अवधारणा, कारण, देश में घटती बेटियां, वर्तमान वक्त में बेटे और बेटियों का अनुपात, बेटियों की संख्या घटने के दुष्परिणाम और इस ज्वलंत समस्या का  रोकथाम  आदि विंदुओं पर अल्प दृष्टि…

दरअसल बेटी को जन्म लेने से पहले ही मां के गर्भ में मार देना कन्या भ्रूण हत्या है, यह कुकृत्य भारतीय समाज में सदियों से प्रचलित रहा है। यह  घृणित कुकृत्य मानवीय एवम् कानूनी, दोनों दृष्टिकोण से यह एक जघन्य अपराध है।
यह एक सामाजिक अभिशाप भी है। क्योंकि मां के गर्भ में भ्रूण का निर्धारण कर कन्या भ्रूण को जन्म से पहले ही समाप्त कर दिया जाता है। ताकी बेटी जन्म लेने ही न पाए।
मैं कह सकती हूं कि कन्या भ्रूण हत्या सृष्टि का प्रतिनिधित्व करती स्त्री जाति यानी आधी आबादी पर सीधे कुठाराघात है। बालिका शिशु भ्रूण हत्या से माता पिता , बेटी से छुटकारा पाकर , कोई ग्लानि की भी  अनुभूति नहीं  करते बल्कि मानसिक संतुष्टि का अनुभव करते हैं। उन्हें सकून होता है की बेटी होने से उपजती तमाम समस्याओं से छुटकारा पा गये।
कन्या भ्रूण हत्या का पारिवारिक /सामाजिक अपराध बेटियों के प्रति ओछी दोहरी मानसिकता ही है।
प्रसंगवश इस संदर्भ में मैं  भारतीय समाज की  दोहरी मानसिकता की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहती हूं कि भारतीय समाज में सदियों से एक ओर जहां शारदीय या चैत्र नवरात्रों में दैवीय पूजन की परंपरा है जिसमें  कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर कन्या पूजन की परंपरागत पूजा अर्चना का सामाजिक प्राविधान हैं।
एवम् दूसरा पहलू ये कि बहुत से परिवार कन्या भ्रूण हत्या कर कन्याओं से छुटकारा पाने का अपराधिक कृत्य भी करते रहते हैं । इस कुकृत्य से ऐसे लोगों में किसी प्रकार की अपराध बोध या हीनता की अनुभूति नहीं होती है।
गौरतलब है जो परिवार बेटी नहीं चाहते , बेटियों से छुटकारा पाना चाहते हैं , वो कन्या भ्रूण हत्या कर मां के गर्भ में ही कन्याओं को खत्म कर देते हैं सोचते हैं कि जड़ से ही समस्या खत्म हो गई। न बेटी पैदा होगी न कोई समस्या होगी ।
अर्थात न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।
वैसे कन्या भ्रूण हत्या की कई वजहें हैं।
पहला बड़ा कारण दहेज प्रथा – बेटी के विवाह में दहेज देना पड़ता है , और बेटे को दहेज मिलता है। इसलिए बेटी को पराया धन मानकर उपेक्षा पूर्ण तरीके से उसकी परवरिश और शिक्षा दीक्षा में भी किया जाता है।
मां बाप सोचते हैं कि बेटे को किसी दूसरे के घर नहीं जाना है । वह धन उत्पादक है , धन कामयेगा , पर बेटी परिवार पर बोझ समझी जाती है , क्योंकि , उसे तो धन खर्च कर पाल पोष कर, बड़ी कर के  दहेज में धन देकर दूसरे के घर विदा करना है।
 उच्च मध्यम वर्ग में कन्या भ्रूण हत्या का यह बहुत महत्वपूर्ण कारण है। यद्यपि इस दौर में  लोगों की बाटियों के प्रति ये मानसिकता धीरे धीरे ही सही बदल रही है। पर अपेक्षा कृत अभी बहुत कम है।
दूसरा  एक तल्ख हकीकत भरा कारण दोहरी मानसिकता है कि,….
बेटियों को परिवार की इज्ज़त से जोड़ कर देखा जाता है। बेटी के साथ कुछ हो गया तो घर , परिवार की इज्जत चली जायेगी। बेटा घर की शान है। वो कुछ भी करे कोई बात नहीं।
इसलिए  बेटी के अकेले घर से बाहर जाने पर उसकी सुरक्षा को लेकर मां बाप निश्चित रूप से चिंतित रहते हैं। यूं बेटी को जन्म से पहले खत्म कर देंगे तो कोई चिंता नहीं।
वर्तमान , तथाकथित सभ्य दौर में , पुरूष वर्ग में घटते चरित्रानुशासन एवम् संस्कारहीन वातावरण की वजह से निसंदेह देश में हर तरफ़ दरिंदगी , हैवानियत बढ़ गई है।
घर से बाहर बेटियों के लिए , यकीनन भरोसेमंद विश्वसनीय वातावरण नहीं दिखता। कन्या भ्रूण हत्या करके कुछ लोग जड़ से ही इस अप्रत्याशित समस्या से निजात पाना अच्छा समझते हैं ।
यह सच्चाई है कि घर से बाहर निकली बेटी जब तक सही सलामत घर नहीं पहुंच जाती तब तक मां बाप की चिंता खत्म नहीं होती। इसलिए उच्च मध्यम वर्गीय परिवार में मां बाप  लडकियों को दूर पढ़ने शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेजने में हिचकिचाते हैं।
वे बाहर कही दूर शहर भेजने से पहले हजार बार सोचते हैं। इस कारण भी कुछ पढ़े लिखे लोग भी कन्या भ्रूण हत्या की ओर प्रवृत्त होते हैं , ताकि बेटी अपने घर में पैदा ही ना हो।
तीसरा समसामयिक कारण है कि ,… वर्तमान वक्त में समसामयिक परिस्थितियों में बेटियों को  कुछ जिहादी तत्वों से भी खतरा है।
कई प्रकार से प्रलोभन दे कर पहले प्रेम पास में फांसते हैं। फिर शादी का प्रलोभन देकर , अपने चंगुल में लेकर उसे बहला फुसला कर भगा ले जाते हैं । कुछ दिन साथ रखकर मन भर जाने पर किसी वेश्यालय में बेच देते हैं।
कभी कभी तो सिरफिरे एकतरफा प्यार करते हैं लड़की के सहमत ना होने पर उसे जलाकर या कैसे भी जन से मार देते हैं ।
इसका दो ताजा उदाहरण , झारखंड में  दुमका जिले में लड़के द्वारा एक तरफा प्यार को कबूल न करने के कारण , अंकिता नाम की लड़की को  पेट्रोल छिड़ककर जान से मार दिया गया।
दूसरी घटना कल ही देश की राजधानी में दक्षिणी दिल्ली के इलाके में लड़की को तरफा प्यार में गोली मार दिया गया। कहीं एक तरफा प्यार न कुबूल करने पर लड़की पर तेजाब छिड़क देते हैं। यह इस तरह लड़कियों की हत्या से मानवता भी शर्मसार है। ऐसी स्थिति में माता पिता लड़की पैदा होने से घबराते हैं। जो कन्या भ्रूण हत्या बढ़ोतरी का एक अहम कारक है।
 दैनिक समाचार पत्रों में, प्रकाशित बेटियों के साथ दुष्कर्म की ख़बरें पढ़ने को मिलती हैं। इन कारणों से मां पिता बेटियों की आबरू की चिंता को लेकर सशंकित रहते हैं। सोशल मीडिया समाचार चैनलों पर भी अक्सर किसी लड़की के साथ दरिंदगी दुष्कर्म की ख़बर सुनकर मां बाप का चिंतित होना लाज़िमी है।
 समाज में इंसान की खोल में छुपे भेड़िए ,दरिंदे कभी-कभी हवस का शिकार बनाने के बाद बेटियों की हत्या कर देते हैं । कभी कहीं इरादे के तहत करके उससे विवाह करने हेतु धर्म परिवर्तित कराते हैं। बेटी की सहमति न होने पर हत्या कर देते हैं।
 ऐसे तमाम खतरों को देखते हुए कन्या भ्रूण हत्या की तरफ़ कुछ लोगों का झुकाव बढ़ता है। सोचते हैं बेटी पैदा ही ना हो। सब झंझट जड़ से ही समाप्त हो जाय।
एक अन्य महत्व पूर्ण कारण है कि ,…..कहीं कहीं परिवार में बेटे की चाहत में  तीन चार बेटियां पैदा हो जाती हैं ,      तब अगले गर्भ का  लिंग जांच कराकर मां के गर्भ में  बेटी होने पर ,  डाक्टर से मिलीभगत से कन्या भ्रूण हत्या करा देते हैं।
बेटे से ही वंश वृद्धि होती है की समाज में व्याप्त अवधारणा के तहत ,      पुत्र रत्न पैदा होने तक परिवार द्वारा , गर्भवती के गर्भ में पलते भ्रूण का परिक्षण कराकर ,गर्भ में कन्या होने पर ,  कन्या भ्रूण हत्या का कुकृत्य होता है।
कई बार गर्भवती मां के सहमति के बगैर यह अपराध कराया जाता है। कभी कभी तो गर्भवती मां को धोखे में भी रख कर परिवार वाले कन्या भ्रूण की हत्या करा देते हैं।
कन्या भ्रूण हत्या का एक यह भी प्रमुख वजह है कि एक प्राचीन दृढ़ सामाजिक विश्वास है कि  बेटों से ही वंश वृद्धि होती है, बेटियों से नहीं। इसलिए लोग बेटियों को  पराया धन कहते हैं । क्योंकि, परंपरानुसार विवाह पश्चात बेटी पराए घर चली जाती हैं। बेटी  के विवाह में दहेज में धन देना है , इसलिए बेटियों को परिवार पर बोझ समझा जाता है। ऐसी तमाम वजहें हैं , जिससे कन्या भ्रूण हत्या चोरी छुपे हो रहा है।
देश में घटती बेटियां
कन्या भ्रूण हत्या के परिणामस्वरुप चिंतनीय पहलू यह है कि भारतीय समाज में बेटों के अनुपात में बेटियों की संख्या घट रही है। गौर तलब है कि ,…..
“केवल अशिक्षित निम्न मध्यम वर्ग ही नहीं , उच्च  वर्ग के शिक्षित समाज में भी कुछ परिवारों का दहेज़ व अन्य कारणों से लुके छुपे तौर पर कन्या भ्रूण हत्या की तरफ झुकाव है।
क्योंकि वर्तमान समय में हमारे देश के समृद्ध राज्यों दिल्ली, गुजरात , हरियाणा , पंजाब आदि राज्यों में लिंगानुपात सबसे कम है।
वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, 1000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या समृद्ध राज्य गुजरात में 883 हरियाणा में 819 पंजाब में 798 पाया गया था ।  विगत 40 वर्षों से 7 वर्ष से कम बच्चों में लगातार लिंगानुपात की गिरावट जारी है। देश में बेटियों की संख्या लगातार घट रही है।
देश में 1981 की जनगणना में 1000 बालकों पर 962 लड़कियों का अनुपात था लेकिन 2001 की जनगणना में लिंगानुपात घटकर 1000 बेटों पर 927 बेटियों का हो गया।
भ्रूण हत्या की कुकृत्य की गंभीरता को संज्ञान में लेकर वर्तमान सरकार भी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना लागू किया है। गर्भ की चिकित्सीय समाप्ति अधिनियम 1971  एम० पी० टी०  ऐक्ट जो एक अप्रैल 1972 से लागू हुआ।
भारत में वर्ष 2002 में पारित सन 1975 का अधिनियम का संशोधित धारा 164 के दुरुपयोग को रोकने के लिए  ,    गर्भ में लिंग निर्धारण तकनीक का दुरुपयोग रोकने के लिए नियमन एवं बचाव अधिनियम 1994 पारित किया गया।
जिसे 2003 में संशोधित कर और कड़ा बनाया गया ताकि गर्भ का पूर्व लिंग चयन तकनीक को पूर्णता प्रतिबंधित किया जा सके।
इसके लिए समाज हित में बुद्धिजीवी वर्ग को संकल्पित होना होगा कि …. लिंग चयन पश्चात कन्या भ्रूण का प्रसव पूर्व गर्भपात कराने को पूर्णतः रोकना है। क्योंकि,  बेटियों की संख्या में कमी आने का दुष्परिणाम भविष्य में घर परिवार , समाज , राष्ट्र ,  यानी हम सभी देश वासियों को भुगतना पड़ेगा।
कन्या भ्रूण हत्या दहेज हत्या आदि कारण से देश में घटती बेटियों की संख्या भयंकर परिणाम देने वाला है। सोचनीय यह है कि , यदि लड़कियां नहीं होगी तो लड़कों के विवाह कैसे होंगे ?
फलस्वरूप सामाजिक वैवाहिक व्यवस्था बिगड़ कर छिन्न भिन्न हो जायेगी। विभिन्न प्रकार के यौन अपराध ,  हैवानियत    और दरिंदगी के मामले  बढ़ेंगे , यह मानव समाज के लिए नितांत अशुभ संकेत है।
कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के उपाय
सबसे पहले समाज में दहेज रूपी कुरीति का दहेज अधिनियम को कड़ाई से लागू करके समाप्त करना चाहिए। उच्च पदस्थ शिक्षा प्राप्त लड़के , लड़कियों को इस विषय में कड़े कदम उठा कर स्वयं संकल्पित हो कि ,… ना दहेज लेंगे न देंगे। ताकि दहेज के लिए किये जा रहे कन्या भ्रूण हत्या कदापि न हो।
हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए पी० सी०।  ऐंड  पी०एन०डी०टी० एक्ट के अंतर्गत केंद्रीय निगरानी बोर्ड का गठन किया गया है । जिसके तहत कन्या भ्रूण हत्या करने / कराने वालों पर कार्रवाई करने का प्रावधान है।
जिसके तहत सम्बन्धित चिकित्सकों पर कार्रवाई कर कन्या भ्रूण हत्या रोकने की सख़्त ज़रूरत है।
गौर तलब है,     विधिक कार्यवाही हेतु      पी० सी०   ऐंड  पी०एन०डी०टी०     अधिनियम की  धारा 24 के तहत चिकित्सक द्वारा….     गर्भवती को या उसके परिवार वालों को गर्भ का जन्म पूर्व लिंग परीक्षण करके बताना दंडनीय अपराध है। इसमें चिकित्सक को अपराधिक सजा के लिए कड़ा प्रविधान है।
पारिवारिक पहलू यह है कि , माता पिता  बेटे बेटियों की , बगैर भेद भाव के  दोनों का सामान्य रूप से   परवरिश , शिक्षा-दीक्षा , दोनों को अच्छे संस्कार अवश्य दें , बेटे की तरह बेटी को भी पढ़ा लिखा कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाये।
सरकार द्वारा संचालित बेटियों के बचाव ,विकास हेतु प्रदत्त योजनाओं , सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए जागरण अभियान द्वारा समाज को जागृत करना बहुत ज़रुरी है।
इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए , गाइनो चिकित्सकों पर लगातार निगरानी और नियंत्रण रखकर इस पर पूर्णत: रोक लगाना अत्यंत आवश्यक है।
ऐसा मामला संज्ञान में आने पर उन पर नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जानी चहिए। ताकि चिकित्सक कड़ी कार्रवाई के भय से , इरादे के तहत, आर्थिक लाभ के लालच में, कन्या भ्रूण का पहचान कर गर्भपात कदापि न करें।
कन्या भ्रूण हत्या के कुकृत्त्य पर अंकुश लगाने के लिए , बालिकाओं की बेहतरी के लिए , केंद्र व राज सरकारों द्वारा तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं ,…….. जैसे केंद्र सरकार की योजना
“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” गर्भ से ही बच्चियों की सुरक्षा हो सके।
एवम् प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना , बालिका समृद्धि योजना ,
सीबीएसई उड़ान योजना, धन लक्ष्मी योजना, लाडली योजना, प्रारम्भिक शिक्षा से माध्यमिक शिक्षा तक लड़कियों के लिए प्रोत्साहन योजना से बालिकाएं लाभान्वित होती हैं, अतः उक्त योजनाओं से बेटियों लाभान्वित करना चाहिए । इनके दूरगामी परिणामों से भविष्य में बेटियों को बचा कर लिंगानुपात सही किया जाना सम्भव है।
विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मानों से नवाजी़ गयी वरिष्ठ कवयित्री , लेखिका , कथाकार , समीक्षक , आर्टिकल लेखिका। आकाशवाणी व दूरदर्शन गोरखपुर , लखनऊ एवं दिल्ली में काव्य पाठ , परिचर्चा में सहभागिता। सामाजिक मुद्दे व महिला एवं बाल विकास के मुद्दों पर वार्ता, कविताएं व कहानियां एवं आलेख, देश विदेश के विभिन्न पत्रिकाओं एवं अखबारों में निरन्तर प्रकाशित। संपर्क - tarasinghcdpo@gmail.com

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