Wednesday, July 24, 2024
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वन्दना यादव का स्तंभ ‘मन के दस्तावेज़’ – जब काम पहचान बन जाए

“नाम में क्या रखा है? काम करो, जमाने में काम बोलता है।” यह कथन हममें से अधिकांश लोगों ने कभी ना कभी ज़रूर सुना है। युवाओं को अपने शुभचिंतकों से और बचपन में अपने माता-पिता से अक्सर यह नसीहत मिलती रही है। अब सवाल यह है कि अकेला काम आपकी पहचान कैसे बताएगा? सब लोग काम कर रहे हैं। अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। तब ऐसा कैसे हो सकता है कि आपका नाम अलग से पहचाना जाएगा।
सच्चाई यह है कि नाम, व्यक्ति की पहचान है। किसी को जानने के लिए या अजनबी को खोजने की पहली कड़ी उसके नाम से शुरू होती है। शेष सब कुछ नाम के बाद आता है। किसी महान कृति को देखते हुए उसके निर्माता के बारे में जानने का मन होता है। किसी फार्मूले की बात करते हुए मस्तिष्क उसके जनक की तस्वीर बनाने लगता है। यानी हर निर्माण के साथ उसके निर्माता का, सृजक का नाम जुड़ा रहता है। नाम की पहचान के बाद व्यक्ति की तस्वीर दिमाग में बनती है। इसका अर्थ हुआ कि अचरज भरे निर्माण, अपने निर्माता को नई पहचान देते हैं। यदि आप भी चाहते हैं कि आपको अलग पहचान मिले, तब आपको अचंभित करने वाले काम करने होंगे।
आप में से कितने लोग उस्ताद अहमद लाहौरी के नाम को जानते हैं? मगर जब ताजमहल के मुख्य वास्तुकार का/मिस्त्री का नाम पूछा जाएगा तब यह नाम तुरंत याद आ जायेगा। इसी तरह हर महान खोज करने वाले का नाम उसकी खोज/निर्माण या फार्मूले से जुड़कर अमर हो जाता है। एडीसन का नाम अपने अविष्कार के साथ जुड़कर बल्ब का पर्याय बन जाता है। इसी तरह जीरो (शून्य) के प्रथम प्रयोग का श्रेय भारतीय विद्वान आर्यभट्ट के नाम से हमेशा के लिए जुड़ गया है।
महानतम आविष्कारों के अतिरिक्त अति महत्वपूर्ण कार्य भी अपनी पहचान बनाते हैं। पहले से किये जा चुके काम को कलमबद्ध करना भी पहचान बन सकता है। किसी ऊँचाई पर चढ़ना या गहराई को छू कर लौटना भी कीर्तिमान बनाता है। खेल हों, पढ़ाई हो या कला और विज्ञान अथवा साहित्य, प्रत्येक क्षेत्र अद्भुत किस्म के लोगों का इंतज़ार करते हैं। यानी आप जो काम करें, उसको पूरे मनोयोग से, पैशन से करें। अपना फोकस काम पर रखें, वह काम महत्वपूर्ण अपने आप बन जायेगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड या राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का प्लान ना बना कर काम को लीक से हटकर करने का मन बना लें। यह भी संभव है कि अभिनव बिंद्रा, सचिन तेंदुलकर या नीरज चौपड़ा की तरह परंपरागत राह पर चल कर कमाल की उपलब्धियाँ आप अपने नाम कर सकते हैं।
हाल ही में फातिमा बीबी के निधन की खबर मिली। वह देश की प्रथम महिला जज थी। उन्होंने जज के पद पर रहते हुए जो महत्वपूर्ण जजमेंट दिये और उसके बाद गवर्नर के पद पर भी उनका नाम सम्मान से लिया जाता रहा। अपनी असाधारण मेहनत और लगन से वह अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रही।
आसमान का विस्तार अनंत है। यदि आपमें सितारा बनने की कुव्वत है, तब आपको चमकने से कोई नहीं रोक सकता। अपने भीतर वह कुव्वत पैदा करें, फिर आसमान आपका है।
वन्दना यादव
वन्दना यादव
चर्चित लेखिका. संपर्क - [email protected]
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1 टिप्पणी

  1. नाम की जरूरत नही होती तो लोग बेनाम ही होते लेकिन फिर एक दुसरे को पहचानते कैसे ? नाम किसी भी ईसांन बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है।

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