हरकीरत हीर की ग़ज़लें
ज़िंदगी इतनी हमने जानी है ।
हों कटे पर तो उड़ नहीं सकते
सोच लेना ये ज़ुल्म करने से पहले
जो कभी दरमियाँ थी सूख गई
चाँद भी है करीब पास तू भी
जो क़लम में मिला हुनर मुझको
ज़िंदगी देख ली बहुत रो के
क्यों करे है गुरूर तू इतना
गर भुला तुम चुकी थी हीर उसे
ढूँढते हम मुहब्बत किधर आ गए
वो करें ना करें हमसे उल्फ़त मगर
जिस शहर में न था कोई उनका पता
दिख रहा दूर तक बस अँधेरा घना
ख़ुश्क सी रात है, ग़मज़दा चाँद भी
लाख चाहा कि उनको भुला दें मगर
कुछ ख़ुशी तो मिले चंद पल ही सही
टूट जाता हमारा ये रिश्ता न यूँ
थे बिताए जहाँ कुछ मुहब्बत के पल
चाह थी उड़ने की आसमाँ में मगर
हाथ आई न दौलत कभी यूँ मगर
ऐ ख़ुदा! है दुआ इतनी, इकराम हो
प्यार करना ख़ता गर थी, दोनों की थी
तोहमतें दीं, नहीं मुझ में पाकीज़गी
इम्तिहां क्यों भला आग से दूँ गुज़र
है दुआ तू बढ़े बेटी आगे सदा
हक़ की आवाज़ रखना सदा तू बुलंद
बस थी चाही जगह दिल में, चाहा ये कब
प्यार की दास्ताँ अनलिखी रह गई
कब हुआ ,क्या हुआ,क्यों हुआ पूछ मत
दर्द दिल में दबाते रहै हम मगर
खेल है ज़िंदगी जानतते हैं मगर
क्यों न पूछा ख़ुशी तूने’ मेरा पता
जब कभी नाम उसका लिया बज़्म ने
यूँ तो’ नज़्में हुई हैं मुकम्मल मगर
इस क़दर दर्द ने ‘हीर’ बेंधा जिगर
हँस के ग़म सारे सँभाले हमने
ज़िंदगी में न कभी स्वाद मिला
‘चुप रहो’ जब से कहा तुमने तो
ज़िंदगी खेल भी खेले क्या क्या
सी लिए होंठ मिटाकर ख़ुद को
जोड़ या तोड़ ख़ुदा अब मुझको
ज़िंदगी चित से कभी पट न हुई
क्यों अँधेरे ही उगे ,जबकि सदा
हरकीरत ‘हीर’
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प्रिय हरकीरत जी एक से बढ़कर हरएक शेर
उम्दा सरल भाषा शैली में लिखे हर अशआर उम्दा जिंदगी
जिंदगी चित् से पट ना हुई
सिक्के तो बहुत उछाले हमने।।
दर्द दिल में दबाते रह गए हम
नजम मगर अश्कों से भीगी रह गई।
जो कलम में मिला हुनर मुझको
रब तेरी बड़ी मेहरबानी है।
प्रिय हर गजल में मकते के सारे शेर बहुत ही खास ,अहम हे
आपको हार्दिक बधाई सुंदर गजल के सृजन के लिए ,पुरवाई का आभार
आपकी सभी गजलें बहुत अच्छी है हरकीरत जी। सभी शेर चन्दा हैं। गजलों की ज्यादा जानकारी हमें नहीं लेकिन हाँ! कुछ शेर बहुत अच्छे हैं। बहुत बहुत बधाइयाँ आपको ।