी भाषा विज्ञान विभाग की छात्राएँ अनास्तासिया बुर्दा, अनास्तासिया शितिकोवा, एलीना जव्यागिन्त्सेवा, वरवरा शेर्बाकोवा, मार्गारीटा एर्माल्युक एवं एलेना शाख ने अपनी कविताओं से उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा, समाज, शिक्षा, राजनीति, देशभक्ति, पर्यावरण, नारीशक्ति, युवाशक्ति, परिवार, माता-पिता तथा भारतीय किसान-मजदूर जैसे विषयों पर प्रभावी काव्य प्रस्तुत किए।
निर्णायक के रूप में डॉ. बी. के. वानोळे और डॉ. आर. एस. पांडव उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. आर. बी. बसनाईक, प्रा. गिरीजा कोकरे-देशाई, प्रा. रविंद्र पाटील, डॉ. प्रीति शिंदे-पाटील, प्रा. शिल्पा पाटील, प्रा. वर्षा रजपूत एवं प्रा. दीपाली पाटील ने विशेष योगदान दिया।
स्वागत भाषण समारोह संयोजक हिंदी विभाग अध्यक्ष प्रो.डॉ. प्रकाश चिकुर्डेकर ने किया, सूत्रसंचालन प्रा. रविंद्र पाटील ने किया और आभार प्रदर्शन प्रा. गिरीजा कोकरे-देशाई ने व्यक्त किया।
प्रतियोगिता के विजेता:
यशवंतराव चव्हाण वारणा महाविद्यालय
वरिष्ठ विभाग: पार्वती कामी, मनाली हिरवे, साक्षी राऊत, अस्मिता कवारे
कनिष्ठ विभाग: प्रार्थना सातवेकर, आयुष महाजन, वेदिका पांढरबळे, श्रेया पाटील
किमान कौशल्य: दिव्या भंडारी, नम्रता गाडे, श्रावणी कुंभार, यशवर्धन मोरे
तात्यासाहेब कोरे अभियांत्रिकी महाविद्यालय
वैष्णवी पाटील, सायली डांगे, वैष्णवी चौगुले
तात्यासाहेब कोरे औषधनिर्माण शास्त्र महाविद्यालय
निखिल काळे, सिद्धि पंडित, कृषी पाटील, श्रुति कांबळे, संदीप जाधव।
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फोटो विवरण:
वारणानगर स्थित वारणा विश्वविद्यालय अंतर्गत हिंदी अंतरराष्ट्रीय काव्यपाठ प्रतियोगिता के विजेताओं के साथ प्राचार्य डॉ. ए. एम. शेख एवं संयोजक प्रो. डॉ. प्रकाश चिकुर्डेकर।
पढ़ कर अच्छा लगा। हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता की दृष्टि से इस तरह के कार्यक्रम होते रहना चाहिये। बहुत-बहुत बधाई।