Monday, July 22, 2024
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वन्दना यादव का स्तंभ ‘मन के दस्तावेज़’ – कदम बढ़ाइये, फिर देखिए…!

अभी कुछ ही दिन पहले की बात है जब हम जश्न मना रहे थे। याद है ना कि उसी समय आपने आने वाले समय में “कुछ बड़ा” करने का सोच लिया था। तमाम अधूरे काम पूरे करने का निर्णय ले लिया था। और तो और आने वाले समय के लिए भी प्लान बना लिए थे। जो आप आज तक नहीं कर सके थे, कारण जो भी रहा पर इस बार उन सब ‘छूट गए काम’ को भी पूरा करने वाले थे। और अपनी रूचि के जिस काम को करना आपको सबसे ज्यादा खुशी देता है, आप वह  भी तो करने वाले थे। 
अब बताएं कि आपने जो “To do list”  बनाई थी, उसमें से कितनी चीजें कर ली हैं? कितनी अधूरी रह गई? किस-किस चीज़ के सामने सही का यानी जिसे आपने पूरा कर लिया है, उसके लिए ‘राइट’ का टिक लगाया? 
मान लीजिए कि पूरे वर्ष में आपने पाँच अधूरे काम पूरे करने का मन बनाया था। और लगभग इतने ही नए काम करने वाले थे। यह भी तो हो सकता है कि आपने किसी डिग्री के लिए तैयारी शुरू की होगी। ऐसे में बताएं कि कितने सेमेस्टर या प्रति सेमेस्टर कितनी परीक्षाएं आपने दीं? और उनका क्या रिजल्ट रहा? कहीं घूमने जाने का प्लान बनाया था तो आपने कौन-कौनसी नई जगहें देखीं? अगर अपनी फिटनेस पर काम करने का मन बनाया था तब खुदको जवाब दें कि सेहत के पैमाने पर आप आज कहाँ खड़े हैं? यदि नई नौकरी को लेकर टार्गेट बनाए थे, या अपने काम-व्यवसाय पर कुछ अद्भुत करने का सोच रहे थे, तब भी अपना रिपोर्ट कार्ड चैक कीजिए। मान लीजिए कि आपने ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं बनाया था, यदि ऐसा है तब भी खुदको जवाब दें कि इस वर्ष के बारह में से नौ महीने बीतने तक आपने क्या-क्या किया?
इस वर्ष  के शुरुआत में आपने अपने लिए जो टाईम टेबल बनाया था, उसका कितना पालन किया? हर व्यक्ति अपना बुरा-भला पहचानता है। सबकी अपनी-अपनी आकांक्षाएं होती हैं। सबके अलग-अलग सपने और मंज़िलें होती हैं। इसीलिए आप और हम अक्सर अपनी पसंद की मंज़िल पाने के सपने देखते हैं। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राह चुनते हैं। यह सब हम अपनी खुशी के लिए करते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आपने, अपनी पसंद के क्षेत्र में सफल होने के लिए कुछ निर्णय लिये थे। हर दिन में से कुछ समय अपने लिए निकालने का मन बनाया था। यदि आप अपने ‘मन का करने’ के लिए कृतसंकल्प हैं, तब तो यह बहुत अच्छी बात है। अपने सपनों को सच होते हुए देखने से बड़ी कोई खुशी नहीं होती। आप इस राह पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं, इसके लिए अपनी पीठ थपथपाईए और आगे बढ़ते रहिए। मगर इसके उलट यदि आपने अपने संकल्प अधूरे छोड़ दिए हैं, तब क्या किया जाए? जरा ध्यान लगाएं। याद करें कि आप कहाँ तक चले थे। कहाँ पर राह छूट गई? यक़ीन मानिए कि अब भी देर नहीं हुई है। ‘जब जागो, तभी सवेरा।’ यह कहावत तो आपने भी सुनी होगी। बस इसी कहन पर भरोसा करते हुए पुन: चल पड़िए। आपके सपनों की मंज़िल तक जाने वाला कोई रास्ता ऐसा नहीं है जो बंद हो गया होगा। यदि एक राह में कुछ अड़चनें हैं तब राह बदलें, मंज़िल नहीं। जहाँ तक पहुँच कर आप रूक गए थे, आज और अभी, अपने सपनों को सच में बदलने की यात्रा शुरू करें। आगे बढ़ने की दिक्कतों, परेशानियों पर ध्यान मत लगाइए।  अपना ध्यान सफल होने के बाद मिलने वाली खुशियों पर, या सुकून पर केंद्रित करें। ऐसा करना आपको सकारात्मक उर्जा से भर देगा। 
एक बात हमेशा याद रखें कि सबसे महत्वपूर्ण ‘आप’ है। परिवार, दोस्त और संबंध बाद में आते हैं। इसीलिए कौन, क्या कहता है, यह सोचना अभी बंद कर दें। आप सकारात्मक रहें, उर्जावान बने रहें और लगातार मेहनत करते रहें। सफलता ऐसे ही लोगों का चुनाव करती है। इस बात का भरोसा रखें कि सफलता को भी जुनूनी किस्म के लोगों का इंतजार होता है। संभव है कि कामयाबी आपका ही इंतज़ार कर रही हो। यक़ीन मानिए कि अभी भी बहुत सारा समय आपके पास है। इसी समय अपनी यात्रा फिर से शुरू कीजिए। पहला कदम आगे बढ़ाइये, फिर देखिए कि किस तरह आप आगे से आगे बढ़ते चले जाएंगे।
वन्दना यादव
वन्दना यादव
चर्चित लेखिका. संपर्क - [email protected]
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