तेज संगीत बज रहा था। नीलू अपने पति की बाहों में नशे में झूम रही थी। पति व्यापारी था। किस चीज का व्यापार करता था यह नीलू को पता नहीं था। नीलू का परिवार निम्न मध्यम वर्गीय था। अपने गाँव जो कि इटावा के करीब था; से निकलकर लखनऊ पढ़ाई करने वाली अपने परिवार की वह पहली लड़की थी। दिखने में गेहुँआ रंग लिये ऊँचे कद की तीखे नैन नख्श के साथ भरे पूरे शरीर की सुंदर लड़की थी। लखनऊ में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उसकी जान-पहचान रवि से हुई थी। रवि गोरे रंग का बलिष्ट शरीर के साथ छह फिट का कद लिये आकर्षक नौजवान था। नीलू पहली नजर में ही दिल दे बैठी थी फिर आगे क्या सोचती। कॉलेज खत्म होने के बाद भी दोनों का अफेयर चलता रहा। रवि का लखनऊ में बिजनेस, अपना मकान गाड़ी है। नीलू के परिवार से बहुत ज्यादा हैसियत है, यह सोचकर नीलू का विवाह करा दिया गया। विवाह के एक माह बाद दोनों गोवा घूमने गये जहाँ पति के कहने पर नीलू ने शराब पी और डिस्को की धुन पर नृत्य कर रही थी।
अगले दिन नीलू ने अपने होटल के कमरे में देखा कि दो पहलवान लड़के उसके पति से लड़ रहे हैं। वो दोनों उसके पति से बहुत जल्दी जल्दी अंग्रेजी में बात कर रहे थे इस कारण वह पूरी तरह समझ नहीं पाई। उन दोनों के जाने के बाद जोर देकर पूछने पर उसके पति ने बताया कि वो दोनों ब्लेकमेल कर रहे हैं उससे रकम मांग रहे हैं। ब्लैकमेल की बात सुनकर नीलू ने घबराकर पूछा, “आखिर किस बात के लिये?”
रोनी सूरत बनाते हुए रवि ने बताया, “कल जब हम दोनों बीयर पीकर उस पत्थर के पीछे अंतरंग हो रहे थे ये सोचकर कि कोई नहीं देख रहा है; तब ही इन दोनों ने हमारी विडियो बना ली। उसी की वसूली करना चाह रहे हैं। कहाँ से लाऊँ बीस लाख रुपये!”
नीलू, ”कोई उपाय?”
रवि, “है तो मगर…मुझे पसंद नही। तुम्हें भी अच्छा नहीं लगेगा।“
नीलू, “बताओ, क्या पता समस्या हल हो जाये।
रवि सिर खुजलाते हुए सकुचाते हुए, “हम चुपचाप विदेश चले जाते हैं। मेरा एक दोस्त है जो सारा इंतजाम कर देगा। तुम कुछ रुपये अपने घर से मंगवा लो मैं भी मंगा लेता हूँ। चलो तुम्हें विदेश घुमाकर लाता हूँ। चार छह महीने में ये मुसटंडे भी सब भूल जायेंगे। हमारा पीछा नहीं कर पायेंगे।“
नीलू की विदेश घूमने की ख्वाहिश इस तरह पूरी होगी उसने सपने में भी नहीं सोचा था।
विदेश में एक हफ्ते तक दोनों के मजे से दिन रात बीते। कब सुबह कब शाम हुई खबर ही नहीं हुई। नया नसेड़ी नशा कुछ ज्यादा ही बढ़चढ़कर करता है कहीं गँवार या पिछड़ा ना कहला जाये इस बात का भय मूर्खों को बना रहता है वही हाल नीलू का था। आज भी गाँव देहात में एक गलत अवधारणा है कि शराब पीना और अंग्रेजी बोलने से मॉर्डन कहलाते हैं; इस चक्कर में अधकचरे बेबकूफ बन लूट लिये जाते हैं। वही हाल नीलू का होने वाला था। बल्कि लगभग हो ही गया था।
आधी रात में डिस्को पार्टी में वही दोनों लड़कों को देखकर नीलू का नशा रफूचक्कर हो गया। हद तो तब हो गयी जब वो दोनों उसके पति से अकेले में ना जाने क्या बात कर रहे थे। नीलू जब उनके करीब पहुँची तब वो दोनों नीलू पर एक तीखी नजर डालकर वहाँ से चले गये। पूछने पर पति ने वही बात दोहरायी साथ में यह भी जोड़ा कि हमारे होटल में इन्होंने हमारी और भी विडियो बना ली है जिसे रुपये ना मिलने पर सार्वजनिक करने की बात कर रहे हैं। दोनों अपने होटल उदासी लिये लौट आये। रास्ते भर दोनों कार में अपने दिमाग को दही बनाते रहे। होटल पहुँचकर रवि ने जो कुछ नीलू से कहा उससे नीलू के पैरों तले धरती खिसक गयी मानो पहाड़ टूट पड़ा हो।
रात भर नीलू सिस्कारियाँ भरती रही। समझ नहीं आ रहा था कहाँ जाये किससे मन की कहे। पति जिसे सबकुछ मान बैठी थी विदेश में देश छोड़ उसके रंग में रंग गयी थी वह ऐसा निकलेगा सोचकर उसका सिर फटा जा रहा था। अब उसके सामने कोई चारा नहीं बचा था। वह ना केवल पति बल्कि उन लोगों के समक्ष भी नग्न हो गयी थी जिसे वह जानती नहीं थी। अब तो केवल जिस्म सौंपकर सीमित करने की बात थी। मगर जो यहाँ तक पीछे आ सकता है वह…! सोच सोचकर उसका जी घबरा रहा था। पति ने उसके सामने सारे हथियार डाल दिये थे और उस पर निर्णय लेने का भार छोड़ दिया था। बगल में सो रहे पति को देखकर वह यही सोच रही थी कि इनको नींद कैसे आ सकती है फिर यह सोचकर अपने मन को बहलाया कि गम में ज्यादा नशा कर लेने से शायद नींद आ गयी। वह जोश के साथ उठी और एक के बाद एक नशे का गिलास खाली करके बिस्तर पर लुढ़क गयी।
अगली शाम जो कुछ हुआ वह उसकी परिकल्पना से भी परे था। उसके पति की उपस्थिति में उसके साथ उन दोनों ने एक एक करके दो दिनों में दो विडियो बनायी। यह कहकर कि अब वो उन्हें कभी नहीं मिलेंगे और ना ही परेशान करेंगे अलविदा बोल चले गये। मगर…
एक दिन उनमें से एक लड़का नीलू के करीब आया और धीरे से जो बता और दिखा गया वह उसके जीवन का टर्निंग पोइंट था। अब उसे क्या करना था वह समझ चुकी थी। ना चाहते हुए भी दल-दल में फंस चुकी थी। उसने उसको अपने विश्वास में लेकर अपने पति के सामने सबकुछ सच बोलने के लिये कहा। और उसको यकीन दिला दिया कि वह इस राह पर आगे ही बढ़ेगी पीछे नहीं हटेगी मगर केवल उसके साथ पार्टनर बनकर।
रवि के सामने जब उस लड़के ने सबूतों के साथ नीलू को यकीन दिला दिया तब विवाह जैसे पवित्र रिश्ते से नीलू का मन फट गया। वो दोनों रवि के गुर्गे निकले। रवि की ही सारी साजिश थी। अनेक लड़कियों को वह इसी तरह प्यार के झांसे में फाँसकर विदेश लाकर इस गंदे धंधे में धकेल चुका था। नीलू परम्परावादी लड़की थी गरीब घर की थी इसलिये इसके साथ विवाह करके लाना पड़ा।
नीलू ने उस लड़के के साथ मिलकर अब अपनी नयी दुनिया बना ली है जहाँ खूब पैसा,शराब और उसका जिस्म है जिसकी आत्मा मर चुकी है। वह लड़का उसका पर्सनल मित्र/ एजेंट बन गया था। उसके लिये नये नये ग्राहकों से बुकिंग लेता और कमाई का चालीस प्रतिशत नीलू को दे देता। खुद पचास प्रतिशत रखता और दस प्रतिशत उसके पति को अर्थात रवि को देता जिसकी खबर नीलू को बिल्कुल नहीं थी। असल में उस लड़के का उससे अकेले में मिलकर उसके पति की सच्चाई बताने के लिये उसके पति अर्थात रवि ने ही उसे कहा था। क्योंकि रवि नीलू से पीछा छुड़ाना चाहता था मगर पतिव्रता नीलू तो रवि को खुश करने के लिये उसके रंग में भी रंगे जा रही थी। अंत में नीलू की मनोदशा को रवि अच्छे से समझ चुका था इसलिये उसने अपने मित्र को अपने खिलाफ सबूतों के साथ उसे उसके सामने सब बताने के लिये कहा। अंतत: वह पीछा छुड़ाने में कामयाब हो गया। और नये शिकार पर निकल गया।…
- संगीता कुमारी
नरोरा एटॉमिक पॉवर स्टेशन टाउनशिप, बुलंदशहर
