अगर तू उम्र भर मेरा राही रहेगा, तो ये खुदा का करम होगा कि तू मेरा हमसफ़र रहेगा। जानती हूँ, मैं तेरे क़ाबिल नहीं हूँ, पर दिल में उम्मीद है कि तू सदा बेख़बर रहेगा।
मेरी ख़ताओं को तू नज़रअंदाज़ कर दे, फिर से मेरा दिलबर तू बेअसर रहेगा।
जानती हूँ, तेरा दिल बहुत दुखाया है मैंने, मगर चाहत है कि तू फिर भी मेरा मुकद्दर रहेगा।
अपने दर्द को तू छुपाकर मुस्कुराता रहा, मेरे हर आंसू के बदले, तू मेरा हमसफ़र रहेगा।
मेरी हर ज़िद और आरज़ू को तूने पूरा किया, उम्मीद है कि तू सदा ही मेरा रहबर रहेगा।
हर आंधी-तूफान से बचाकर मुझे संभाले रखा, दुआ है कि तू मेरा साया बनकर सदा खड़ा रहेगा।
तेरे एहसानों का मोल मैं कैसे चुकाऊँगी, मगर दुआ है कि तू मेरे लिए सबसे अनमोल रहेगा।
डॉ. दीप्ति विभागाध्यक्ष (हिंदी) हिंदू कॉलेज अमृतसर, पंजाब
अच्छी कविता है आपकी हमसफर दीप्ति जी! बधाई आपको!
धन्यवाद महोदया
Dipti ji ki kaveeta acchhi lagi