मधुरेश मिश्रा की पुस्तक ‘जाने-अनजाने पदचिह्न‘ का भव्य लोकार्पण संपन्न।
नेहरू सेंटर, लंदन; मंगलवार, 10 दिसंबर 2024
हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए नेहरू सेंटर, लंदन में मधुरेश मिश्रा की काव्य पुस्तक ‘जाने-अनजाने पदचिह्न’ का लोकार्पण हुआ। ऊर्जावान कवि आशीष मिश्रा जी ने पुस्तक की पृष्ठभूमि और रचनाकार का परिचय देकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्य अतिथि, पूर्व ब्रिटिश सांसद वीरेंद्र शर्मा जी ने साझा किया कि वे मधुरेश जी और उनके सामाजिक कार्यों को वर्षों से जानते हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक और इसका शीर्षक मधुरेश जी के व्यक्तित्व से पूरी तरह मेल खाता है और यह पुस्तक लोगों के लिए प्रेरणादायक होगी।
विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध कवि, कहानीकार और लेखक श्री तेजेन्द्र शर्मा जी ने कहा कि पिछले दशक में ब्रिटेन में हिंदी लेखन का महत्वपूर्ण उभार हुआ है, जिसमें नए रचनाकार बेहतरीन कविताएँ और कहानियाँ लिख रहे हैं। मुझे विश्वास है कि मधुरेश भी उसी श्रेणी में हैं। उनकी कविताओं में आशा स्पष्ट झलकती है। उन्होंने काव्य संग्रह ‘जाने-अनजाने पदचिह्न’ से ‘एक अजीब सी लड़ाई’ कविता की पंक्तियाँ भी सुनाईं –
“एक अजीब सी लड़ाई, खुद से लड़ता रहता हूँ। खुद! खुद से बेहतर बनूँ, खुद को गढ़ता रहता हूँ।”
प्रमुख अतिथि डॉ. नंदिता साहू जी (अताशे – हिंदी व संस्कृति, भारतीय उच्चायोग) ने खुशी जताते हुए कहा कि पिछले साल मैं मधुरेश से उनकी इस पुस्तक के संदर्भ में मिली थी। तब मैंने उन्हें कहा था, आप अच्छा लिखते हैं, लिखते रहिए। आज उनकी यह सुंदर कविता संग्रह हमारे बीच है, जो उनके सफल प्रयास का प्रमाण है। नंदिता जी ने पुस्तक से ‘पलायन विकल्प नहीं’ कविता की प्रेरणादायक पंक्तियाँ साझा कीं –
“चरैवेति-चरैवेति का मंत्र ले, कठिन पथ साध लो। पलायन कोई विकल्प नहीं, गाँठ तुम बाँध लो।”

वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व रेडियो संपादक, बीबीसी हिंदी, डॉ. विजय राणा जी ने ‘जाने-अनजाने पदचिह्न’ पुस्तक पर मधुरेश मिश्रा से चर्चा की। विजय जी ने बताया कि कैसे पिछले 20 वर्षों में भारत से आई आईटी पीढ़ी ने ब्रिटेन में हिंदी को नई पहचान दिलाई है। डॉ. राणा ने पुस्तक से अपनी प्रिय कविताओं का उल्लेख करते हुए रचनाकार से उन्हें पढ़ने का आग्रह भी किया। परिचर्चा रोचक रही, जिसमें मधुरेश जी ने पुस्तक लिखने की प्रेरणा साझा की। मधुरेश जी ने अपनी चुनिंदा कविताओं का सजीव पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
परिचर्चा के समापन पर यूपीका यूके परिवार के सदस्यों ने मधुरेश मिश्रा जी को एक स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
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आदरणीय मधुरेश जी को उनके काव्य संग्रह “जाने अनजाने पद चिन्ह” के विमोचन के लिए हार्दिक बधाई, डॉक्टर विजय राणा जी ने मधुरेश जी से पुस्तक पर वार्तालाप किया ,कुछ कविताओं का पाठ भी किया,
एक अजीब लड़ाई लड़ता रहता हूं ,खुद से खुद लड़ता रहता हूं,खुद को गढ़ता रहता हूं
शानदार पंक्तियां ,पुनः हार्दिक बधाई