Wednesday, February 11, 2026
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संपादकीय – साइबर अपराध और कृत्रिम बौद्धिकता

जिस घटना की हम बात कर रहे हैं, उसमें एक फ़्रांसीसी महिला को पहले तो यह यक़ीन दिला दिया गया कि उसे ब्रैड पिट्ट के यहां से फ़ोन रहे हैं और ब्रैड पिट्ट स्वयं उससे बात कर रहे हैं। महिला को यकीन हो गया कि उन दोनों के बीच प्रेम जैसा कुछ चल रहा है। यूरोप की भाषा में दोनोंडेटिंगकर रहे थे।उस नासमझ महिला से लगभग आठ लाख यूरो यानी कि सात करोड़ बारह लाख रुपये की ठगी कर ली गई। और उस महिला का ना केवल विवाह टूट गया, वह बेचारी सड़क पर गई। 

आजकल भारत में जब किसी नंबर पर कॉल करते हैं तो रिंग-टोन बजने से पहले एक चेतावनी सुनाई देती है – “सावधान! अगर आपको अनजाने नंबरों से सिम बंद होने, बिजली कटने, के. वाई. सी. अपडेट करने या सगे संबंधियों के बीमार या गिरफ़्तार होने के फ़ोन कॉल आते हैं तो कोई जल्दबाज़ी ना दिखाएं। ये कॉलर साइबर अपराधी हो सकते हैं। इनकी रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर हेल्प-लाइन नंबर 1930 पर तुरंत करें। गृह मंत्रालय द्वारा जारी।” 
पहले पहल तो मुझे भी समझ नहीं आ रहा था कि बार-बार यह संदेश क्यों सुनाया जाता है। मगर जिस प्रकार के साइबर अपराध सुनाई और दिखाई दे रहे थे, इस प्रकार की चेतावनी देना आवश्यक सा हो गया था। भारत के लगभग हर शहर में ऐसे गुट पकड़े जाते रहे हैं जो कभी आपका बैंक बन कर आपको ठगते तो कभी किसी लॉटरी का टिकट बन कर आपको लूट लेते। वे इतनी सफ़ाई से आपको विश्वास दिलवा लेते कि वे जो भी झूठ आपके साथ बोल रहे हैं वही सच है। आप इस झांसे में आ जाते हैं कि घर बैठे कमाई करें या पैसे डबल कीजिये।  

जब से आर्टीफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी कि कृत्रिम बौद्धिकता साइबर अपराध के साथ जुड़ गई है, तब से हालात और अधिक ख़तरनाक होते जा रहे हैं। यह एक ऐसा औज़ार है जो साइबर क्राइम को और अधिक ख़तरनाक बना देता है। अभी हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कृत्रिम बौद्धिकता का इस्तेमाल कर फ़्रांस की एक महिला को ऐसा बेवक़ूफ़ बनाया कि वह अपना सब कुछ गंवा कर सड़क पर आ खड़ी हुई है। यह घटना किसी भी फ़िल्म स्क्रिप्ट से कम नहीं है। ध्यान देने लायक बात यह है कि इस साइबर क्राइम में हॉलीवुड के बड़े सितारे ब्रैड पिट्ट के नाम का इस्तेमाल किया गया। 
पुरवाई के पाठकों को साइबर क्राइम की इस घटना पर अच्छी तरह ध्यान केंद्रित करना होगा क्योंकि यह घटना किसी के साथ भी घट सकती है। आजकल आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस का इस कदर दुरुपयोग हो रहा है कि कोई भी इन्सान इसके लपेटे में आ सकता है। कृत्रिम बौद्धिकता के सहारे नरेन्द्र मोदी और महात्मा गांधी को अंग्रेज़ी धुन पर थिरकते हुए दिखाया जा रहा है। राहुल गांधी सड़कों पर गोविन्दा के गीतों पर डांस कर रहे हैं। भारत का प्रधानमंत्री इटली की प्रधानमंत्री को होंठों पर किस कर रहा है। डॉनल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पूतिन तरह-तरह के डांस कर रहे हैं। कोई भी मासूम इन्सान इन्हें सच मान सकता है। 
सोचिये आपका अपना कोई सगा एक वीडियो में आपसे कह रहा है कि मुझे किसी गैंग ने अगवा कर लिया है। आपको उनके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने होंगे, तभी ये लोग मुझे छेड़ेंगे। सोचिये बंदा आपके घर का… उसकी आवाज़ पूरी तरह से पहचानी हुई… भला कौन ना इस जाल में फंस जाएगा। और यह भी तो संभव है कि किसी भी पत्नी को उसके पति की ऐसी भ्रामक फ़ोटो भेजी जाए जिसमें वह किसी अन्य महिला के साथ सेक्स कर रहा है, तो भला कौन सी ऐसी पत्नी या प्रेमिका है जो इस झांसे में नहीं फंस जाएगी। इसलिये आप सबसे यह गुज़ारिश है कि आप ब्रैड पिट्ट वाली घटना को ध्यान से पढ़िये और समझिये। और यह याद रखिये कि अभी कृत्रिम बौद्धिकता का केवल शुरूआती दौर है। जैसे-जैसे समय बीतेगा यह तकनीक बेहतर से बेहतर होती जाएगी और किसी के लिये शक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ेगी। 
जिस घटना की हम बात कर रहे हैं, उसमें एक फ़्रांसीसी महिला को पहले तो यह यक़ीन दिला दिया गया कि उसे ब्रैड पिट्ट के यहां से फ़ोन आ रहे हैं और ब्रैड पिट्ट स्वयं उससे बात कर रहे हैं। महिला को यकीन हो गया कि उन दोनों के बीच प्रेम जैसा कुछ चल रहा है। यूरोप की भाषा में दोनों ‘डेटिंग’ कर रहे थे। यह कुछ ऐसा ही है जैसे भारत की किसी युवती को अहसास दिला दिया जाए कि फ़ोन पर हृतिक रोशन या रणबीर कपूर उससे रोमांस कर रहे हैं! ज़ाहिर है कि वह युवती तो सातवें आसमान पर तैरने लगी कि एक विश्व-विख्यात हस्ती उसके साथ रोमांस कर रही है और प्रेम की बातें चल रही हैं। 
अब कृत्रिम बौद्धिकता का नया इस्तेमाल करते हुए ब्रैड पिट्ट की कुछ ऐसी तस्वीरें तैयार की गईं जिनमें वह अस्पताल में भरती किया हुआ कोई मरीज़ जैसा लगे। उसने अस्पताल के कपड़े पहन रखे थे और माहौल कुछ ऐसा बनाया गया था कि ब्रैड पिट्ट कैंसर का मरीज़ लगे। फ़्रांसिसी महिला, जिसका नाम ऐन बताया जा रहा है, तब तक ब्रैड पिट्ट के इश्क में पूरी तरह गिरफ़्तार हो चुकी थी। वह अपने प्रेमी के लिये कुछ भी कर गुज़रने को तैयार थी। 
ऐन को यह विश्वास दिला दिया गया कि ब्रैड पिट्ट पैसों की तंगी से गुज़र रहा है। अपनी पत्नी एंजेलीना जोली से तलाक के कारण वह अपना बैंक अकाउंट इस्तेमाल नहीं कर पा रहा। उस नासमझ महिला से लगभग आठ लाख यूरो यानी कि सात करोड़ बारह लाख रुपये की ठगी कर ली गई। और उस महिला का ना केवल विवाह टूट गया, वह बेचारी सड़क पर आ गई। 

ऐन कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय की छात्रा नहीं है। वह 53 वर्ष की महिला है। कहते हैं ना प्यार में ना तो कोई उम्र की सीमा होती है और ना ही किसी किस्म का कोई बंधन। जब इश्क का बुख़ार चढ़ता है तो इन्सान पूरी तरह से बेबस हो जाता है और पूरी शिद्दत से प्यार करने लगता है। उसके साथ यह खेल वर्ष 2023 के फ़रवरी माह से खेला जाने लगा था। उसे एक ऐसी महिला का फ़ेसबुक पर संदेश आया जो कि अपने आपको फ़िल्म स्टार ब्रैड पिट्ट की माँ जेन एट्टा पिट्ट बता रही थी। ऐन को यह विश्वास दिला दिया गया कि चैटिंग (संदेश भेजना) ब्रैड पिट्ट ही कर रहा है।… कमाल की बात यह है कि उसने ऐन से कभी फ़ोन पर बात नहीं की। जो कुछ हो रहा था केवल संदेशों के ज़रिये हो रहा था। अब शुरू हुआ दोनों का ऑनलाइन रोमांस।
ऐन का विवाहित जीवन समस्याओं से जूझ रहा था। उसने स्वयं बताया कि उसे इस फ़र्ज़ी अकाउंट से प्रेम कविताएं और प्रेम के संदेश आने लगे। उसे पक्का विश्वास हो गया था कि ब्रैड पिट्ट उसके प्रेम में डूबा हुआ है और दोनों एक दूजे के लिये बने हैं। 
साइबर अपराधी ने कृत्रिम बौद्धिकता के सहारे ऐसे-ऐसे फ़ोटो बनाए कि ऐन को पूरा विश्वास हो गया कि उसका संपर्क ब्रैड पिट्ट से ही हो रहा है। कुछ समय बाद तथाकथित ब्रैड पिट्ट ने ऐनी के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा। यह तय हो गया कि ठीक होने के पश्चात वह ऐनी से विवाह कर लेगा। ऐनी एक करोड़ोंपति इन्सान की पत्नी थी। उसने अपने पति से तलाक के लिये केस फ़ाइल कर दिया। इसके बाद स्कैमर ने नया पैंतरा खेला। उसने ऐन से कहा कि उसने ऐन के लिये बहुत से महंगे उपहार ख़रीदे हैं मगर उसे कस्टम ड्यूटी के लिये कुछ पैसों की ज़रूरत है। उसने बहुत सफ़ाई से ऐन से नौ हज़ार डॉलर यानी कि लगभग 78,000 रुपये ऐंठ लिये। प्यार की दीवानी ऐन को इस पर भी स्कैमर पर कोई शक नहीं हुआ। 
ऐन को अपने पति से तलाक में गुज़ारे भत्ते की एवज़ में करीब आठ लाख डॉलर मिले जो कि लगभग सात करोड़ रुपये के बराबर है। स्कैमर उसे बेवक़ूफ़ बनाते हुए निरंतर पैसे ऐंठता रहा। जब ऐनी लगातार बेवक़ूफ़ बन रही थी तभी उसे सोशल मीडिया पर तंदुरुस्त ब्रैड पिट्ट की तस्वीरें अपनी नई प्रेमिका इनेस डी रामोन के साथ दिखाई दे गईं। उसे तत्काल एहसास हुआ कि उसके साथ खेला हो गया है। वो जो कहावत है ना कि ‘ना ख़ुदा ही मिला ना विसाल-ए-सनम!’ – कुछ ऐसा ही हुआ ऐन के साथ। पति भी गया, पैसे भी गये और फुर्र से उड़ गया वो नकली ब्रैड पिट्ट का प्रेम। 
पुरवाई के पाठकों को एक सलाह देना चाहेंगे। आप अपने परिवार में एक ‘संकट कोड’ अवश्य बना लें। यदि परिवार का कोई व्यक्ति संकट में अपने परिवार को संपर्क करे, तो जब तक उस ‘संकट कोड’ का इस्तेमाल ना करे तब तक उस पर विश्वास ना किया जाए। क्योंकि परिवार का ‘संकट कोड’ स्कैमर या कृत्रिम बौद्धिकता को मालूम नहीं हो सकता। कृत्रिम बौद्धिकता जिस तरह नकारात्मक कामों में इस्तेमाल हो रही है, वो समय दूर नहीं है जब इस पर गंभीरता से विमर्श किया जाए… कहीं ऐसा ना हो कि हम सब ऐन की तरह लुटे-पिटे महसूस करने को मजबूर हो जाएं। 
तेजेन्द्र शर्मा
तेजेन्द्र शर्मा
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.
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37 टिप्पणी

  1. जागरूक करने वाली सम्पादकीय के लिए
    साधुवाद ,धोखाधड़ी के तकनीकी स्वरूप पर विस्तृत वर्णन चौकाने वाला है अब लोगों को
    हमेशा सतर्क रहना होगा ।सूचना और प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार की ओर सेमोबाइल पर लगातार सतर्क करने वाले संदेशजारी किए जा रहे हैं ,चेतावनी पर ध्यान देने से ही सुरक्षित रहा जा सकता है ।
    Dr Prabha mishra

    • प्रभा जी, भारत में भी बहुत लोग ठगे जा चुके हैं। स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

  2. सही में यह एक गंभीर समस्या है। कृत्रिम बौद्धिकता अभी शुरुआती दौर में है, फिर भी इसका इस तरह का ग़लत इस्तेमाल हो रहा है। अगले कुछ वर्षों में जब यह परिपक्व अवस्था में आ जाएगी तो स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी। पहले भी इस तरह के स्कैम होते रहे हैं लेकिन AI के जरिए स्कैम धीरे-धीरे पनप रहे है। जागरुकता ही एक मात्र उपाय है। आपने पुरवाई के संपादकीय के माध्यम से पाठकों को जाग्रत कराया है, आपका हार्दिक आभार। आशा है, पाठक इसे पढ़कर सचेत होंगे।

  3. आपकी संपादकीय में हमेशा एक नया और सूचनाप्रद विषय सन्निहित रहता है। लेखकीय उत्तरदायित्व सम्यक परिपालन की कला आपसे सीखी जा सकती है। साधुवाद!!!

    • सुषमा जी, प्रयास रहता है कि ऐसे विषय उठाए जाएं जो हमारे जीवन से जुड़े हों और परिवर्तन ला सकें।

  4. पुरवाई के इस अंक की संपादकीय चेताती ही नहीं बल्कि सजग भी करती है। चेतावनी यह है कि ऐसे स्कैम हो रहे हैं, सावधान हो जाइए। सजगता यह है कि ये धोखाधड़ी करने वाले बहुरुपिए है कभी भी कोई भी रूप बदल सकते हैं। अर्थात नए तरीके ईजाद करके आपको ठग सकते हैं। हर आदमी का भला करने वाला बढ़िया संपादकीय लिखा सर आपने। आपको बहुत-बहुत बधाई

  5. यह संपादकीय बहुत महत्वपूर्ण, गंभीर और विचारणीय है कृत्रिम बौद्धिकता के दुरुपयोग से भीषण संकट पैदा हो रहा है…. ऐसे में यह संपादकीय लोगों को सचेत,सतर्क रहने में काफी सहायक साबित होगा।

  6. बड़े धोखे है इस रहा में, बाबूजी धीरे चलना…
    लेकिन चाहे जितना सम्हल लें, धोखे हो जाते हैं। चौकन्ना करने वाले, सारगर्भित, शोध पूर्ण, परिपूर्ण संपादकीय के लिए हार्दिक बधाई और आभार

  7. सादर नमस्कार सर
    अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, टेक्नोलॉजी के नाम पर सबकुछ ध्वस्त हो चुका है। आवश्यकता से अधिक अपेक्षा का परिणाम है। शोधपूर्ण लेख एवं मार्गदर्शन हेतु असीम साधुवाद…..

  8. आम जन को चेताता एक उपयोगी ,संपादकीय।कंप्यूटर जब नया नया भारत में आया था और प्रशिक्षक जब वायरस वाले प्रोग्राम के बारे में बताते थे तो महज़ इतना ही कि कुछ लोग कंप्यूटर के क्षेत्र में ही विशेषज्ञ होते हैं पर कुछ इस से भी अधिक ,,इसलिए लाइसेंसस्ड सॉफ्टवेयर ही प्रयोग करें!!!!आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने वही या उस से भी अधिक भस्मासुरी अवतार ले लिया है।
    कहते थे ना कि इंसान को भगवान ने बनाया और इंसान ने कंप्यूटर को,,,पर अब मामला इंसान और सिर्फ इंसान का ही है।
    कृत्रिम बुद्धिमत्ता का फायदा तो भाषाओं ,बोलियों या बाजार में उत्पादन लागत को कम करने में लगना चाहिए,,या अन्य मानवीय कल्याण हेतु,,,,,परंतु धन कमाने के शर्ट कट ने इंसान को इंसानियत से इतर कुछ
    विकृत सा बना कर रख दिया है जो आज के संपादकीय में व्यक्त विचारों और उदाहरणों से सुर्ख रूँ है।
    यह संपादकीय यदि गृहणियों ,स्कूली बच्चों,किशोरों और आम जन तक पहुंचे तो एक बेहतर उद्देश्य की प्राप्त कर सकता है।यूं भी हम भारतीय सब चलता है ,,,या जब होगा तो देखेंगे ,,की मनःस्थिति वाले द्विस्तरीय वाले लोग हैं और आए दिन साइबर अपराधों का शिकार होते रहते हैं,,,कारण वही लोभ,लाभ कमाने के शर्ट कट और सेक्स भरी अबुझ सा बोझ लिए,,,,शायद ऐसे संपादकीय कुछ बचा सकें।
    साधुवाद माननीय संपादक महोदय को।

  9. वास्तव में ही साइबर अपराध और कृत्रिम बौद्धिकता

    आज के डिजिटल युग में, कृत्रिम बौद्धिकता (Artificial Intelligence) तकनीकी विकास का केंद्र बन गई है। इसके अनुप्रयोग ने हमारे जीवन को सरल और सुगम बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का भी विस्तार हो रहा है। डेटा चोरी, पहचान की हानि, और फर्जी जानकारी फैलाने जैसे अपराध अब अधिक सटीकता और तीव्रता से हो रहे हैं।

    कृत्रिम बौद्धिकता के माध्यम से साइबर अपराधी फिशिंग, हैकिंग, और रैनसमवेयर जैसे हमलों को अधिक प्रभावी बना रहे हैं। साथ ही, एआई का उपयोग फर्जी वीडियो और छवियां बनाने (डीपफेक) में हो रहा है, जो न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।
    एक और आंखें खोलने वाला संपादकीय : उसके लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

    • डॉ सुनीता जब जब कोई नई ईजाद होती है उसके सकारात्मक योगदान के साथ साथ ख़तरनाक प्रभाव भी होने लगते हैं। हमें सतर्क रहना होगा।

  10. सादर नमस्कार तेजेन्द्र जी
    बहुत बहुत गंभीर चेतावनी भरा संपादकीय है। यूँ तो हर बार आपका संपादकीय नई सूचनाओं से परिपूर्ण होता है किंतु इस बार जो आपने अपने पाठकों को सजग किया है वह बेहद महत्वपूर्ण है।
    हम जैसे लोग तो वाक़ई तकनीक के बारे में अनपढ़ से ही हैं। थोडा़ बहुत लिख लिया, यह कोई बड़ी बात नहीं है। कुछ बातें तो सिर के ऊपर से गुज़र जाती हैं। किसी अनजाने फ़ोन को उठाने में भी डर लगता है। ऐ कैसे कैसे काम करता है इसका भी संज्ञान नहीं है।
    मैं तो एक बार मैसेंजर से किसी परिचित के मैसेज से ही फँस गई थी। जब तक बुद्धि काम करती एफ़बी एकाउंट हैक हो गया था।
    मुझे तो लगता है, पुराने दिन ही बेहतर थे जब हम हाथ से लिखकर संतुष्ट रहते थे। अब आदतें बिगड़ चुकी हैं, यह छूटता भी नहीं। हर बार फ़ोन पर रेकॉर्डिंग तो बजती ही है।
    जागरूकता वाले संपादकीय के लिए आपको साधुवाद। समय पर सबकी बुद्धि काम कर सके तो ही अच्छा!
    धन्यवाद

  11. बहुत जानकारीपूर्ण और सजग संपादकीय। वास्तव में कई बार बहुत अजीब से कॉल आते हैं हालांकि मैंने कभी उठाया नहीं लेकिन दूसरी कंट्रीज के नाम लिखे रहते हैं । ‘सस्पेक्ट स्कैन’ के नाम से भी कॉल आया है। बहुत दिनों तक मुझे इस नाम से कॉल आता रहा मैंने उठाया नहीं और हर बार उस नंबर को ब्लॉक करती रही थी। उसके बाद वह फिर आ जाता था । हर बार नंबर अलग होता था। बार बार ब्लाॅक करने के बाद अब जाकर सस्पेक्टेड स्कैन के नाम से कॉल आना बंद हुआ। बहुत सजगता की आवश्यकता है। अक्सर बुजुर्ग लोग या महिलाएं गलतियां कर देते हैं और फंस जाते हैं । आप हमेशा नया व जानकारीपरक विषय सामने लाते हैं जो बहुत ही आवश्यक है हार्दिक धन्यवाद।

  12. रिंगटोन में चेतावनी देने के बावजूद लोग अभी साइबर क्राइम से सावधान नहीं हो पा रहे हैं और इसके लिए हमें स्वयं सतर्क रहना होगा और ऐसी हर कॉल से सावधान होकर इसकी पड़ताल भी करनी होगी डिजिटल अरेस्ट करके जो क्राइम हो रहे हैं वह तो लोगों को मौका नहीं देते लेकिन इसके तरीके को भी यह क्रिमिनल्स बदलते जा रहे हैं अभी पिछले दिनों की खबर है की एक प्रोफेसर को उन्होंने डिजिटल अरेस्ट किया और उनको इस तरह मजबूत किया कि वह अपनी बैंक के सारे पेपर्स लेकर एक होटल में पहुंचे वह अपने घर वालों से बात नहीं कर सकते थे लेकिन उन्होंने पूरी सावधानी के साथ एक पेपर में लिखा कि मैं फंस गया हूं और वहां से निकलते वक्त अपने घर वालों को उसे पेपर की ओर इशारा किया और वह निकल गए घर वालों ने इस पेपर को दिखा तो उन्होंने ट्रेस करने की पूरी कोशिश उनके वहां उसे होटल में पहुंचने से पहले ही घर वालों ने पुलिस को इन्फॉर्म किया और किस तरह से पुलिस ने उनके वहां पहुंचने के साथ उन अपराधियों को पकड़ लिया यह एक अलग तरीका था ना कोई पैसों का ट्रांसफर बल्कि बैंक के पेपर और चेक बुक के साथ उनका वहां बुलाया गया था जिसमें क्रिमिनल्स का पूरा-पूरा इरादा उनके सारे एकाउंट की जानकारी के साथ अपने कब्जे में ले लेना था।
    हर इंसान को सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि इनकी भूमिका तरह तरह की कहानी गढ़ने की योजना है। आप सावधान एवं सतर्क रहिए। संपादकीय में इस विषय को रखना और बड़े दायरे को अवगत कराने का काम किया है।

  13. इन्द्रकुमार दीक्षित, 5/45 मुंसिफ़ कालोनी देवरिया। इन्द्रकुमार दीक्षित, 5/45 मुंसिफ़ कालोनी देवरिया।

    ए आई का उपयोग करके फ्रेडुलिस्ट क्या क्या कर सकते हैं जिसमें केवल ऐन ही नहीं विश्व भर में लाखों लोग चपेट में हैं।भारत सरकार सतर्कता बरतने के लिये बराबर मेसेज कर रही है,बावजूद इसके लोग झांसे में आ ही रहे हैं।आपके सम्पादकीय ने फ्रांस में ऐन के साथ हुए स्कैम का दारुण दृष्टांत बताया और लोगों को विशेष सतर्क रहने को चेताया।बहुत बहुत साधुवाद!

    • इसीलिये यह संपादकीय भी लिखा गया भाई इंद्रकुमार जी। हमें बहुत ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत है।

  14. जितेन्द्र भाई: बहुत बढ़िया और timely विषय चुना है आपने अपने सम्पादकीय के लिए। अब तक AI के आने से पहले साइबरक्राइम से बचने के लिये, मेरे घर में जब भी लैण्डलाइन फ़ोन या फिर मोबइल फ़ोन की घण्टी बजती है, अगर डिस्पले पर फ़ोन करने वाले के नम्बर को मैं पहचानता नहीं तो कितनी भी घण्टियां बजती रहें मैं फ़ोन नहीं उठाता। कॉलर यदि मैसेज छोड़ता है तो उसकी कॉल का जवाब देना है या न देना मेरे हाथ में है। यही पॉलिसी मैं अपनी ईमेल के साथ करता हूँ। इस से कभी कभी कुछ कॉलें मिस हो जाती हैं लेकिन आने वाली सिरदर्दी भी कम हो जाती है।
    आपने जो AI और उस से सम्बन्धित आगे आने वाले क्राइम के बारे में ज़िकर किया है सो यह स्थिती, अगर इसको काबू नहीं किया, बहुत भयानक हो सकती है। कहाँ तो Covid-19 की बीमारी के आते ही उसके तोड़ की वैक्सीन बनाने के लिये सारी दुनिया ने ज़ोर लगाना शुरू कर दिया था, आर कहाँ AI के इस्तैमाल से भविष्य में आने वाली बीमारी को फटे जूते की तरह फैलने की छूट दी जारही है।

    • विजय भाई, आपने सही कहा है। पहले हमारे लिये AI का अर्थ हुआ करता था Air India… मगर अब उसका अर्थ होने जा रहा है सत्यानाश….

  15. आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स के द्वारा बढ़ते साइबर क्राइम पर चेतावनी देने के साथ उससे बचने के लिए परिवार वालों को ‘संकट कोड’ की निर्मित करने का आपने अपने संपादकीय में शानदार सुझाव दिया है।
    आजकल ऐसे केस बहुत सुनाई दे रहे हैं। बार -बार चेतावनी के बाद भी लोग फंस जाते हैं। Unknown फोन कॉल को उठाना ही नहीं चाहिए अगर उठा भी लिया तो ऐसी किसी घटना के होने पर उस पर विश्वास करने की बजाय अपने उस सम्बन्धी से बात करनी चाहिए जिसके बारे में उस कॉलर ने बताया है।

    ऐन के उदाहरण से मुझे लगता है इन ठगों के झांसे में वही अधिक फँसते हैं जिनका पारिवारिक जीवन सुखद नहीं होता। परिवार में एक दूसरे के प्रति विश्वास होना बहुत आवश्यक है तभी ऐसे लोगों के मनसूबे पर पानी फेरा जा सकता है।
    लोगों को चेताने वाले संपादकीय के लिए साधुवाद।

      • आदरणीय प्रिय तेजेंद्र जी आपकी समसामयिक संपादकीय पढ़ी,सभीके लिए पढ़ने व समझने योग्य ,हालांकि संपादकीय पढ़ने के पूर्व ही कई लोग स्कैम के शिकार हो चुके होंगे मोबाइल पर, आजकल ऐसे मैसेजेस की निरंतर बाढ़ सी आई हुई है ,एक बार पतिदेव के मोबाइल पर ही कॉल आई आपका बेटा थाने में बैठा हे,आप किसी को बताए नहीं ,में इंस्पेक्टर विजय क्राइम ब्रांच से बोल रहा हूं
        बेटा डॉक्टर है ,5मिनट पहले ही कॉल आई थी बहुरानी के पास ,चूंकि वह इंस्पेक्टर की हैसियत से बोल रहा था वर्दी कमिश्नर रैंक की पहन रखी थी , बोला 45 हजार की तुरंत व्यवस्था करके भेजे ,अन्यथा आप खुद जिम्मेदार होंगे, पति कुछ सोचने लगे बेटे की बायपास सर्जरी हुई थी ,वर्दी का अंतर पहचान कर ,क्योंकि वे स्वयं एडिशनल डायरेक्टर हेल्थ रह चुके थे, उन्होंने कहा आप बोल कौन रहे , इतने में बहु जो स्वयं डॉक्टर हैं उसने फोन लिया ,बोला आप हैं कौन ,किस थाने की बात कर रहे ,मेरी रिसेंटली बात हुई है पति से ,बताइए हु आर यू,,,,,मगर उसने काट दिया
        अब जो न जानता हो घबरा कर फंस ही जाएगा , अपनों की बात आने पर आदमी का दिमागी बेलेंस डगमगा ही जाता है ।
        सरकार के द्वारा खूब चेताया जा रहा है सचेत किया जा रहा ,मगर जालसाजी के नए नवीनतम उपक्रम सामने आते जा रहे हैं
        अब सर जो अपने बताया AI के बारे में ,इस तकनीक के बारे में कई आलेख ,लेख पेपर में आए दिन आते रहते हैं
        यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ,तकनीक इतनी अच्छी तरह कार्य करती हे कि,आप हकीकत ओर कृत्रिम में फर्क नहीं कर सकते,
        इससे आपके धड़ के पिक पर किसी ओर का चेहरा लगाया जा सकता हे,आपकी आवाज की ,आपके हाव भाव की हूबहू कॉपी की जा सकती है ,आप फर्क भी नहीं कर सकते ,अभी तो इस A I की कार्य प्रणाली अपने प्राथमिक स्तर को पास कर रही है , ओर इसी का एक बुरा परिणाम आपने हॉलीवुड फिल्म अभिनेता के A I कारनामे से 53 वर्षीय महिला से भावनात्मक शोषण करके लाखों की लूट कर ली ,आगे A I की तकनीक क्या रंग लाएगी ,कितना सृजनात्मकता में योगदान होगा या कितना नकारात्मक गतिविधियों में उपयोग होगा कह नहीं सकते , जब भी कोई आविष्कार होता है तो उसके सदुपयोग के साथ दुरपयोग पहले आ जाते हैं ,मानव का मन साधु और शैतान दोनों का होता है
        बहरहाल ,बतौर संपादकीय ,किसी भी दुर्घटना के शिकार होने के पूर्व पूरे घर के सदस्यों को एक कोड वर्ड से जरूर जुड़े होना चाहिए, ताकि आप तस्दीक कर सके कि दूर बैठा बात कर रहा आदमी हमारे घर का ही सदस्य बोल रहा हे अथवा कोई ओर फ्रॉड तो नहीं हे?
        आदरणीय ,जो जानते हैं वे तो जानते ही हैं ,मगर जो नहीं जानते उन लोगों के लिए इस संपादकीय का खास महत्व है
        इमोशनल रहिए ,परन्तु इमोशनल फूल बनने से सदेव बचिए,
        प्रेम अंधा जरूर होता है परन्तु स्वयं को अपनी हैसियत को ,अपनी उम्र को ध्यान में रखिए, अपनी प्रतिष्ठा सम्मान का सदेव ध्यान रखिए, अति उत्तम संदेशात्मक सजग करने वाली संपादकीय के लिए साधुवाद प्रिय तेजेंद्र सर।

        • कुन्ती जी, इस विस्तृत टिप्पणी के लिये हार्दिक धन्यवाद। बहुत बार जानते हुए भी हम ठग लिये जाते हैं।

  16. कृत्रिम बौद्धिकता के ज़रिए साइबर क्राइम से सावधान करता हुआ अत्यंत उपयोगी संपादकीय है। अआपने अत्यंत सरल ढंग से फ्रांस की महिला के उदाहरण द्वारा इसको समझाया है। हार्दिक आभार।

  17. बहुत अच्छी तरह से सब कुछ समझा देने के लिए आभार। संकट कोड के विषय में मेरे जैसे अनभिड़ों को कुछ और बता दें तो अच्छा होगा।

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