पुस्तक  : बावला 
लेखक  : शेर सिंह
प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, सी-46, सुदर्शनपुरा, इंडस्ट्रियल एरिया एक्सटेंशन, नाला रोड, 22 गोदाम, जयपुर – 302006     
आईएसबीएन नंबर : 978-93-5536-151-6
मूल्य   : 175 रूपए
सहज, सरल व्यक्तित्व के धनी सुपरिचित साहित्यकार श्री शेर सिंह की पुस्तक बावला इन दिनों चर्चा में है। शेर सिंह के आलेख, कहानियाँ, कविताएँ, लघुकथाएँ, संस्मरण और पुस्तक समीक्षाएँ निरंतर पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। शेर सिंह की प्रमुख कृतियों में मन देश है, तन परदेश (कविता संग्रह), शहर की शराफ़त, आस का पंछी, घास का मैदान बावला (कहानी संग्रह), यांरा से वॉलोंगॉन्ग (यात्रा संस्मरण) शामिल हैं। शेर सिंह राष्ट्र भारती अवार्ड सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। बावला शेर सिंह का चौथा कहानी संग्रह है। शेर सिंह जीवन के छोटे-छोटे प्रसंगों को लेकर कुशलता से कहानियाँ रचकर अपनी सर्जनात्मक शक्ति का परिचय देते हैं। शेर सिंह अपने अनुभवों को बड़ी सहजता से कहानी में ढाल लेते है। इनके पास कहानी कहने का एक सधा हुआ अंदाज है। कहानी में पात्रों का चरित्र चित्रण इस प्रकार करते हैं जैसे कि वे उन पात्रों के साथ रहे हो। इन कहानियों में अनुभूतिजन्य यथार्थ है। इस कहानी संग्रह में छोटी-बड़ी 17 कहानियाँ हैं। इन कहानियों में दिखने वाले चेहरे हमारे बहुत करीबी परिवेश के जीते-जागते चेहरे हैं। कहानियों के पात्र गढ़े हुए नहीं लगते हैं, सभी पात्र जीवंत लगते हैं। कहानियों में प्रवाह है, अंत तक रोचकता बनी रहती है। इस संग्रह की विशेषता है कि कहानियों में विविधता बहुत है। संग्रह की अधिकाँश कहानियाँ मध्य और निम्न वर्ग से संबंधित हैं। इस कहानी संग्रह में पहाड़ी परिवेश की कहानियाँ हैं। कहानीकार ने सामाजिक यथार्थ को इन कहानियों में रेखांकित किया है। पहाड़ों पर बसने वाले आम-जन की पीड़ा, जीवन की समस्याएँ, गरीब वर्ग की ईमानदारी, बेबसी, टोने-टोटके, अंधविश्वास, शोषण, उत्पीड़न, और स्त्रीमन की पीड़ा आदि का चित्रण मिलता है। कहानीकार व्यवस्था में दिख रही विसंगतियों को उजागर करते हैं। लेखक केवल विसंगति के खिलाफ खड़े नहीं होते बल्कि यथास्थिति को बदलने की प्रेरणा भी देते हैं। शेर सिंह की कहानियों में हिमाचली समाज की झलक देखने को मिलती है। पहाड़ी जीवन में हो रहे परिवर्तनों को शेर सिंह ने बहुत गहराई से अनुभव किया है। कहानियों में लेखक ने कुल्लू और कुल्लू के आसपास के ग्रामीण यथार्थ का चित्र प्रस्तुत किया है। लेखक दृश्य चित्र खड़े करने में माहिर हैं।
असर कहानी में कथाकार ने पहाड़ी टूरिस्ट स्थानों की होटल के मालिकों और उनके कर्मचारियों की मनोदशा का यथार्थ चित्रण किया है। कोरोना काल में ये पहाड़ की होटलें बंद थी। होटल के मालिकों ने होटल के निर्माण के लिए बैंकों से कर्ज लिया था। कोरोना काल में होटल मालिक बैंकों की किश्त नहीं चुका पाए थें। कोरोना काल के पश्चात जब होटल खुल गए थे और टूरिस्ट पहाड़ों पर आने लग गए थें तब होटल मालिकों और उनके कर्मचारियों के चेहरों पर मुस्कराहट लौट आई थी। भूख अभावग्रस्त जीवन की कहानी है। गाँवों में रोजगार नहीं है। गाँवों के कुछ लोग अपना पेट पालने के लिए अपने बच्चों को सुदूर जगहों पर भिजवा देते हैं। यह एक छोटी लड़की मुस्कान की कहानी है जिसमें मुस्कान को एक ईसाई महिला मारी के साथ कुल्लू भेज दिया जाता है, जहां मुस्कान को एक ठेकेदार के यहां तीन हजार रुपये मासिक पर पौधों को पानी देने का काम और झाड़-बुहार का काम करना पड़ता है। 14 वर्ष की मुस्कान को अपने साथ काम करने वाले जितेंद्र से प्रेम हो जाता है और मुस्कान गर्भवती हो जाती है।      
ध्यानी का भग्गी कहानी में ध्यानी के जीवन की विडम्बना, नियति, उसकी विवशता को गहराई से महसूस किया जा सकता है। यह कहानी एक ओर भग्गी  के उच्छृंखल जीवन को तो दूसरी ओर भग्गी की पत्नी ध्यानी के घुटन रुपी जीवन को प्रतिबिंबित करती है। ध्यानी अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ भग्गी से प्रेम विवाह करती है। ध्यानी के पिता के पास बहुत ज़मीन-ज़ायदाद थी। ध्यानी के पिता ने ध्यानी को 15 बीघे का एक खेत और एक नया घर बनाकर दे देते हैं। भग्गी एक तरह से घर जवांई जैसा बन गया था। वह अपने गांव भी जाता रहता था। भग्गी को बच्चे होते गए और अब भग्गी अपने गाँव में ही ज्यादा रहने लगा और कभी कभी ध्यानी से मिलने आता था। बच्चे अपने बाप को ठीक से पहचानते नहीं थें। ध्यानी अकेले अपने बच्चों की परवरिश करती है। जहां चाह-वहां राह कहानी आत्मीय संवेदनाओं को चित्रित करती एक मर्मस्पर्शी, भावुक कहानी है। एक बैंक अधिकारी की पोस्टिंग जब एक गाँव में होती है तब वह एक अच्छे पढ़ने वाले गरीब छात्र को इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन की शीघ्र बैंक से स्वीकृति करवा देता है। अधिकारी का वहां से स्थानांतरण दूसरी जगह हो जाता है। एक दिन अचानक वह छात्र प्रकाश अपनी पत्नी के साथ उस बैंक अधिकारी से मिलता है और उनका आभार मानता है कि उनके कारण वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर वह टीसीएस में नौकरी कर रहा है। जबकि बैंक अधिकारी उस घटना को भूल चुका होता है।   
नानकी कहानी के माध्यम से लेखक ने एक पहाड़ी गरीब स्त्री की जीवटता और संवेदना को रुचिकर तरीके से व्यक्त किया है। नानकी के संघर्ष की कहानी है। नारी मन की व्यथा, उसकी वेदना, विवशता और लाचारी को स्पष्ट अनुभव किया जा सकता है। इस कहानी में नारी की विवशता पुरुषजन्य परिलक्षित होती है। पैराग्लाइडर कहानी रेखाचित्र ज़्यादा है और कहानी कम़। इस कहानी में हास्य है, विनोद है। पैराग्लाइडिंग पहाड़ी पर्यटन में एक रोमांचक और साहसिक गतिविधि है। केरल से आए जोसफ दो हजार रुपये देकर पैराग्लाइडिंग करते हैं लेकिन पैराग्लाइडिंग के दौरान वे बुरी तरह से डर जाते हैं और उनके कपड़े खराब हो जाते हैं। बुजदिल कहानी एक नेपाली युवती के संघर्ष की कहानी है जो अपने शराबी  पति की मार की वजह से काम की तलाश में अपना घर छोड़ देती है। एक व्यक्ति अपने घर के आँगन में बैठकर इस युवती को देखता है लेकिन उसकी  कोई सहायता नहीं कर पाता। उस व्यक्ति को रात भर नींद नहीं आती है और वह उस युवती के बारे में ही विचार करता रहता है और उसे लगता है कि वह युवती आत्महत्या न कर ले, लेकिन अगले दिन उस युवती को सही सलामत  देखकर उसकी जान में जान आती है।     
मास्टर जी की बकरी, पिता, सफाई, स्वाभिमानी, अंधेरा ही अंधेरा, कृष्ण-लीला, बावला, संक्रमण काल, स्वयंभू, शाडू इत्यादि कहानियों में लेखक जीवन की जटिलताओं, सामाजिक विषमताओं की कठिनाइयों और जीवन के कच्चे चिठ्ठों को उद्घाटित करने में सफल हुए हैं।  
कहानी के परिवेश, मौसम और माहौल को वो अपने लेखन-कला के विविध रंगों से उभारते हैं। इस संकलन की कहानियों में कथाकार लेखिका की परिपक्वता, उनकी सकारात्मकता स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। कहानीकार ने कहानियों में घटनाक्रम से अधिक वहाँ पात्रों के मनोभावों और उनके अंदर चल रहे अंतर्द्वन्द्वों को अभिव्यक्त किया है। भारत में स्त्रियों को प्राचीन काल से ही हाशिये पर धकेला गया। औरत अपनी कमजोरियों, अशिक्षा, बेजा भय से अत्याचार का शिकार होती आई है और इस पीड़ा को ही अपनी नियति और नीति मानकर सब कुछ सहती रहीं है। इस संग्रह की कहानियाँ जिंदगी की हकीकत से रूबरू करवाती है। ये कहानियाँ एक साथ कई पारिवारिक और सामाजिक परतों को उधेड़ती हैं आंचलिक बोली के माधुर्य ने इन कहानियों को अप्रतिम बना दिया है। सहज और स्पष्ट संवाद, घटनाओं, पात्रों और परिवेश का सजीव चित्रण इस संग्रह की कहानियों में दिखाई देता हैं। लेखक ने परिवेश के अनुरूप भाषा और दृश्यों के साथ कथा को कुछ इस तरह बुना है कि कथा खुद आँखों के आगे साकार होते चली जाती है। सहज और स्पष्ट संवाद, घटनाओं का सजीव चित्रण इस संग्रह की कहानियों में दिखाई देता हैं। सहजता और सरलता शेर सिंह की कहानियों की विशेषता है। कहानियों के सारे पात्र जाने पहचाने लगते हैं। कहानियों के शीर्षक विषयानुरूप है। संग्रह की कहानियाँ पाठक को बांधे रखती हैं। आशा है शेर सिंह के कहानी संग्रह बावला का हिंदी साहित्य जगत में स्वागत होगा। 
दीपक गिरकर
समीक्षक
28-सी, वैभव नगर, कनाडिया रोड,
इंदौर- 452016
मोबाइल : 9425067036
ई-मेल आईडी : deepakgirkar2016@gmail.com 

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