Wednesday, July 24, 2024
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वन्दना यादव का स्तंभ ‘मन के दस्तावेज़’ – हर मौके के लिए एक गीत

हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री ने हमें हर मौके, हर मिजाज़ के लिए गीत दिये हैं। कुछ सादा-से लगने वाले, सरल शब्दों में ढले गीत, इतनी गहरी सीख छुपाए होते हैं कि क्या कहने। कुछ रूमानियत लिये, हमारे मन की बात कहते हुए से लगते हैं। इसी तरह कुछ गीत जीवन की सीख देते हैं, जिन्हें हम कभी भी गुनगुना सकते हैं। कभी तकलीफ में हों और किसी को कुछ कहने का मन ना करे तब एक पंक्ति गुनगुना सकते हैं, ‘हाथों की चंद लकीरों का, ये खेल है बस तकदीरों का…’ मगर जब कोई खुशी मन की दहलीज पर दस्तक दे रही हो, और मन का मूड बदलना चाहते हों, या अपनी मेहनत से तकदीर बदलने की ठान ली हो तब इसी गीत की अगली पंक्तियों को बुलंद आवाज़ में गाएं, ‘तकदीर है क्या मैं क्या जानूं-2, मैं आशिक हूँ तदबीरों का…’ 
दो दिन पहले इसी दूसरी पंक्ति के मिजाज़ से मिलते इंसान से बात हुई। दरअसल मेरे बड़े भाई की वर्ष 2023 की विदाई के दिनों में एक बड़ी सर्जरी हुई थी। मैंने भाई का हाल पता करने के लिए फोन किया। वह जिस मिट्टी के बने है, मैं उन्हें जानती हूँ मगर इस बार तो उन्होंने मुझे भी हैरत में ड़ाल दिया। देवेन्द्र भाई की सर्जरी सफल रही। उन्हें आराम करने के लिए अस्पताल से घर भेज दिया गया था। उसी समय ऑफिस में कुछ ज़रूरी काम आ गया। भाई ने डॉक्टर से बात की और पहुँच गए अपने ऑफिस। इसके दो दिन बाद ऑपरेशन के स्टिच (टांके) खुले। उन्होंने बहुत सहज भाव से कहा, ‘वन्दना, सब प्रिकोशंस लेते हुए सक्रियता बनाए रखनी चाहिए। जब तक हम जीवित हैं, हमें जीवंत और सक्रिय रहना ही होगा।’ पाठकों को बता दूं कि भाई ने इसी क्रिसमस के दिन अपना 62वाँ जन्मदिन मनाया है। 
यह एक उदाहरण है। हम सबके आसपास ऐसे जीवट वाले लोग हैं जिनसे हमें सीख लेते रहना होता है। ऐसे लोग जीवन को बिता देने के स्थान पर हर हाल में जोश के साथ जीवन, जीने की सीख देते हैं। इसीलिए जब कभी गम सताए, दुख परेशान करे  तब भी हार ना मानें। वक्ती मन के भावों के मुताबिक गीत चुनिए और गुनगुना शुरू कर दें। मन हल्का हो जायेगा। इसी तरह जब मन में जोश जगाना हो, या खुशियाँ जाहिर करनी हों तब भी हिन्दी गीतों की कभी ना ख़त्म होने वाली गीतमाला से कोई मनपसंद गीत चुन लें और बस हो गया आपका काम। 
दीपावली होली, ईद-क्रिसमस जैसे पर्व के लिए हमारे फिल्मी संगीत संसार में अनगिनत नग़मे मिल जाएंगे। यहाँ तक कि कैलेंडर इयर यानी नये साल के लिए भी गीतकारों ने गीतों की झड़ी लगा दी है। आज वर्ष 2024 का पहला इतवार है, आपने इस वर्ष के लिए जो प्रण लिये हैं, उन्हें पूरा करने के लिए जो प्लान बनाए हैं, उस पर मजबूती से अमल करना है। सबने अपनी-अपनी पसंद से प्रण लिये होंगे, मेरे कहने से अपने आपसे भी एक प्रोमिस और कर लीजिए। खुद से कहिये कि आप अपना ध्यान रखेंगे। ख़ुदको खुश रखेंगे। बेवजह की झिझक, ड़र या भय से बाहर निकलेंगे। जब-जब कोई शक आपको आ घेरे, तब अपने लिए गुनगुनाइये, “ना मुंह छुपा के जियो और ना सर झुका के जियो, ग़मों का दौर भी आए तो मुस्कुरा के जिओ…”
वन्दना यादव
वन्दना यादव
चर्चित लेखिका. संपर्क - [email protected]
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