1)
अधूरा इश्क़
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मुकम्मल हुए रिश्ते
अक्सर
गिले शिकवे शिकायतों में
उलझकर,
टूट जाते हैं
हमने
इश्क़ मुकम्मल रखना था
इसलिए
अधूरा ही छोड़ दिया …..
2)
यादें
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माज़ी की
यादें जब भी
बरसती हैं
मौसम
कोई सा भी हो
आँखें भीग ही जाती हैं…
3)
दूरियां
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बढ़ते -बढ़ते
बहुत दूर हो गया था
रिश्ता हमारा
अब उसे तोड़ना ही
बेहतर लगा
धागे सा समेटती
तो शायद
और उलझ जाता …
4)
दुआ
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तुझे
भुलाने के लिए
दुआ ख़ुदा से की थी मैंने
जब ख़ुदा ने
सर पर हाथ रखा
मुआ दिल
फिर
तुझी को माँग बैठा ….
5)
दिल और नसीब
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दिल भी
तूने बनाया
और नसीब भी
फिर बता ऐ ख़ुदा !
वो
दिल तक ही क्यूं रहा
नसीब में
क्यूं नहीं..!?!
6)
नादां
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कुछ लोग
मेरी नज़्मों के
अंदर झांकना चाहते थे
नादां
नहीं जानते
किनारों से
समंदर की गहराई
नहीं नापी जाती…..
7)
मुहब्बत
********
ऐ हवा !
उड़ा ले जा
मेरी देह की मिट्टी
और गिरा दे
उसकी मज़ार पर
जिसने
पढ़ी हो उम्र भर
मुहब्बत की किताब ….
8)
गणित
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न जाने
कौन सा गणित
पढ़ा था तुमने
कि ताउम्र की
मेरी कुर्बानी
सिर्फ़
शून्य आंकते रहे ..
9)
सफ़्हे
********
सारी उम्र
सफ़र में ही रहे
मेरे लफ़्ज़
उन राहों की तलाश में
जहाँ मुहब्बत
सफ़्हे लिए बैठी थी …
10)
दिल+दिमाग
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इक
दिमाग ने
यूं
आरियां चलाई
दिल के दरख़्त पर
इक -इक कर
सारे
मुहब्बत के पत्ते झड़ गए ….


बेहतरीन
——- कुछ पंक्तियां बहुत अच्छी हैं। पंक्तियों में नवीनता है और प्रवाह है। कविताओं की संक्षिप्तता, कविता के प्रति पाठक के मन में उत्सुकता और रुचि बनाए रखती है।
अंदाज़ ए बयां में एक ताज़गी है। आज के जमाने के युवाओं की पसंद की मुताबिक रचना
जान पड़ती हैं।
हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हो।
आदरणीय हरकीरत जी! बहुत प्यारी लगीं आपकी क्षणिकाएँ।
आपकी 10 क्षणिकाएँ कविताओं पर भारी हैं
1-अधूरा इश्क़-
इश्क मुकम्मल रखना था, इसलिए, अधूरा उच्च छोड़ दिया
-सिर्फ इसलिए कि गिले-शिकवे , शिकायतों में उलझकर टूट न जाएँ?
लड़ने से पहले ही हार मानना तो ठीक नहीं।
2-यादें
आपने सही कहा-
माज़ी की यादें आँखों को भिगा ही देती हैं फिर चाहे मौसम कोई सा भी क्यों ना हो।
3-दूरियाँ
दूरियाँ रिश्तों को तोड़ देती हैं।उससे बचना चाहिये।
4-दुआ
यह भी खुदा की नेमत ही है। जिसे भुलाने के लिये दुआ की,उसे ही दुआ में माँग लिया।
बहुत अच्छे।
5-दिल और नसीब
खुदा से यह प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण लगा। जब दिल और नसीब दोनों ही ईश्वर ने बनाया था तुझे जो दिल में रहे उसे नसीब में भी होना चाहिये,पर ऐसा क्यों नहीं!
6-नादाँ
क्या बात है! बिल्कुल सच कहा आपने! किनारों से समुद्र की गहराई नहीं नापी जाती।
आपके लेखन को समझने का सिर्फ प्रयास मात्र है।
8-मुहब्बत
यह तो मोहब्बत की इम्तिहाँ है भई।
9-सफ़्हे
लफ़्ज़ों का सफ़र सफ़्हेके लिये मुहब्बत की राहों की तलाश में रहा।
अफ़सोस!
10-दिल+ दिमाग
दिमाग के द्वारा ,दिल के दरख़्त पर आरी चला कर मोहब्बत के पत्तों को झड़ाना दुख दे गया।
बेहतरीन शानी गांव के लिये आपको बहुत-बहुत बधाइयाँ हर कीरत जी! प्रस्तुति के लिए तेजेंद्र जी का बहुत-बहुत शुक्रिया।
पुरवाई का आभार तो बनता है।
बेहतरीन