Sunday, July 12, 2026
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संबंधों की जटिलताओं का कहानी संग्रह है ‘आप्यायन’

कहानी संग्रह : आप्यायन, लेखिका : शालिनी खन्ना, प्रकाशक : वणिक
पब्लिकेशन्स, दिल्ली, मूल्य : रु. 400/-
समीक्षा : प्रो. हरीश अरोड़ा 

शलिनी खन्ना का कहानी-संग्रह ‘आप्यायन’ समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ और बदलते पारिवारिक-सांस्कृतिक मूल्यों का अत्यंत प्रभावशाली दस्तावेज़ बनकर सामने आता है। संग्रह की पंद्रह कहानियाँ जीवन के विविध अनुभवों को इस प्रकार अभिव्यक्त करती हैं कि वे केवल घटनाओं का विवरण न रहकर मनुष्य के भीतरी संसार की व्यथा, संघर्ष, प्रेम, अकेलेपन, संबंधों की ऊष्मा और विघटन की जीवंत अभिव्यक्ति बन जाती हैं। लेखिका की विशेषता यह है कि वे जीवन के सामान्य प्रसंगों में भी गहरी मानवीय संवेदना खोज लेती हैं और उन्हें सहज भाषा में पाठकों तक पहुँचाती हैं।

इस संग्रह की सबसे प्रमुख विशेषता उसकी मानवीय संवेदनशीलता है। शलिनी खन्ना की कहानियाँ मनुष्य के भीतर घटित होने वाले भावनात्मक संघर्षों को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ चित्रित करती हैं। संबंधों के टूटने, अकेलेपन, उपेक्षा, स्मृतियों और आत्मीयता की तलाश जैसे भाव संग्रह में बार-बार उभरते हैं। आधुनिक जीवन की व्यस्तता और भौतिकता ने मनुष्य को भीतर से कितना अकेला कर दिया है, इसका मार्मिक चित्रण इन कहानियों में दिखाई देता है। लेखिका कहीं भी कृत्रिम भावुकता का सहारा नहीं लेतीं, बल्कि जीवन-सत्य को उसकी स्वाभाविकता में प्रस्तुत करती हैं। यही कारण है कि उनकी कहानियाँ पाठक के भीतर गहरे उतरती हैं।

‘सुहागन’ भारतीय नारी की भावनात्मक संरचना और सामाजिक यथार्थ का अत्यंत मार्मिक चित्र प्रस्तुत करती है। यह कहानी केवल विवाह संस्था का आख्यान नहीं बल्कि दमयन्ती जैसी उस स्त्री की अंतर्वेदना का दस्तावेज है जो अपने अस्तित्व को परिवार और संबंधों में विलीन कर देती है। ‘उधड़े हुए रिश्ते’ आधुनिक जीवन में संबंधों के विघटन की त्रासदी को सामने लाती है। भौतिकता और स्वार्थपरकता ने पारिवारिक आत्मीयता को किस प्रकार प्रभावित किया है यह कहानी उसी विघटनशील यथार्थ का चित्रण करती है। सुखी और दीपेन जैसे पात्र जीवन की हर गली में उपस्थित हैं।

‘हारा हुआ कल’ स्मृतियों और वर्तमान के द्वंद्व की कहानी है। मनुष्य अपने अतीत से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाता; वह बार-बार अपने बीते समय में लौटता है। इस कहानी में अतीत की पीड़ा और वर्तमान की विवशता का गहरा मनोवैज्ञानिक चित्रण मिलता है। लेखिका ने पात्रों के अंतर्मन को अत्यंत सूक्ष्मता से उकेरा है जिससे कहानी में भावात्मक गहराई उत्पन्न होती है।

‘धरती कितना देती है’ ग्रामीण जीवन, श्रम-संस्कृति और मनुष्य-प्रकृति संबंध का अत्यंत संवेदनशील चित्र प्रस्तुत करती है। कहानी में किसान जीवन की कठिनाइयों के साथ-साथ धरती के प्रति मनुष्य की आस्था और भावनात्मक जुड़ाव को उभारा गया है। ‘कद’ कहानी मनुष्य के बाह्य और आंतरिक व्यक्तित्व के अंतर को रेखांकित करती है। सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक सफलता को ही ‘बड़ा होना’ मानने वाली मानसिकता पर यह कहानी तीखा व्यंग्य करती है।

संग्रह की कथाओं में पारिवारिक संबंधों का बदलता स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उभरकर सामने आता है। माता-पिता और संतान, पति-पत्नी, भाई-बहन तथा अन्य आत्मीय संबंधों के बीच बढ़ती दूरी और संवादहीनता को लेखिका ने गहरी संवेदना के साथ चित्रित किया है। आज का मनुष्य संबंधों के बीच रहते हुए भी भावनात्मक रूप से अकेला है; यह विडंबना संग्रह की अनेक कहानियों में परिलक्षित होती है। संबंधों की ऊपरी चमक के पीछे छिपी रिक्तता और टूटन लेखिका की दृष्टि से बच नहीं पाती। वे इस विघटन को केवल सामाजिक समस्या के रूप में नहीं, बल्कि मनुष्य की आंतरिक त्रासदी के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

स्त्री-जीवन और नारी-अस्मिता भी संग्रह की केंद्रीय संवेदनाओं में शामिल हैं। शलिनी खन्ना की स्त्रियाँ केवल पीड़ित या करुण पात्र नहीं हैं, बल्कि वे संघर्षशील, आत्मसम्मानपूर्ण और भीतर से मजबूत व्यक्तित्व की प्रतिनिधि हैं। वे पारंपरिक सामाजिक संरचनाओं और पुरुषवादी मानसिकताओं के बीच अपने अस्तित्व की पहचान बनाए रखने का प्रयास करती हैं। लेखिका स्त्री के मानसिक संसार, उसकी मौन पीड़ा, उसकी आकांक्षाओं और उसके आत्मबल को अत्यंत सूक्ष्मता से व्यक्त करती हैं। यहाँ स्त्री-विमर्श किसी वैचारिक नारे के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों से उपजी स्वाभाविक अभिव्यक्ति के रूप में उपस्थित होता है।

संग्रह की विषय-वस्तु का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी और बदलते सामाजिक मूल्यों का चित्रण है। आधुनिकता, तकनीक और उपभोक्तावादी संस्कृति ने पारिवारिक संरचनाओं और मानवीय संबंधों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है। नई पीढ़ी की सोच और पुरानी पीढ़ी के जीवन-मूल्यों के बीच जो टकराव उत्पन्न हुआ है, वह इन कहानियों में अत्यंत यथार्थपरक रूप में व्यक्त हुआ है। लेखिका इस परिवर्तन को एकांगी दृष्टि से नहीं देखतीं; वे नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को भी समझती हैं और पुरानी पीढ़ी की भावनात्मक पीड़ा को भी। इस संतुलित दृष्टि के कारण कहानियाँ अधिक विश्वसनीय और प्रभावपूर्ण बन जाती हैं।

ग्रामीण और शहरी जीवन के अंतर्विरोध भी संग्रह की विषय-वस्तु को व्यापक आयाम प्रदान करते हैं। कहीं श्रम और धरती से जुड़ा जीवन है, तो कहीं महानगरीय जीवन की कृत्रिमता और आत्मकेन्द्रिकता। लेखिका ने समाज के मध्यवर्गीय जीवन को विशेष रूप से केंद्र में रखा है, जहाँ संघर्ष, असुरक्षा, सामाजिक प्रतिष्ठा की चिंता और भावनात्मक असंतोष एक साथ उपस्थित रहते हैं। आर्थिक और सामाजिक परिवर्तनों ने मनुष्य की मानसिकता को किस प्रकार प्रभावित किया है, यह इन कहानियों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

संग्रह की एक बड़ी विशेषता उसका मनोवैज्ञानिक धरातल है। लेखिका पात्रों के बाहरी व्यवहार से अधिक उनके अंतर्मन की हलचलों को पकड़ती हैं। स्मृतियाँ, अपराधबोध, असफलताएँ, इच्छाएँ और आत्मसंघर्ष कहानियों के भीतर एक गहरी मनोवैज्ञानिक संरचना निर्मित करते हैं। यही कारण है कि कथाएँ केवल सामाजिक यथार्थ का चित्रण भर नहीं करतीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलने वाले द्वंद्व को भी अभिव्यक्त करती हैं।

इस संग्रह की अधिकांश कहानियाँ स्त्री-शक्ति और आत्मसम्मान का सशक्त आख्यान हैं। लेखिका ने इनमें कहीं स्त्री को करुणा की प्रतिमा के रूप में दिखाया है तो कहीं संघर्षशील और आत्मनिर्णयी व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया है। ये कहानियाँ समकालीन स्त्री-विमर्श से भी गहरे स्तर पर जुड़ती हैं।

देखा जाए तो शलिनी खन्ना की कहानियाँ जीवन के यथार्थ से सीधे जुड़ी हुई हैं। वे कृत्रिमता से दूर रहकर समाज के मध्यवर्गीय जीवन, स्त्री-अनुभवों और पारिवारिक संबंधों को अत्यंत स्वाभाविकता के साथ प्रस्तुत करती हैं। उनकी कथाओं में संवेदना और विचार का संतुलित समन्वय दिखाई देता है। भाषा में कहीं-कहीं काव्यात्मकता भी दृष्टिगत होती है जो कथाओं को भावात्मक ऊँचाई प्रदान करती है।

अस्तु, ‘आप्यायन’ एक ऐसा कहानी-संग्रह है जो समकालीन जीवन की विडंबनाओं, संबंधों की जटिलताओं और मानवीय संवेदनाओं को अत्यंत प्रामाणिकता के साथ अभिव्यक्त करता है। यह संग्रह पाठक को केवल कथा-सुख नहीं देता, बल्कि उसे अपने समय, समाज और संबंधों के बारे में गंभीरता से सोचने के लिए भी प्रेरित करता है। शलिनी खन्ना ने अपनी कहानियों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि साहित्य का वास्तविक उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर संवेदना और आत्मबोध को जाग्रत करना भी है। यही कारण है कि ‘आप्यायन’ समकालीन हिंदी कहानी-साहित्य में एक महत्त्वपूर्ण और पठनीय कृति के रूप में स्थापित होता है।

  • प्रो. हरीश अरोड़ा
    प्रोफेसर (हिन्दी) पीजी डीएवी कॉलेज (सांध्य), दिल्ली विश्वविद्यालय, नेहरू नगर, नई दिल्ली-110065
    लेखक महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक रहे हैं।
    [email protected]
    8800660646

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