भारत का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। कभी सोने की चिड़िया से नवाजा जाने वाला भारत एक बार फिर अपने समृद्ध सांस्कृतिक व आर्थिक विरासत को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से ओतप्रोत भारत ने सदैव हर राष्ट्र की उन्नति की कामना करते हुए स्वयं भी विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर है।
गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करती भारतीय शिक्षा प्रणाली नि:संदेह आज वैज्ञानिक स्तर पर विश्व में सीना ताने खड़ा है और यह साबित कर रहा है कि शैक्षणिक स्तर पर भारत किसी मायने में कमतर नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में देश की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आज डंका बज रहा है। हर हाथ को कलम पकड़ाने और हर विद्यार्थी को देश की उन्नति में भागीदार बनाने की पहल से पूरे देश में आज शिक्षा के क्षेत्र में ढांचागत विकास बहुत तेजी से हो रहा है।
वर्तमान दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक पाने और उसके आधार पर नौकरी तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि विद्यार्थी का चहुंमुखी विकास उसकी प्रतिभा को चार चांद लगा रहा है। भारत में प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक की कार्यप्रणाली में ढांचागत सुधार का क्रम जारी है। पिछले एक दशक से अधिक समय से जारी शैक्षणिक सुधार का आलम यह है कि आज भारत के युवा और छात्र वैश्विक स्तर पर अपने को आसानी से स्थापित करने में सक्षम हैं।
अंतरिक्ष, रक्षा, उद्योग, विज्ञान, चिकित्सा, शिक्षा, कृषि और संसाधन के क्षेत्र में भारत आज आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि वैश्विक चुनौतियां भी बहुत है। बावजूद इसके भारत ऐसी समस्याओं पर आसानी से काम कर चुनौतियों को दरकिनार कर अपने लिए राह बनाते दिख रहा है। वैश्विक स्तर पर आज अमेरिका जहां विश्व के लगभग सभी देशों पर टैरिफ लगा चुका है और भारत पर तो 50 फीसदी टैरिफ चस्पा कर चुका है, ऐसे में भी भारत कमजोर पड़ने के बजाए अमेरिका के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। देश ने यह साबित कर दिया है कि ऐसे प्रतिबंधों और कार्रवाइयों से भारत के मजबूत मनोबल को तोड़ा नहीं जा सकता बल्कि ऐसे वक्त में भारत और एकजुट होकर मुकाबला करता है और ऐसी स्थितियों को परास्त करने की ताकत भी रखता है।
आपरेशन सिंदूर में जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने शौर्य का प्रदर्शन किया और पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया वह भी देश के स्वर्णिम इतिहास की एक कड़ी की तरह जुड़ गया है। पूरे विश्व ने देखा कि किस तरह पाकिस्तान युद्ध रुकवाने के लिए लगातार अमेरिका से मदद की गुहार लगा रहा था और अमेरिका भारत से बातचीत कर उसकी मदद कर रहा था। ऐसे हालातों से निपटना भी टेढ़ी खीर थी लेकिन भारत ने सम्मानपूर्वक ऐसे हालात का सामना किया।
आज टैरिफ का विषय बेहद चर्चा का विषय बना हुआ है और भारत पर थोपे गए 50 फीसदी टैरिफ को रूस भी अनर्गल और गलत बता रहा है। अमेरिका जिस तरह की भाषा का प्रयोग भारत के खिलाफ करते दिखा उसका भी वैश्विक स्तर पर विरोध हुआ। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने तो भारत को आर्थिक महाशक्ति बताते हुए अमेरिका को भारत से ऐसे बात नहीं करने की सलाह तक दे डाली। उन्होंने यह कहकर ट्रंप को कूटनीतिक शिष्टाचार भी सिखा दिया।
वहीं देश आज जिस तरह से अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है तथा इससे हीरा सहित चमड़ा और अन्य उद्योगों को क्षति पहुंच रही है उससे निपटने के लिए भी पीएम मोदी ने नई राह तलाश ली। उनके निर्देश पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार रात जीएसटी में भारी सुधार का ऐलान करते हुए आगामी दुर्गापूजा के पहले दिन 22 सितंबर से ही 12 और 28 फीसदी के स्लैब को खत्म कर दिया। देश में आर्थिक सुधार की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
इधर भारत की पारदर्शी नीतियों को देखते हुए कभी दुश्मन बना चीन भी आज भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने लगा है। वहीं चीन, रूस और भारत की तिकड़ी से अमेरिका के पसीने छूटने शुरू हो गए हैं। पिछले दिनों जापान और चीन की यात्राओं के दौरान पीएम मोदी का जिस तरह से स्वागत हुआ और उनकी बातों को तरजीह दी गई वह अपने आप में अभूतपूर्व है। मौजूदा वैश्विक हालात के लिहाज से भी यह मुलाकात खासा अहम थी।
दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति के कारण वैश्विक आर्थिक समीकरण तेजी से बदले हैं। इसका असर भारत और अमेरिका के संबंध पर भी पड़ा है। ऐसे में, पूरी दुनिया की नजर इस पर थी कि भारत और चीन जैसी दो बड़ी आर्थिक ताकतें अपने विवादों को किनारे करके किस गर्मजोशी के साथ बातचीत की मेज पर बैठती हैं। मोदी और जिनपिंग ने निराश नहीं किया। बैठक के बाद भारत और चीन की तरफ से जो अलग-अलग बयान आए हैं, उनसे यही लग रहा है कि संबंधों का नया दौर अब शुरू होने वाला है। वहीं ऐसी कूटनीतिक जीत बताती है कि देश हर बाधाओं को पार करते हए उन्नति के मार्ग पर अग्रसर है।
अब भारत के बौदि्धक विकास की बात करें तो आज भारत आसमान से जमीन तक अपनी जरूरतें स्वयं पूरी करने में सक्षम है। अंतरिक्ष में पिछले दिनों शुभांशु शुक्ला के रिसर्च से भारत के सामने कई नई राहें खुल गई हैं। शीघ्र ही भारत अंतरिक्ष में अपना अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में कार्यरत है।
वहीं दूसरी ओर जापान और चीन की तर्ज पर भारत में जल्द ही बुलेट ट्रेन की शुरुआत होने वाली है। वहीं एक और बेहद अहम बात यह कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां चिप निर्माण के क्षेत्र में कुछ साधन संपन्न देश की ही बादशाहत है वहां भारत ने इसे कड़ी चुनौती देते हुए देश में निर्मित पहला चिप विकसित कर लिया है।
पिछले 2 सितंबर, मंगलवार को ही एक समारोह के दौरान सूचना प्रसारण व रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश में निर्मित पहल चिप को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सौंपा। यह महज भारत में निर्मित (32 बिट माइक्रोप्रोसेसर) सबसे छोटी चिप ही नहीं है बल्कि दुनिया में सबसे बड़े बदलाव का कारण भी बनेगी। इससे गदगद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में सेमीकॉन इंडिया-2025 को संबोधित करते हुए कहा कि ‘इस क्षेत्र में हमारी यात्रा देरी से शुरू हुई लेकिन अब कोई ताकत हमें रोक नहीं सकती। भारत बैकएंड से निकलकर पूर्ण रूप से सेमीकंडक्टर राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है।’ तो पूरा देश गर्व से भर उठा।
अंतरिक्ष में झंडे गाड़ने के बाद नैनो चिप की दिशा में उल्लेखनीय काम ने देश को समय से बहुत आगे के पायदान पर खड़ा कर दिया है। उल्लेखनीय है नैनो चिप आज डिजिटल डायमंड सरीखा है। आपको याद होगा कि पिछली सदी में दुनिया का भाग्य तेल के कुंओं से तय होता था लेकिन 21वीं सदी में यह शक्ति आज एक छोटी सी चिप में सिमट गई है। असीम ताकत से परिपूर्ण यह चिप वास्तव में भारत के साथ साथ दुनिया की प्रगति की दिशा देने में सक्षम है।
यह भारत की बड़ी जीत है। वहीं ऐसे रिसर्च और उसके बेहतरीन परिणाम यह दर्शाते हैं कि देश में डिजाइन, विनिर्माण, पैकेजिंग और हाईटेक डिवाइस के निर्माण को आज बेहतर माहौल है। एक सशक्त नेतृत्व है जो इन सब चीजों को बढ़ावा दे रहा है। शायद आज देश की उन्नति का आधार बेहतर माहौल ही है। क्योंकि आजादी के 79वें वर्ष पर भारत का यह कदम आने वाले कई दशकों तक प्रेरणा का बड़ा उत्प्रेरक बना रहेगा।
प्रो. अखिलेश मिश्र
अध्यक्ष,
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एन.आई.ओ.एस.)
अच्छा और संतुलित आलेख ,जो सहज सरस और औचित्यपूर्ण तरीके से हाल की उपलब्धियों को तटस्थ भाव से प्रस्तुत करता है।
लेखक को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई।