सोनिया अक्स सोनम की ग़ज़लें
नसीब अपना किसी रोज़ आज़माओ तो
चलो कि रो नहीं सकते हमारे साथ अगर
हकीकतों से तुम्हें रूबरू कराएंगे
समझ ही लेंगे ये कॉलेज का सिलेबस भी
बड़े बुज़ुर्ग मुहब्बत से रोकते तो नहीं
तुम्हारी दी हुई सारी सज़ाएं हैँ मंज़ूर
न जाने क्या हुआ इक रोज़ उसने मुझसे कहा
अगर हो वाबस्ता आशिक़ी से कहो सभी से
बचाओ दुनिया को तीरगी से कहो सभी से
तुम्हारी चीख ओ पुकार से मसअला नहीं कुछ
चमन में जाते हो तो चमन से सबक़ भी सीखो
ये इश्क़ क्या है बुरी बला है बुरी बला है
ख़ुदा की रहमत से नाउमीदी रखें न हरगिज़
बिछड़ के जाते हुए जो उसने कहा था सोनम
ये नहीं मालूम क्या उसने कहा
बाद में इंसाँ नहीं रहने दिया
हम तो दोनों दो बदन इक जान हैँ
मौत कहती है जिसे दुनिया उसे
मैंने सीने से लगा के रख लिया
पोंछ डाले अपने आंसू और फिर
मुझमे उसको अक्स आता है नज़र
सोनिया अक्स सोनम, पानीपत
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