Monday, May 11, 2026
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पारुल सिंह कविताएँ  

1

मेरी प्यारी सौतन,

मैं तुम्हारा पति लौटाना चाहती हूँ
ये अब पति की तरह बिहेव करने लगा है।

ये रेड पर्पल और ब्लू पर्पल मे फर्क़ जानता था
अब ये हरे रंग को भी मेहरून कहने लगा है

डार्लिंग कहूँ तो हुँ कहता है, जान कहूँ तो लुक देता है
ऊपर से बातें भी शुरू सम्बोधन रहित करने लगा है

मेरी प्यारी सौतन,

मैं तुम्हारा पति लौटाना चाहती हूँ
ये अब पति की तरह बिहेव करने लगा है।

2.

तुम्हारे प्यार में आकंठ डूबी स्त्री ने कभी बढ़ कर
तुम्हारे हाथ को चूम लिया हो,
कभी छोड़ कर जाते हुए पीछे से तुम्हें बाहों में भींच कर
अभी ना जाओ का इसरार किया हो।
तो ये जीवन तुम्हारे लिए पूर्ण है।

पुरुषोचित व्यवहार समझ कर
जो नीरस, और सूखा जीवन,
तुम बिता कर जाने वाले हो
उसे पूरा करने तुम्हें फिर आना होगा।

संसार में जीत हार की दौड़ में
पुरुषों ने जो कमाया वो उनका दम्भ था।
किसी फूल की नाज़ुकी को तुमने महसूस किया है
तो तुमने अपनी जीत से बड़ा अहसास जी लिया।

किसी नदी के ठंडे पानी को सहलाने दिए हों,

अपने नंगे पैरों के तलवे,
किसी स्त्री को गीला करने दिए हो अपने होठों से उसके होठ
तो वो इस दुनिया की उन सब ठंड़को से ठंडी ठंडक है।
जो पुरुषों ने किसी से बदला लेने पर
अपने सीने में महसूस की हो।

पुरूष होकर वो सब जो तुमने
नही कहा किसी स्त्री से,
वो सब जो तुम नहीं सुन पाए किसी स्त्री से,
वो प्यार भरे शब्द ही
चारों दिशाओं में शताब्दियों तक जीवंत रहने वाले हैं,
अहंकारी तलवारों की टन्कारें
आकाशगंगा नहीं सहेजती मित्र………..

3

ख़ुद को ही बैठा कर पलकों पर
ख़ुद से ही पूछा करते हैं..
“आप थक गयी होंगी
मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ ?”
एक काल्पनिक प्रेमी
हर उम्र के लिए जायज़ है
वरना कोई शायर
क्यूँ यूँ ही लिख जाता..
“….. सिर्फ़ सेहत के सहारे ज़िंदगी कटती नहीं”

4

जंगली लड़की
बहुत बेपरवाही से
खोंस लेती है जंगली फूल
बिखरे बालों में।
चल पड़ती है,
नंगे पाँव
टेढ़ी मेढ़ी पगडंडी पर
लापरवाह चाल से।
खींसे में रखती हैं
सब सौन्दर्य प्रतियोगिताएँ
ठेंगा दिखा देती है सारे
सौन्दर्य प्रसाधनों को।
धकेल देती है चुनर को
फिर से कान्धे पर
उतर पड़ते है सारे 
ब्रान्डेड आउटफिट्स।
उज्जड़ लड़की।
जंगली कहीं की।

 

परिचय 

पारुल सिंह –

लेखक पारुल सिंह ‘नमस्ते मैं पारुल’ की फाउंडर और पोडकास्टर हैं।

डाउन सिंड्रोम फ़ेडरेशन आफ इंडिया में सोशल मीडिया जन संपर्क में कार्यरत।

शिवना प्रकाशन दिल्ली प्रभारी। कविता संग्रह ‘चाहने की आदत’ है। तथा आत्मकथ्यात्मक उपन्यास ‘ऐ वहशते दिल क्या करूँ’ व कविता संग्रह  ‘फ़रवरी दो हज़ार तीस’  प्रकाशित।
यू ट्यूब चैनेल्स ‘नमस्ते मैं पारुल’ पारुल क़िस्सगोई व पॉपकार्न टाकीज़ फ़ेसबुक पेज ‘नमस्ते मैं पारुल’ के माध्यम से साहित्यिक और बॉलीवुड गतिविधियों में संलग्न। विश्व  हिंदी गौरव सम्मान, हिंदी कल्चरल सेंटर, टोक्यो द्वारा। डीएसएफआई एक्सिलेंस अवार्ड तथा बेस्ट एमसी अवार्ड डाउन सिंड्रोंम फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा। सशक्त महिला सम्मान, हिंदी की गूँज जापान द्वारा।

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