Wednesday, July 24, 2024
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वन्दना यादव का स्तंभ ‘मन के दस्तावेज़’ – आओ रौशन दिन-रात करें

सूरज की रौशनी उजाला ले कर आती है। यही किरणें अपने साथ जीवन का संदेश लाती हैं। प्रकृति के लिए, सेहत के लिए, बेहतर स्वास्थ्य के लिए और, जीवित रहने के लिए उजास ज़रूरी है। बीज से अंकुर फूटने के लिए, पेड़-पौधों के पल्लवित होने, फलने-फूलने के लिए, सूरज की गर्माहट आवश्यक है। फल के पकने, मीठा होने के लिए धूप की ज़रूरत पड़ती है। इसी तरह मानव शरीर को भी विटामिन ‘डी’ की ज़रूरत रहती है।
दिन के समय जब आसमान में सूरज चमकता है, तरक्की चाहने वाले अपनी तैयारी में जुट जाते हैं। वे भी प्रकृति के समान पुष्पित-पल्लवित होने के उपक्रम में लगे रहते हैं। चकाचौंध करती रौशनी में अपनी तरक्की के हथियारों की धार पैनी करते हैं। पूरी तैयारी के साथ अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते हैं। जो सफल होने का जुनून पालने हैं, वे सूरज के छिपने से होने वाले अंधेरे से घबराते नहीं, बल्कि इस समय का भी सही दिशा में उपयोग करते हैं। 
निरंतर चलते जाना थका देता है। लगातार की जाने वाली मेहनत के बीच कुछ पलों का विश्राम, नव स्फूर्ति से भर देता है। प्रकृति ने रात का निर्माण भी इसीलिए किया है। दौड़भाग जब थकाने लगे, कुछ पलों के आराम के बाद जोश से भर कर एक बार फिर से काम पर लौटें। आराम तन और मन की ज़रूरत है। विश्राम के बाद जब काम पर लौटना हो, उस समय दिन-रात के फर्क को भुला कर काम में जुट जाएं। प्रकृति के बनाए आराम के घंटों में भी जब जुनून सोने नहीं देता, बल्कि जगाए रखता है, यही वे पल है जो सपनों में उजास भरते हैं। उजाले-अंधेरे का फर्क भुला कर जीवन को रौशनी से भर देते हैं। आप भी अपने दिन-रात रौशन रखने का अभ्यास शुरू कर दें।  
रात के समय जब सब ओर अंधेरे का साम्राज्य होता है, उस समय भी आप चाहें तो अपने आसपास उजाले की चादर फैलाए रख सकते हैं। जुनून का यही उजाला प्राकृतिक रूप से धूप में पके फलों के समान आपके जीवन में मिठास घोलता रहेगा।
वन्दना यादव
वन्दना यादव
चर्चित लेखिका. संपर्क - [email protected]
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