संपादकीय - सऊदी अरब में 8000 वर्ष पुराना शहर और मंदिर 7

अभी किसी भी आधिकारिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में हिन्दू मंदिर या देवी देवताओं के बारे में कोई ज़िक्र नहीं किया गया है। हमें सब्र से प्रतीक्षा करनी चाहिये। ‘पुरवाई’ का यह कहना नहीं है कि यह मंदिर हिन्दू मंदिर नहीं हो सकता। मगर यह कहना ज़रूरी है कि जब तक सच्चाई ज़ाहिर न हो जाए, तब तक समाचार को समाचार ही बना रहने दिया जाए, किसी एजेन्डे में परिवर्तित न किया जाए।

हम जब भी कभी प्राचीन सभ्यताओं का ज़िक्र करते हैं तो भारत के अतिरिक्त हम इन सभ्यताओं की बात कर रहे होते हैं – मिस्त्र की सभ्यता, मेसोपोटामिया की सभ्यता, सुमेरिया की सभ्यता, बेबीलोन की सभ्यता, असीरिया की सभ्यता,  चीन की सभ्यता, यूनान की सभ्यता, रोम की सभ्यता।
मगर हाल ही में एक ऐसा समाचार देखने को आया जिसने पूरे विश्व को चकित कर के रख दिया। आमतौर पर सऊदी अरब और इज़राइल के इलाके को किताबी मज़हबों का क्षेत्र माना जाता है। यहां से ही यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्म का जन्म हुआ। मगर सऊदी अरब में पुरातत्व सर्वेक्षण से एक आठ हज़ार वर्ष पुराना शहर निकल कर सामने आया है। इस शहर में एक मंदिर भी पाया गया है जहां मूर्ति पूजा और धार्मिक अनुष्ठान होते थे।
भारत के कुछ लोग जैसे ही मंदिर शब्द सुनते हैं उनके भीतर का हिंदू जागृत हो जाता है। यहां यह बात साफ़ करना ज़रूरी हो जाता है कि नवपाषाण काल के शहरों में हर पूजा-स्थल को मंदिर ही कहा जाता है, फिर देश चाहे कोई भी क्यों न हो। यहूदियों के प्रार्थना स्थल कहलाता है सिनेगॉग, ईसाइयों का चर्च और मुसलमानों का पूजा-स्थल कहलाता है मस्जिद। 
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इस नये पुरातत्व सर्वेक्षण से उस क्षेत्र और सभ्यता के बारे में बहुत सी नई बातें जानने को मिलेंगी। जहां ये अवशेष मिले हैं वो स्थान रियाध के दक्षिण में स्थित है। कहा जा रहा है कि तुवाईक पर्वत के किनारे स्थित इस शहर में पाये गये मंदिर का नाम रॉक-कट है। ज़ाहिर है कि इस काल के निवासी पूजा-अनुष्ठान करते थे। इस मंदिर में धार्मिक शिलालेख भी पाए गये हैं।
अब तक आए नतीजों के मुताबिक अल-फॉओ के लोग बड़े धार्मिक थे। खुदाई में एक ऐसा शिलालेख मिला जिससे अल-फॉओ के एक देवता कहल के होने की पुष्टि होती है।
घरों, भवनों के अतिरिक्त करीब 2807 क़ब्रें भी मिली है। इससे एक बात साफ़ होती है कि इस इलाक़े में 8000 वर्ष पहले भी मुर्दे को दफ़नाने की प्रथा अपनाई जाती थी। मरने वाले किस धर्म के मानने वाले थे इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि इतना कहा जा रहा है कि यहां मिली कब्रें अलग-अलग समय की हैंपुरातत्व विभाग का यह सर्वेक्षण अल-फ़ाओ इलाके में हुआ है जो कभी किंडा राज्य की राजधानी हुआ करती थी। 
इसी साइट पर एक प्राचीन बड़े शहर का पता चला है जिसके कोने पर कुछ मीनारें बनी हैं> इसी शोध के दौरान दुनिया की सबसे शुष्क जमीन और कठोर रेगिस्तानी वातावरण में नहरों, पानी के कुंड और सैंकड़ों गड्डों समेत क्षेत्र में जटिल सिंचाई प्रणाली के बारे में भी जानकारी मिली है। 
इस शोध में मिले अवशेषों को एडवांस स्टडी के लिए भेजा गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस खोज में उच्च-गुणवत्ता की एरियल फोटोग्राफी, कंट्रोल प्वाइंट के साथ ड्रोन फुटेज, रिमोट सेंसिंग, लेजर सेंसिंग और कई अन्य सर्वे का इस्तेमाल किया गया है…
रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्थरों पर शिलालेख में माधेकर बिन मुनैम नाम के शख्स का जिक्र किया गया है। हेरिटेज कमीशन का कहना है कि सर्वे और खुदाई इसलीए शुरू की गई थी, ताकि लोगों को उनकी विरासत की जानकारी मिल सके। अभी यहां पर खुदाई और रिसर्च वर्क जारी रहेगा, ताकि इतिहास से जुड़ी नई-नई जानकारियां सामने आ सकें।

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भारत में अति-उत्साहित पत्रकार कुछ इस प्रकार की रिपोर्टिंग भी कर रहे हैं, इस्लाम के गढ़ में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुई खुदाई में कई चौंकाने वाली चीजें सामने आई हैं… पुरातत्व विभाग को दक्षिण-पश्चिम इलाके के अल-फॉ की साइट पर खुदाई में 8 हजार साल पुराना मंदिर मिला है। यहां इतनी ही पुरानी यज्ञ वेदी मिली है। खुदाई के नतीजे बताते हैं कि सऊदी अरब में एक समय में यहां हिन्दू सभ्यता का अस्तित्व रहा है। चौंकाने वाली बात है कि यज्ञ-वेदी उसी दिशा में है जिस तरफ़ आमतौर पर भारतीय मंदिरों में होती है। अनेक ऐसे अवशेष मिले हैं जिन पर देवी-देवताओं के चित्र उकेरे गए हैं।
अभी किसी भी आधिकारिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में हिन्दू मंदिर या देवी देवताओं के बारे में कोई ज़िक्र नहीं किया गया है। हमें सब्र से प्रतीक्षा करनी चाहिये। ‘पुरवाई’ का यह कहना नहीं है कि यह मंदिर हिन्दू मंदिर नहीं हो सकता। मगर यह कहना ज़रूरी है कि जब तक सच्चाई ज़ाहिर न हो जाए, तब तक समाचार को समाचार ही बना रहने दिया जाए, किसी एजेन्डे में परिवर्तित न किया जाए।
यह भी सर्वेक्षण रिपोर्टों से ही पता चलेगा कि मुहम्मद साहब ने 1500 साल पहले जिस मूर्ति-पूजा का विरोध शुरू किया, क्या ये वही मंदिर और देवता हैं। 
उस दौर के लोग सिर्फ खेती ही नहीं करते थे। उनमें आपसी टकराव भी होता था… झगड़े और जंग भी होती थी। अवशेषों में समुदायों के बीच जंग होने के भी संकेत मिले हैं। हेरिटेज कमीशन ने इसलिए सर्वे और खुदाई शुरू कराई है ताकि देश के लोगों को उनकी विरासत की जानकारी मिल सके। इसी दौरान जो अवशेष मिले वो अब दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहे हैं। 
कमीशन का कहना है, अभी यहां पर खुदाई और रिसर्च वर्क जारी रहेगा ताकि इतिहास से जुड़ी नई-नई जानकारियां सामने आ सकें। यहां के लोगों को इस तरह विरासत की जानकारी मिल सकेगी।
वैसे तो पाकिस्तान में भी मोहन-जोदड़ों और हड़प्पा के अवशेष मौजूद हैं। मगर वहां उनकी कोई देखभाल नहीं हो पा रही और हज़ारों साल पुरानी सभ्यता की निशानियां आहिस्ता-आहिस्ता नष्ट हो रही हैं। यदि पाकिस्तान सरकार चाहे तो इन अवशेषों को पर्यटन स्थल के रूप में विश्व भर में प्रचारित कर सकती है। हमें पूरा विश्वास है कि सऊदी अरब सरकार खुदाई में पाए गये इन अवशेषों के रख-रखाव की ओर पूरा ध्यान देगी और ये विश्व की सभ्यताओं में एक विशेष दर्जा हासिल करेंगे।
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.

17 टिप्पणी

  1. यज्ञ वेदी का मिलना और जैसी खबर है शिवलिंग के चित्र पात्रों में मिले हैं। अगर यह सत्य नहीं है तो भारतीय मीडिया सच मे अविश्वसनीय है।

  2. ऐसा भी सम्भव है कि 8000 साल पूर्व की इस सभ्यता में कब्रो का मिलना लकड़ी की अनुपलब्धता हो, और यह भी सम्भव है कि सनातनी सभ्यता सम्भवतः वैदिक से पूर्व की सभ्यता वहाँ रही हो?शिलालेखों पर दर्ज बातों के डिकोड होने पर और तथ्य भी सामने आएंगे।

  3. सर आपके लेख के माध्यम से एकदम साफ स्पष्ट होता है कि साहित्य समाज का प्रतिबंब होता है और जो भूमिका आज मीडिया को निभानी चाहिए वो सिर्फ टीआरपी को बनाने में लगी है।‍‌

  4. पुरातत्त्ववेत्ताओ के लिए अच्छा स्थल है। एक बात तो सर्वप्रमाणिक है कि पुरातन काल से ही जीवन का धर्म से संबंध रहा है। ओर इसके जुड़े रहने में ही जीवन की सफलता है।

  5. While presenting the news of an excavation in Saudi Arabia leading to conjectures of the relics having been part of a Hindu temple in your Editorial of today,you have advised caution n heedfulness to the recipients and wait for authentication before coming to any conclusions.
    You have also mentioned Mohenjodaro n Harappa situated in Pakistan now whose excavations may prove to be useful for us.
    A very balanced view as usual of the entire scene.
    Regards.
    Deepak Sharma

  6. तटस्थता आवश्यक है, आपकी बात सत्य है। परन्तु एक विषय विचारणीय है कि किताबी (बाइबिल और क़ुरान) मज़हब के जन्म की जानकारी सभी को है पर एक प्राचीन धर्म (जिसे मैं हिन्दू धर्म नहीं मानव धर्म कहूँगी) का जन्म दिवस शायद ही किसी को ज्ञात हो। एक धर्म जो मनुष्यों ने प्रकृति के साथ संतुलन बना कर जीने के लिए बनाया था, सम्भवतः संपूर्ण पृथ्वी पर था। उसके निशान चाहे हड़प्पा में मिलें, इजिप्ट, मेसोपोटामिया, बेबीलोन या चीन आदि कहीं भी। उनमें अधिकतम बातें समान मिलेंगी, मूर्तियाँ, चित्र और अग्नि की पूजा विशेषतः। यही धर्म, जम्बू द्वीप (जिसकी सीमाएं अज्ञात हैं) में हिन्दू धर्म कहलाया। आज तक किसी भी पुरातत्व खुदाई में मस्जिद या गिरजा नहीं मिला… स्पष्ट है, तब उनका अस्तित्व ही नहीं था।
    नये धर्म मेरे विचार से इस मानव धर्म की antithesis हैं। एक विरोध, जिन्हें उन मानवीय सरोकारों से शिकायत थी, जो प्रकृति के समान्य नियमों के विरुद्ध चलते थे। सूरज पूर्व में उगता है, ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है, पूर्व दिशा की जगह दक्षिण को महत्त्व देना, चित्र बनाना मानव स्वभाव है उसका निषेध कर देना। मूंछें स्वाभाविक रूप से इन्सान से जानवरों तक में रहती हैं, उन्हें छील कर ख़त्म कर देना आदि-आदि। यह धर्म उस प्राचीन धर्म को नकारते और नष्ट करते रहे हैं। उस प्राचीन समय में सभी एक से थे, किसी को बदलने की ज़रूरत नहीं थी, अतः दूसरों को अपने धर्म में बदलने की कोई प्रक्रिया इस धर्म नहीं थी। लेकिन इन नए धर्मों में दूसरों को बदल कर अपने धर्म में लाने की प्रक्रिया हैं, जिनका भीषणता से उपयोग किया जाता रहा है।
    तो जो कुछ भी मिला वह अवश्य ही किताबी मज़हब का अवशेष नहीं, किसका है यह निश्चय होना बाकी है। विचारोत्तेजक संपादकीय के लिए धन्यवाद।

  7. यह तो मानना ही चाहिए कि भारत की सभ्यता सर्वप्राचीन है। अन्य देशों में खुदाई में जो मन्दिरों के अवशेष संकेत देते हैं उससे यह भी विचार पुख़्ता होता है कि भारतीय सभ्यता का क्षेत्र अति व्यापक रहा होगा। फिर भी कुछ विचारधाराएँ इसे अन्तिम सत्य नहीं मानेंगी, क्योंकि निस्संदेह भविष्य में आने वाले परिणामों में सदैव नई सम्भावनाएँ निहित होती हैं।
    मैं आपके इस कथन से सहमत हूँ कि हमें अभी जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। तेल देखें, तेल की धार देखें, तब अन्तिम निर्णय पर पहुँचें।

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