हिंदी सिनेमा विकट विडंबना से जूझ रहा है, जहाँ प्रतीक गांधी जैसे अभिनय के लिए ही बने कलाकार पहचान के लिए संघर्षरत हैं, वहीं सारा अली खान जैसों जिनका जन्म अभिनय के लिए हुआ ही नहीं, को लगातार बिग बजट फ़िल्में मिलती जा रही हैं। यहाँ प्रतीक गांधी और सारा अली खान केवल दो व्यक्ति नहीं, बल्कि दो अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि पात्र हैं।
पिछले दिनों दो सिनेमा सामग्रियों से गुजरना हुआ। एक, सोनी लिव पर प्रसारित बहुचर्चित वेब सीरीज ‘SCAM 1992’ देखी गयी और दूसरा, 25 दिसंबर को अमेज़न प्राइम पर प्रसारित होने जा रही वरुण धवन-सारा अली खान की फिल्म ‘कूली नम्बर वन’ के गाने देखे गए। इन दोनों चलचित्रों से गुजरने के बाद मन में हिंदी सिनेमा की जिस विडंबनात्मक छवि का अक्स उभरा यह लेख उसीकी उपज है।
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SCAM 1992
हंसल मेहता द्वारा निर्देशित यह वेब सीरीज 1992 में सामने आए हर्षद मेहता के स्कैम को लेकर लिखी गयी वरिष्ठ पत्रकार सुचेता दलाल और देबाशीष बासु की किताब ‘The Scam’ पर आधारित है। कहने को यह वेब सीरीज 1992 के स्कैम पर है, मगर इसमें हर्षद मेहता का फर्श से अर्श और अवसान तक का पूरा सफर दिखाया गया है। सीरीज दस एपिसोड की है और हर एपिसोड लगभग एक घंटे का है, मगर कहीं भी न तो कहानी धीमी होती है न ही आप बोर होते हैं। यह इस वेब सीरीज की कसी हुई पटकथा का ही परिणाम है।
इस वेब सीरीज को देखने के बाद आप स्वयं से पूछ पड़ते हैं कि क्या ऊपर से घोटाला नज़र आने वाला हर मामला वास्तव में भी घोटाला ही होता है या वो व्यवस्था की विसंगतियों का एक परिणाम होता है? हर्षद मेहता ने जो किया था, वो नैतिक रूप से बेशक गलत था, लेकिन यदि उसे अपराध माना जाए तो फिर सबसे बड़ा अपराधी व्यवस्था को माना जाना चाहिए।
बहरहाल, इस सीरीज में मुख्य पात्र हर्षद मेहता की भूमिका प्रतीक गाँधी ने निभाई है। प्रतीक गुजराती थिएटर कलाकार हैं। इसके अतिरिक्त बॉलीवुड की कुछेक फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार भी उन्होंने किए हैं, हालांकि उनकी मुख्य पहचान थिएटर कलाकार के रूप में ही रही है। लेकिन अब उनकी पहचान हर्षद मेहता का पर्याय बन चुकी है।
किसी वास्तविक किरदार को, बिना मिमिक्री के निम्न स्तर तक गए, परदे पर कैसे उतारा जाता है, यह बात इस वेब सीरीज में प्रतीक के अभिनय को देखकर समझी जा सकती है। अन्य किरदारों ने भी जरूरत के मुताबिक अच्छा काम किया है। संवाद भी बेहतरीन हैं। गुजराती भाषा का भी टुकड़ों-टुकड़ों में सुसंगत इस्तेमाल किया गया है।
किसी वास्तविक स्कैम को लेकर बनी यह भारत की पहली वेब सीरीज है। निश्चित ही आगाज़ शानदार हुआ है। यह वेब सीरीज देखने के बाद लगता है कि ऐसी सत्य घटनाओं और घोटालों पर और भी वेब सीरीजें बननी चाहिए।


पीयूष जी आपने हिंदी सिनेमा के वर्तमान हालात पर उम्दा बात
कही । गुलशन कुमार नें इस क्षेत्र मेंक्रांतिकारी काम किया
एकाधिकार ख़त्म करने में उनका बड़ा योगदान रहा ।