Wednesday, February 11, 2026
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विजय विक्रान्त की लघुकथा – वैलेंटाइन डे या शहीदी स्मरण दिवस

हर वर्ष की तरह, इस साल भी 14 फ़रवरी की शाम को सेठ द्वारका प्रसाद जी की कोठी की जब घण्टी बजी, तो उनकी बेटी मालती ने दरवाज़ा खोला। सामने अपने मंगेतर किशोर को हाथ में बहुत सुन्दर फूलों का बुके लिये जब देखा, तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। इस दिन मालती ने भी लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी, और वो इस लिबास में बहुत सुन्दर लग रही थी। 
हैपी वैलेण्टाइंज़ डे माई डार्लिंग, कहकर किशोर ने मालती को बड़े प्यार से वो फूलों का बुके दिया। थैंक यू वैरी मच माई लव, कहकर मालती ने गुलदस्ते को लेकर पहले तो चूमा और फिर दोनों अन्दर आकर लिविंग रूम में बैठ गये। 
शीघ्र ही मालती एक ट्रे में चाय और कुछ नमकीन ले आई। चाय की प्याली की चुस्कियों में अब बातचीत का सिलसिला शुरु हो गया। बातचीत के दौरान किशोर को कुछ ऐसा महसूस हुआ जैसे मालती कुछ कहना चाहती है; लेकिन कहते हुये उसे एक झिझक सी हो रही है। मालती, मालती आज के इस रोमैन्टिक दिन भी तुम कुछ परेशान सी लग रही हो। आख़िर बात क्या है? किशोर ने पूछा।
थोड़ी देर चुप रह कर मालती ने किशोर से कहा……
किशोर, आज सुबह की ब्रेकिंग न्यूज़ में टीवी पर थी कि सरहद पर भारी गोलाबारी होने के कारण अपने कुछ जवानों की जानें चली गई हैं। हमारे फ़ौजी जवानों ने भी डटकर मुकाबला किया और दुशमन के बहुत सारे लोग हलाक कर दिये। बहुत से कायर तो जान बचा कर भाग भी गये।
डार्लिंग, गर्व है हमें भारत के इन सपूतों पर। आज इन्हीं के कारण हमें जीवन के सुख भोगने को मिल रहे हैं।
जीवन में हम सब सुख़ भोगें – २
यही चिन्ता, इन को भारी
इसीलिये तैनात खड़े, – २
बन्दूक हाथ में लिये हुये
देश की सीमा रक्षा में – २
कर के पूरी तैयारी
यही नहीं किशोर, आज के ऐसे हालात को देखते हुये, मैं अक्सर सोचती हूँ कि हम जो यहाँ पर होली, दीवाली और अपने सारे तीज-त्योहार मनाते आरहे हैं, उस में उन जवानों का कितना बड़ा योगदान है। हम तो यहाँ मज़े करते हैं और वो चौबीस घण्टे, सातों दिन देश की रक्षा की ख़ातिर सीमा पर तैनात खड़े रहते हैं। 
मिलजुल आज हम खेलते होली – २
अबीर, गुलाल और रँगों से
लेकिन भर बन्दूक में गोली – २
जान हथेली पर रखकर ये
जूझ रहे हैं लफ़ँगों से
पता नहीं किशोर, बीते हुये दिनों की कुछ यादें एकाएक आज क्यों ताज़ा हो गई हैं। याद है तुम्हें, सन 2019 का वो वैलेण्टाइंज़ डे, जिस दिन आतंकवादियों के एक सिरफिरे सूसाइड बॉम्बर की वजह से पुलवाना में 40 निहत्थे सी॰पी॰आर॰ऐफ़॰ जवान शहीद हो गये थे।
किशोर को लगा कि मालती बहुत अधिक ही भावुक होती जा रही है। इस से पहले कि वो उसको टोके और कुछ कहे, मालती ने उसे चुप रहने का इशारा किया।
मुझे अच्छी तरह से मालूम है डार्लिंग कि हम दोनों ने आज कैण्डल लाइट डिनर का प्रोग्राम बनाया है। सारी तैयारियाँ हो चुकी हैं और डाइनिंग टेबल पर जैसा तुम चाहते थे सब सामान जुटा लिया गया है। आज के दिन, बस, तुम से मेरी, एक छोटी सी फ़र्माइश है। मुझे पूरी उमीद है कि तुम उसे पूरी करोगे।
माई लव, इससे पहले कि हम अपना वैलेण्टाइंज़ डे डिनर शुरु करें, क्यों न एक कैण्डल उन शहीदों के नाम पर जला दें जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुये भी देश की रक्षा को सदा प्रधान माना है।  
अपनी बात को जारी रखते हुए मालती ने कहा; किशोर, तुम्हारे बारे में मुझे अच्छी तरह से मालूम है, कि तुमको टोस्ट प्रोपोज़ करने का बहुत शौक है। अगर तुम्हें आज कोई आपत्ति न हो तो क्या मैं उन वीर जवानों के लिये टोस्ट प्रोपोज़ कर सकती हूँ??
माँ-भारती के वीर सपूतो – २
गहरी नींद सो गये हो तुम – २
देश सदा तुम्हें याद करे।
याद तुम्हारी अमर ओ वीरो – २
हृदय में हम सब के वास करे।
स्वर्ग सिधारते  हुए जवानों के जो अन्तम शब्द थे, उसे मैं दोहराती हूँ। आप भी मेरे साथ मिलकर बोलो?
जय हिन्द
जय भारत
वन्दे मातरम
भारत माता की जय
जय श्रीराम
विजय विक्रान्त
संपर्क – [email protected]
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