डॉ मुक्ति शर्मा का लेख - ‘आवां’ में नारी के यौन शोषण के प्रति आक्रोश 3
नारी की स्थिति में सुधार लाना चित्रा मुद्गल ने अपना प्रथम लक्ष्य बनाया यही कारण है “आवां” समाज के बनते बिगड़ते और बदलते हुए भारतीय परिवार का “उपन्यास” है इस उपन्यास के माध्यम से उन्होंने कहना चाहा है कि जब तक परिवार और समाज में नारी को उचित स्थान प्रदान नहीं किया जाता तब तक नारी इसी प्रकार उपेक्षित रहेगी।
हमारे समाज में सदियों से नारी उपेक्षित चली आ रही है। उसका समाज में पुरुषों द्वारा कामुक शोषण होता रहा है। चित्रा मुद्गगल ने नारी की स्थिति को समझा। नारी की स्थिति में सुधार लाना उनके उपन्यास का मुख्य उद्देश्य रहा है। लेखिका बताना चाहती है नारी की दुर्बलता के कारण ही पुरुष नारी का शोषण करता है। उसका भोग करता है। वह जैसा चाहता है, वैसा कार्य उससे करवाता है, चाहे इसके पीछे उसकी इच्छा का दमन क्यों ना हो जाए परंतु पुरुष तो उसका उपयोग करता आया है और सदैव करता ही रहेगा। 
नारी शोषित होती रहती है कभी बाप (मटका किंग) के हाथों तो कभी बाप रूपी अन्ना साहब जैसे नेता के हाथों तो कभी विनोद जैसे भाई के हाथों तो कभी सुहैल, सुधीर जैसे प्रेमी के हाथों।’ आवां में स्मिता अपनी बहन की व्यथा नमिता के सामने व्यक्त करती हुई कहती है। “अविश्वास से यह अवसन्न हो गई है। पिता के लिए कोई पुत्री देह हो सकती है। स्मिता के संग कुछ गड़बड़ आई है। हमेशा नहीं। अचानक कोई प्रेतात्मा सवार हो उठती है। उस पर और वह अलाप-बलाप आप बकने लगती है!१
वहीं दूसरी ओर आर्थिक विषमता के कारण नमिता अन्ना साहब के यहां नौकरी करती है-बाप रुपी अन्ना साहब उससे व्यभिचार करता है उपन्यास में यूनियन से अलग होने का कारण लेखिका ने उसके साथ अन्ना साहब व्यभिचार बताया है।
नारी विमर्श को तीव्रता प्रदान करने के लिए लेखिका ने अन्ना साहब के नारी संबंधी विचारों का भी अच्छा उपयोग किया है। नारी संबंध के बारे में अन्ना साहब दार्शनिक मुद्रा में कहते हैं।”देह मुझे नहीं भोगती! भूले भटके में अपनी दैहिक और मानसिक थकान उतारने के लिए उसका उपयोग कर लेता हूं और नई स्फूर्ति नई ऊर्जा के साथ श्रमिक संस्थान में ऐसा संलग्न होता हूं।”२
अपने दाहिने हाथ और लकवाग्रस्त होने के पहले ‘लाघाणी’ के महा-सचिव देवी शंकर पांडे की बेटी के साथ उसे पुत्रीवत मानते हुए भी अपने क्षणिक सुख के लिए विवश करते हैं, नमिता के लिए सहयोग न करने पर बलात्कार की धमकी देते हैं। “पिता समान हूं मैं तुम्हारा पिता नहीं हूं। नियंत्रण में नहीं रहूंगा तो कह नहीं सकता, क्या करूंगा। तुम्हारी देह के साथ कोई खिलवाड़ नहीं करूंगा, अपनी देह के साथ खेलने के लिए मैं स्वतंत्र हूं। हाथ मत छुड़ाओ। जैसा कहूं करती चलो।”३
अन्ना साहब के व्यभिचार का विरोध करती है स्मिता, नमिता को फटकारते हुए कहती है पे- पे छोड़। पे-पे करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला। पे-पे की बजाए उसी समय हिम्मत दिखाती। कुर्सी उठाकर पटक देती साले हरामी‌ के सिर पर। बहाने गढ़ता फिरता अपने फूटे सिर के पीछे। मजदूर नेता हो या मटका किंग सब साले मर्द है कुत्ते। कटखने। माफी मांगने से क्या होता है और तू क्यों माफ करने लगी? जिस काम में तू राजी नहीं हरामखोर ने तेरा इस्तेमाल किया कैसे? स्मिता उस नारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है, जो पुरुष के इस शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद करती है।”मगर मैं हार मानने वाली नहीं। साले मर्दों को उनकी मरदाई का सबक ना सिखाया तो…….!”४
संजय अपना वंशज चाहता है और अपने पुसंत्व को सिद्ध कर नामर्द के स्थान पर असली पुरुष बनना चाहता है। वस्तुतः संजय की इस अभिलाषा की पूर्ति के लिए नमिता को संजय से मिलाया जाता है। ऐसे अवसरों का लाभ उठाने के लिए जैसा कि अधिकांश पुरुष करते हैं संजय भी पत्नी के साथ अपने संबंधों को सफल बताता है”कल्पनातीत है उसके हथकंडे। पत्नी वो मेरी? संभोग के ऐन चरम में अलग ही मुंह फेर लेगी। दुतकारते हुए कहेगी इच्छा नहीं हो रही उसकी। चाहे तो अपने हाथ से निपटा लें।” ५
“जीभ का परम सुख उठा कर देखो। मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी।६”
और अपनी पत्नी को तलाक देने की बात कहता है मॉडलिंग के लिए वे सिद्धार्थ जैसे घमंडी और बदतमीज फोटोग्राफर के साथ खंडाला जाते हैं जो नमिता के सामने अपने व्यापार और सहयोग की बात करता है। उसके जैसे विख्यात फोटोग्राफर के साथ काम करने के लिए भी अपने लाभ का 40% देने के लिए तैयार है, पर उसकी शर्त यह भी है कि नमिता को उसके साथ दैहिक संबंध रखने पड़ेंगे। सिद्धार्थ अपने आचरण में मुंहफट है, जिससे नमिता भयभीत हो जाती है और सिद्धार्थ के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहती है “आप के प्रस्ताव पर मैं थूकती हूं सिद्धार्थ जी। शुभचिंतक को अपने भविष्य की जिम्मेवारी सौंपी जा सकती है, दलाल को नहीं। दलाल को तो हर औरत रंडी नजर आती है। बेहतर होगा आप फोटोग्राफी छोड़ ,चकला खोल ले।७”
ऐसे में सुख में और संभ्रांत संजय के स्नेहिल और सम्मान पूर्ण व्यवहार से वे अस्वस्थ होती है जिसे वह अपना संरक्षक और मुक्तिदाता समझने लगती है। ऐसे अवसर पर होटल में नमिता और संजय का स्नेह पूर्ण मिलन होता है। नमिता संजय को पूर्ण स्नेह देती है और मर्दानगी और पुंसत्व को सिद्ध कर वह और भी संतुष्ट होता है।
आभूषण डिजाइनिंग के लिए मैडम का प्रस्ताव है कि नमिता हैदराबाद जाकर वहां के प्रसिद्ध संस्थान में। महीने की ट्रेनिंग ले। इससे उसके भविष्य में प्रगति करने के अवसर और भी बढ़ जाएंगे। नमिता तो आगे पढ़ना सीखना तो चाहती थी इस बीच में बाबूजी जी का देहान्त हो जाता है और मां की प्रताड़ना बढ़ती जाती है। मुनिया और छन्नू की चिंता में व्यग्र होते हुए भी इस अवसर का लाभ उठाती है और हैदराबाद जाकर मैडम वासवानी की बहन के महलनुमा विशाल मकान में रह कर प्रशिक्षण शुरू कर देती है, यहां से पत्थर गट्टी नाम से उपन्यास का नया आख्यान शुरू होता है। कुछ महीनों के बाद ही नमिता को पता चलता है कि वह गर्भवती है। 
डॉक्टर राग उसे बताती है। “तुम गर्भवती हो तुम्हें चौथा महीना पूरा हो पांचवां, आरंभ होने जा रहा है। उसने डॉक्टर को बताया कि वह ‘कुंवारी ‘है और बच्चा नहीं चाहती। लेकिन डॉक्टर अब इस बढ़ी हुई स्थिति में गर्भ गिराने से इंकार कर देती है। नमिता संजय को फोन पर गर्भवती होने की सूचना देती है जिसे सुनकर भी अत्यंत खुश होता है और वह भी नमिता के गर्भ गिराने के इरादे को एकदम खंडित कर देता है,”८ ना तुम बच्चे को हाथ नहीं लगाओगी 13 साल बाद 13 साल बाद मैं बाप बन रहा हूं।”९
संजय की पत्नी अपनी बहन शारदा से बच्चा पैदा करवा रही है, जिसे वह गोद लेगी, जिसमें संजय को कोई दिलचस्पी नहीं है वह अपनी मर्दानगी को बतौर सबूत अपना खुद का पैदा किया हुआ बच्चा चाहता है। इसलिए अपना कठोर निर्णय देते हुए नमिता को धमकी देता है”देखो मेरे बच्चे के संग तुमने आवेश में आकर कोई छेड़छाड़ की तो तंदूर कांड हो जाएगा जान से जाओगी तुम नैना सहानी की तरह। एकदम सुशील शर्मा की आत्मा प्रवेश कर जाएगी मुझमें।”१०
संजय ने नमिता के लिए मुंबई में फ्लैट खरीद लिया है, क्योंकि अहमदाबाद में उसकी पत्नी निर्मला के साथ उसके संभ्रांत सामाजिक एवं पारिवारिक संबंध बने रहेंगे। यद्यपि वे नमिता को बहला रखने के लिए निर्मला से तलाक की बातें तो करता रहता है लेकिन नमिता जैसी एक साधारण परिवार की लड़की के साथ सम्मानपूर्वक ,सामाजिक जीवन नहीं बिताना चाहता। नमिता बड़ी दुविधा में फंस गई है, ना तो वे इस प्रकार के पुरुष की रखैल बन कर अपनी चारित्रिक हत्या करना चाहती है और ना अब पेट गिरवा सकती है। ऐसी कठिन अवस्था में अन्ना साहब की हत्या की खबर उसके लिए वरदान के रूप में आती है। उसका माध्यम बनता है पवार जो उसे फोन पर सूचित करता है। अन्ना साहब की हत्या की कर दी गई इस खबर से नमिता इतना दहल जाती है, कि उसे गर्भपात हो जाता है।
जब नमिता संजय को फोन पर गर्भपात की सूचना देती है, तो संजय विश्वास नहीं कर पाता और अपने इरादों की नाकामयाबी से बौखलाकर वह क्रोध में सब उगल देता है, जो पूरे जाल के पीछे छिपा हुआ था”झूठी…… प्राण ले लूंगा मैं तुम्हारे….. मुझे मेरा बच्चा चाहिए…… बच्चा….. जानती हो? बाप बनने के लिए मैंने तुम्हारे ऊपर कितना खर्च किया उस मामूली औरत अंजना वासवानी की औकात है कि तुम्हारे ऊपर पैसा पानी की तरह बहा सके? उसका जिम्मा सिर्फ इतना भर था कि वह मेरे पिता बनने में मेरी मदद करें और वादे के मुताबिक अपना कमीशन खाये। वे ऐसी पचासों लड़कियों को परोस सकती थी, जो मुझसे यौन संबंध कायम कर केवल पचहत्तर हजार में मुझे बाप बना सकती थी….. मुझे गवारा थी ऐसी किराये की कोख। मुझे सिर्फ उस लड़की से संबंध बनाने थे जो पेशेवर ना हो…. पवित्र हो…. जो मुझ से प्रेम कर सके। सिर्फ मेरे लिए मां बने। सिर्फ मुझसे सहवास करें…. हमारा मिशन सफल रहा…..तेरह वर्ष बाद मैं बाप बना अपने बच्चे का बाप। उस औरत से जिसे मैं सचमुच प्यार करने लगा। उसी ने मुझे धोखा दिया मेरे बच्चे की जान ले ली।……. मुझे बाप बना कर तुम जीवन भर ऐशो आराम से रह सकती थी।”१२
चित्रा जी नारी विमर्श के अंतर्गत पुरुषों को प्रताड़ित करती हैं”जब अन्ना साहब और दलित नेता पवार सुनंदा की मय्यत को कंधा देने लगते हैं तभी ‘जागो री’ की नेता विमला बाई उन्हें धमकी देकर अलग कर देती है और औरतों का आह्वान करते हुए शीघ्र कटाक्ष करती है,”कूप-मंडूक पुरुषों से हमें सीखना होगा स्त्रियों के लिए क्या शास्त्र सम्मत है क्या नहीं? निर्दोष औरतों को निशांत हत्या करना शास्त्र सम्मत है? मैं कंधा किसी औरत की मय्यत को नहीं दे रही, उसी स्त्री चेतना को दे रही हूं जिसका गला घोटने की कोशिश हत्या के बहाने हुई है।
लेखिका कहती है स्त्री चाहे कितनी भी क्षमता वान हो श्रम शील हो कुशल हो प्रतिष्ठित पद पर पहुंच चुकी हो पुरुषों को सदैव यही लगता रहता है कि पुरुष सदैव कांपती हुई अपने ही आंचल में दुबक जाएगी।

१आवां , पृष्ठ संख्या ७७
२आवां, पृष्ठ संख्या ४४
३ आवां, पृष्ठ संख्या १३६
४ आवां, पृष्ठ संख्या १३६
५आवां, पृष्ठ संख्या २७७
६आवां, पृष्ठ संख्या ३७१
७आवां, पृष्ठ संख्या ४२५
८आवां‌, पृष्ठ संख्या २९५
९आवां, पृष्ठ संख्या ४९९१
१०आवां, पृष्ठ संख्या५२३
११आवां पृष्ठ संख्या ३९
१२आवां पृष्ठ संख्या १५३

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