सारांश

‘जन जन की बात, मन की बात’ रेडियो रूपक यूट्यूब के माध्यम से सुनने को मिला। सुनकर बहुत अच्छा लगा। माननीय प्रधानमंत्री जी के इस लोकप्रिय कार्यक्रम का 100 वां एपिसोड अप्रैल में प्रसारित हुआ है| इन 100 भागों को रेडियो रूपक के रूप में बहुत ही तार्किक और वस्तुनिष्ठ ढंग से सारांश के रूप में डॉ. कन्हैया त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत किया गया है। डॉ. त्रिपाठी द्वारा खास तौर पर उन सभी महत्वपूर्ण सुधारों, सुझाओं, टिप्पणियों, एवं योजनाओं को इसमें शामिल किया गया जो ‘मन की बात’ कार्यक्रम में माननीय प्रधानमंत्री जी के साथ भारतवासियों द्वारा साझा किया गया है।
इस रूपक को सुनने के बाद हमें ‘मन की बात’ कार्यक्रम के लगभग 100 एपिसोड की विस्तृत जानकारी इस एक ही रूपक से हो जाती है। इस रूपक में उन सभी चीजों को शामिल किया गया है जो ‘मन की बात’ के केंद्रीय विषय थे। संपूर्ण भारत की राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, एकता, अखंडता को जानने के लिए यह एक महत्वपूर्ण और सराहनीय रूपक बन पड़ा है| इसके लिए रूपक के लेखक डा. कन्हैया त्रिपाठी, प्रस्तुतकर्ता डॉ. संजय सिंह वर्मा और आकाशवाणी परिवार के साथ उनकी संपूर्ण टीम को साधुवाद।
रेडियो रूपक हेतु लेखन
संचार माध्यमों के मुख्यरूप से तीन उद्देश्य माने जा सकते हैं- सूचना, मनोरंजन और शिक्षा| शिक्षा सम्बन्धी कार्यक्रमों में अब मीडिया का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। भारत सरकार ने ई-विद्या नामक पोर्टल भी उद्घाटित किया जिसका मकसद विद्यार्थियों-शिक्षार्थियों को ऑन लाइन शिक्षा का लाभ पहुँचाना है। ‘मन की बात’ रूपक सुनने से हमें शिक्षा संबंधी बहुत सी बातों का बोध हुआ है| 100वें एपिसोड से रेडियो प्रसारण को भी अभूतपूर्व लोकप्रियता प्राप्त हुई है और इस ‘मन की बात-जन-जन की बात रूपक ने व्यवस्थित तरीके से जन-मन तक इसे पहुँचाया है। रेडियो प्रसारण की इस अनूठी पहल ने एक प्रेरणा प्रदान की है कि इस माध्यम के ज़रिए भारत के सुदूर एवं ग्रामीण इलाकों तक और समाज के हर तबके के लोगों तक प्रभावी रूप से पहुँचा जा सकता है। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में भी शैक्षणिक सामग्री के प्रसारण में हर तरह के डिजिटल माध्यम के उपयोग का उल्लेख है। यह सोचना ग़लत नहीं होगा कि रेडियो प्रसारण न सिर्फ शिक्षा के नए आयामों को ढूँढ़ने में सहायक हो सकती है बल्कि डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के साथ-साथ, मौजूदा डिजिटल खाई को भी कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। ‘मन की बात-जन-जन की बात’ रेडियो रूपक का लेखन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि रेडियो का मूल तत्व नाद/ध्वनि है। ध्वनि ही भाषिक-सन्देश सम्प्रेषण का आधार बिन्दु है। भाषा-कौशलों में भाषा सीखने का पहला धारभूत कौशल ही ध्वनि है। रेडियो, जिसे भाषिक स्तर पर सामान्यतः बोलने और सुनने (श्रवण) के माध्यम की श्रेणी में रखा जाता है, देखा जाए तो सन्देश सम्प्रेषण के स्तर पर यह पाँचों कौशलों का निर्वाह करता है-बोलना/सुनना/सामग्री-पढ़ना/सामग्री (पटकथा) लिखना| तो स्पष्ट हैं कि पाँचवां, देखने वाले के कौशल की स्थापना को हम रेडियो कार्यक्रमों विशेषकर, ‘मन की बात-जन-जन की बात’ रेडियो रूपक में आँखों देखा हाल, नाट्य प्रस्तुति, समाचार वाचन, समारोह आदि जैसी प्रस्तुतियों में, भाषा पर आधारित (भाषिक) बिम्बों में देख व समझ सकते हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस रूपक लेखन में तारतम्यता और क्रमबद्धता है |



धन्यवाद आदरणीय शर्मा जी।
धन्यवाद भाई कमलेश यादव जी। आपकी इस समीक्षा ने मेरा अंतःकरण प्रसन्न कर दिया।
सादर
कन्हैया त्रिपाठी