Tuesday, May 28, 2024
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सूर्य कांत शर्मा का लेख – बिशन सिंह बेदी: फिरकी के जादूगर

क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम का बढ़िया प्रदर्शन जारी है। अभी बुरी ख़बर आई कि फिरकी के जादूगर यानी महान स्पिन गेंदबाज सरदार बिशन सिंह बेदी नहीं रहे। 77 वर्षीय यह स्पिन चौकड़ी का मजबूत हिस्सा लंबे समय से बीमार चल रहा था। 23 अक्टूबर सोमवार को उन्होंने अंतिम सांस ली और यह महान क्रिकेटर अपनी अनंत यात्रा पर चला गयाऔर पीछे छोड़ गया, शानदार और जानदार क्रिकेट कैरियर और जीवन की सुंदर सार्थक सकारात्मक गाथा; जिस से क्रिकेट खेल और युवा पीढ़ियां प्रेरणा लेती रहेंगी।
बिशन सिंह बेदी अविभाजित भारत के पंजाब सूबे के अमृतसर में पच्चीस सितंबर 1946 को जन्मे थे। बिशन सिंह बेदी एक साफ़ दिल, निडर और सच्चे पक्के व्यक्तित्व के मालिक थे। उनकी कथनी और करनी में अंतर उसी प्रकार ढूंढना मुश्किल हो जाता था, जितना की उनकी फ्लाइट यानी लहराती गेंदों को समझना। बिशन सिंह बेदी के नाम एक दिवसीय क्रिकेट विश्व कप सन 1975 में सबसे किफायती गेंदबाजी का रिकॉर्ड दर्ज है।उन दिनों साठ ओवर्स का मैच हुआ करता था और ऐसे ही एक मैच जो कि हेडिंग्ले में पूर्वी अफ्रीकी टीम के विरुद्ध खेला गया था और उसमें उनकी गेंदबाजी का विश्लेषण था 12-8-06-01  यानी बारह ओवर आठ मेडन/छः रन और एक विकेट।
इस महान स्लो ऑर्थोडॉक्स लेफ्ट आर्म स्पिन गेंदबाज़ ने अपना कैरियर उस वक्त की धाकड़ टीम वेस्ट इंडीज के साथ हुए टेस्ट मैच से शुरु किया जोकि 31 दिसंबर 1966 को खेला गया था। वे भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम में 1966 से 1979 तक रहे।वे उस विश्व प्रसिद्ध स्पिन चौकड़ी का मजबूत हिस्सा थे उनके अतिरिक्त इरापल्ली प्रसन्ना, बी एस चंद्रशेखर और वेंकट राघवन इस चौकड़ी का हिस्सा थे। समूचे विश्व क्रिकेट में कभी यह स्पिन चौकड़ी एक धारदार आक्रमण होती थी और बेदी साहब की लहराती गेंदों पर रन बनाना बेहद मुश्किल और संघर्षपूर्ण हुआ करता था। इस लेफ्ट आर्म स्पिनर ने अपने दम पर अनेकों मैच भारतीय टीम को जिताए। एक दिवसीय क्रिकेट मैच में वे 13 जुलाई 1974 को इंग्लैंड के विरुद्ध आरंभ किया और 16जून 1979 को श्रीलंका के विरुद्ध खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 28.71 रन की औसत कुल 266 विकेट लिए जो उस समय के खेल में बहुत बड़ी बात थी। उनके नाम एक बार एक मैच में दस विकेट और पांच विकेट चौदह बार लिए उनका श्रेष्ठ बॉलिंग रिकॉर्ड 98 रन देकर 7 विकेट लेने का है। बैटिंग की बात करें तो उनके नाम एक अर्धशतक है। घरेलू क्रिकेट में वे सन 1961 से 1967तक नॉर्दन पंजाब,1968 से1981 तक दिल्ली और 1972- 1977 तक नॉर्थेंपटनशर के लिए खेला करते थे। बेदी ने घरेलू क्रिकेट में 1560 विकेट अपने नाम किए थे।
वे स्पिन गेंदबाजी इतने सहज ढंग से करते थे कि वे बिना थके पूरे दिन गेंदबाजी कर सकते थे।गेंद को हवा में कितना लहराना है कितनी गति तेज या धीमी यह सब इस जादूगर के लिए बाएं हाथ का खेल था। उनकी बॉलिंग की विशेषता यह थी कि उनके एक ओवर की छः की छः गेंदे एक दूसरे से अलग किस्म की होती थीं।
उनके नाम रिकॉर्डों की एक लंबी सूची है। वेस्टइंडीज़ जैसी मजबूत और घातक गेंदबाजी और उतने ही आक्रामक बल्लेबाजों से सजी टीम ने पोर्ट ऑफ स्पेन में सन 1976 में  भारतीय टीम के सामने चौथी पारी में 406 रन का रिकॉर्ड रन बनाने की चुनौती पेश कीथी।  बिशन सिंह बेदी ने अपनी टीम के सभी खिलाड़ियों में गजब का जोश भर के, वे 406 रन बना डाले और भारतीय क्रिकेट में एक सुनहरा इतिहास रच दिया। उस समय आकाशवाणी के प्रसिद्ध कॉमेंटेटर स्वर्गीय जसदेव सिंह जी की आवाज भी भावनाओं से भर्रा गई थी। ऐसा था बिशन सिंह बेदी की कप्तानी का जादू। बिशन सिंह बेदी ने कुल 22 मैच में बतौर कप्तान भारतीय टीम के खेले थे।
बिशन बेदी उसूलों के इंसान थे वे सच्चाई के लिए किसी भी हद तक लड़ जाते थे। उनकी इसी सच्चाई की एक बानगी देखिए – साहीवाल  में पाकिस्तान की टीम से मैच चल रहा था और 23 गेंद में 14 रन की दरकार थी और आठ विकेट भारतीय टीम के हाथ में थे। लेकिन बिशन सिंह बेदी जी ने विरोध में यह मैच छोड़ दिया और पाकिस्तान को विजेता घोषित कर दिया गया था।
किस्सा कुछ यूं था कि सरफराज़ नवाज़ के चार लगातार बाउंसर उस वक्त के पाकिस्तानी अंपायरों द्वारा नकारे नहीं गए, जिसमें से एक बाउंसर वाइड भी था। उन दिनों में न्यूट्रल यानी तटस्थ अंपायर का प्रावधान नहीं था। बस बिशन सिंह बेदी को यह बात बेहद नागवार गुजरी और उन्होंने विरोध में अपने दोनों बल्लेबाजों को वापस बुला लिया और मैच पाकिस्तान के नाम में जीत में दर्ज हो गया। एक और वाकया इंग्लैंड क्रिकेट टीम के माध्यम तेज गति के गेंदबाज जॉनी लीवर का अपनी गेंदबाजी में वैसलीन लगा कर भारतीय विकेट लेने का था। यह प्रकरण काफी गहराया था और इंग्लैंड क्रिकेट की प्रतिष्ठा धूमिल हुई थी।
बिशन सिंह बेदी अपने उसूलों और सच्ची पक्की बातों के समर्थन में किसी भी हद तक जा सकते थे। खिलाड़ियों के हक के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बी सी सी आई के विरुद्ध वे औचित्यपूर्ण ढंग से मुखरित हुआ करते थे। यह महान स्पिनर भारतीय क्रिकेट में नैतिकता स्थापित करने हेतु संघर्ष रत रहे।आजकल या उस दौर में भी पैसे की अहमियत रही,परंतु यह महान खिलाड़ी कभी भी धन से अतिप्रभावित नहीं हुआ, चाहे अफगानिस्तान के खिलाड़ियों या न्यूजीलैंड के क्रिकेटर्स को स्पिन बोलिंग की कोचिंग के प्रस्ताव आए और बेदी साहब ने बिना फीस लिए कोचिंग की हामी भर दी थी।
किफायती गेंदबाजी में वेस्ट इंडीज के महान स्पिनर लांस गिब्स के बाद सबसे बिशन सिंह बेदी सबसे किफायती बॉलर रहे। सन 1970 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। सन 2004 में क्रिकेट खेल में उल्लेखनीय योगदान हेतु सी के नायडू लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया था।
बिशन सिंह बेदी टेस्ट क्रिकेट और वनडे क्रिकेट की टीम से संन्यास लेने के बाद कोचिंग में व्यस्त रहे। वह राष्ट्रीय चयनकर्ता के तौर पर एक से एक बेहतरीन स्पिन गेंदबाज उन्होंने भारतीय क्रिकेट को दिए जिनमें मनिंदर सिंह और मुरली कार्तिक के नाम शामिल हैं।
उनके शोकाकुल परिवार में उनकी पत्नी अंजू, बेटा अंगद बेदी और  पुत्रवधू नेहा धूपिया हैं। बिशन सिंह बेदी के बच्चे नेहा बेदी,गावस इंदर बेदी, गिलिंदर बेदी और अंगद बेदी हैं। अंगद एक पूर्व मॉडल और एक्टर है और नेहा धूपिया जानी मानी बॉलीवुड अभिनेत्री हैं। अंगद बेदी और बिशन सिंह बेदी एक फिल्म ‘घूमर’ में एक साथ नज]र आए थे।
आज क्रिकेट परिदृश्य में पटका पहन कर वो एकलव्य और अर्जुन सा कोई खिलाड़ी दिखाई नहीं देता है।परंतु बिशन सिंह बेदी एक नायाब क्रिकेटर और बेहतरीन इंसान के तौर पर युगों-युगों तक वैसे ही याद किए जाएंगे, जैसा कि क्रिकेट विस्डेन में उनके बारे में लिखा है – ‘धीमी गति का बेहतरीन खिलाड़ी’।
सूर्य कांत शर्मा
संपर्क – suryakant_sharma03@yahoo.co.in
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