Wednesday, February 11, 2026
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नीलिमा करैया का गीत – पावस के विकराल थपेड़े, पर तुम धैर्य न खोना मन!

पावस के विकराल थपेड़े,
पर तुम धैर्य न खोना मन!
बादल भी गरजेंगे नभ में,
बिजली भी फिर चमकेगी।
नर्तन करता वायु-मंडल,
देख हृदय धड़केगा ही।
पर विश्वास न खोना अपना,
अपनी दृढ़ता रखना मन!
नाले उफ़न-उफ़न पड़ते हैं,
थोड़े ही पानी में बस।
नदियाँ बाट जोहती रहतीं ,
सब्र बाँध का टूटे तक।
थामे तुमको जिद्द तुम्हारी
यही हौसला रखना मन।
जो न कभी विचलित होते हैं
आँधी और तूफानों में।
सागर लहरों पर संभालता,
राह दिखाता धारों में।
जीवन रहे कठिन कितना ही
खुद विश्वास न खोना तुम।
है संसार कठोर, तन कोमल;
पीड़ा तो होती होगी।
बाधा हर पल ही आ-आकर ,
विचलित तो करती होगी।
पर तुम रखना स्वयं-भरोसा
खोना नहीं आत्मबल मन!

नीलिमा करैया
होशंगाबाद, मध्य प्रदेश
Mobile:  +91 74009 79716



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25 टिप्पणी

  1. “पावस के विकराल थपेड़े पर, तुम धैर्य न खोना मन” नीलिमा करैया जी का एक संदेशपरक गीत है। मानव जीवन संघर्षों से भरा हुआ है। इसमें मुसीबत और कठिनाइयों की आवाजाही बनी ही रहती है। मनुष्य हर क्षण इनसे टकराता है। इस टकराहट में कभी वह हारता है तो कभी जीतता है। हार-जीत जीवन की एक प्रक्रिया भर है।
    लेकिन कवयित्री इससे परे जाकर उस स्थिति की बात करती हैं कि जीत में इठलाना नहीं और हार में टूटना नहीं। जीवन के पावस में विकराल थपेड़े लगेंगे। मुसीबतों के बादल घुमड़ेंगे, आफत की बिजलियां टूटेंगी पर हे मन! तू धैर्य को मत डिगने देना। हृदय भय से कांप उठेगा पर इस विश्वास के साथ दृढ़ता बनाए रखना और यही सोचकर आगे बढ़ते जाना कि जीत तुम्हारी ही होगी।
    परिस्थितियों की बाढ़ के नदी-नाले सब्र का बांध तोड़ने पर आमादा हो जाएंगे लेकिन तुम अपनी जिद के हौंसलों को कभी कम मत होने देना।
    जो मनुष्य इन आंधी तूफानों में अटल रहता है। जो गिरकर भी संभल जाता है उसके लिए जिंदगी आसान हो जाती है। यही जीवन का आनंद है और यही उद्देश्य भी है।
    यह गीत हमें जीवन जीने के असली मकसद को बता देता है। बढ़िया गीत के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई।

  2. बहुत बहुत शुक्रिया सर जी! गीत के सारगर्भित विश्लेषण के लिये।आप गीत की समुचित व्याख्या कर उसके उद्देश्य तक पहुँच पाए। यह हमारा पहला प्रयास है गीत लिखने के क्षेत्र में। आपकी सकारात्मक टिप्पणी पढ़कर लेखन का उद्देश्य पूर्ण हुआ। पहले प्रयास के लिये आपकी यह उत्साहवर्धक टिप्पणी असीम उत्साहवर्धन करती है।दिल की गहराइयों से शुक्रिया आपका।

  3. बहुत सुंदर भावप्रवण गीत नीलिमा दी।जिसे पढते.हुए ओज,उमंग,उत्साह प्रेणात्मक भावनाओ का मिला जुलाई अहसास मन को भीतर तक भिंगो गया।गीत केवल गेयता का अर्थ ही नहीं रखता बल्कि हृदय से हृदय तक की एक अंतर्यात्रा भी है जो अपने प्रवाह में बहा ले गाती है।जीवन की आपाधापी में ,सुख दुख के संघर्षों में भी व्याकुल मन को धैर्य न खोने की बात कह कर आपने मन को स्पर्श कर लिया है।**है संसार कठोर, तन कोमल;
    पीड़ा तो होती होगी।
    बाधा हर पल ही आ-आकर ,
    विचलित तो करती होगी।
    पर तुम रखना स्वयं-भरोसा
    खोना नहीं आत्मबल मन!*।
    बहुत ही सुंदर सृजन नीलिमा दी ।अशेष बधाई और साधुवाद। सादर सस्नेह प्रणाम।
    पद्मा मिश्रा-जमशेदपुर

    • दिल की गहराइयों से बहुत बहुत प्यार आपको पद्मा जी पहले गीत को इतना प्रेम देने के लिये!आपने सही कहा कि गीत एक हृदय से दूसरे हृदय तक की अंतर्यात्रा है,जो प्रवाह में बहा ले जाती हैं।
      धैर्य और आत्मबल, लक्ष्य प्राप्ति, सुकून और शांति के लिये आवश्यक हैं। शुक्रिया आपका।

  4. बहुत ही मर्मस्पर्शी रचना है। इस गीत ने कई साहित्य कारों और उनकी कृतियां की याद दिलाई यथा नर हो न निराश करो मन को,,,
    कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
    हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हो।

  5. प्रेरणादायक गीत के लिए बहुत-बहुत बधाई नीलिमा जी। कठिन समय में भी अपना मनोबल बनाए रखने का संदेश देता सुंदर गीत है।

  6. प्रिया नीलिमा आहा कितना प्रेरणा दाई गीत
    जैसे पिता एक पुत्री को विदाई में समझा रहा हो
    जैसे एक मां मां अपनी बेटी को जीवन के झंझा बातों में अडिग रहने की,अविचलित न होने की शिक्षा दे रही हो,
    है संसार कठोर,,,,,,,, तुम धैर्य न खोना
    प्रिया नीलिमा आपकी इस उत्कृष्ट गीत ने दिनकर, बच्चन, नीरज, महादेवी, की उत्कृष्टतम कविताओं की कविताओं की याद दिला दी
    बेहतरीन गीत ।

    • दिल की गहराइयों से आपको बहुत-बहुत धन्यवाद कुन्ती जी।यह हमारा पहला गीत था। आप इसकी गहराई तक पहुँची। पहले प्रयास पर ही आपकी इतनी गंभीर टिप्पणी हमें आगे बढ़ाने के लिए हौसला देती है। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।

  7. नीलिमा जी बहुत प्रेरणादायी गीत है जो न कभी विचलित होते हैं
    आँधी और तूफानों में।
    सागर लहरों पर संभालता,
    राह दिखाता धारों में।
    जीवन रहे कठिन कितना ही
    खुद विश्वास न खोना तुम।

  8. जीवन के पथराए मरुधर पर आशाओं के सुकोमल मेघ छितराकर जब बरसते हैं, तो तन मन दोनों भींगते हैं। यह विश्वास जगाते हैं कि अँधेरा चाहे जितना घना हो मगर वह उजास को देर तक ढकने की सामर्थ्य नहीं रखता।
    विसंगतियों की आग से दहकते मन प्राण को अपनी पावसी धार से आप्लावित करता बढ़िया गीत।
    हार्दिक बधाई नीलिमा जी।

    • दिल की गहराइयों से आपको बहुत-बहुत धन्यवाद सर!।यह हमारा पहला प्रयास था गीत के क्षेत्र में। आप इसकी गहराई तक पहुँच पाए और भावों को बेहतर समझ पाए । अच्छा व्याख्यायित किया आपने। पहले प्रयास पर ही आपकी इतनी गंभीर टिप्पणी हमें आगे बढ़ने के लिए अमृत तुल्य है।

  9. वाह, कितना अच्छा गीत बिटिया। आप बहुत अच्छे और सधे हुए गीत लिख सकती हैं। अब रुकना न बेटी, लिखना, लिखना, खूब लिखना।‌ इतने अच्छे और रसपूर्ण गीत लिखना हर किसी के बस की बात नहीं।

    जुग-जुग जियो बेटी।

    मेरे आशीर्वाद,
    प्रकाश मनु

    • आप यह हौसला हमारी ताकत है बाबूजी। कोशिश करेंगे की कलम कभी न रुके। आपके आशीर्वाद की छाया बनी रहे।

  10. बहुत सुंदर प्रेरणादायक गीत लिखा नीलिमा जी ।हार्दिक बधाई ।

  11. दिल की गहराइयों से आपको बहुत-बहुत धन्यवाद सर!।यह हमारा पहला प्रयास था गीत के क्षेत्र में। आप इसकी गहराई तक पहुँच पाए और भावों को बेहतर समझ पाए । अच्छा व्याख्यायित किया आपने। पहले प्रयास पर ही आपकी इतनी गंभीर टिप्पणी हमें आगे बढ़ने के लिए अमृत तुल्य है।

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