पुस्तक – कही-अनकही : एक अभिनेता की जज़्बाती ज़िंदगी: कबीर बेदी प्रकाशक – मंजुल पब्लिशिंग हाउस अनुवाद – प्रभात रंजन मूल्य – 499/रूपए मात्र ISBN 978-93-5543-113-4 पृष्ठ संख्या – 269
समीक्षक
सूर्य कांत शर्मा
कलाकार  और कला की कोई सीमा नहीं होती है।  यह तथ्य और भी दर्शनीय हो जाता है जब कोई भारतीय कलाकार और यहां सही मायनों में अभिनेता रेडियो,टीवी-देशी और विदेशी, विज्ञापन संसार,फिल्म जगत यथा बॉलीवुड,हॉलीवुड या अन्य फिल्मी आयामों में सतत सुर्खियां बटोर कर और अपना नाम मजबूती से उकेरता है तो भाग्य,पुरुषार्थ प्रसिद्धि,पुरस्कार,हर्ष विषाद,सफलता-असफलता,शालीन और शांत के साथ निजी जीवन के उतार चढ़ाव को समुद्र के ज्वार भाटे की मानिंद समझता और जूझता है !? तो ऐसे व्यक्तित्व विरल ही होते हैं।
और ऐसा ही एक बेमिसाल बेजोड़ नाम है-जनाब कबीर बेदी।
यही शख्सियत,जब अपनी आत्मकथा लिखे और वह भी बेहद साफगोई और हद सत्यता के साथ!,तो यह एक पठनीय और दर्शनीय दस्तावेज़ बन जाता है।
कबीर बेदी एक जाने माने,कभी अभिनीत फिल्मों से,कभी विदेशी पुरस्कारों से,निजी जीवन की बेबाक स्वच्छंदता तो कभी विवादों से सुर्खियों में रहते रहे हैं।समीक्षित पुस्तक उनकी मूलतः अंग्रेजी में लिखी पुस्तक स्टोरीज आई मस्ट टैल का अनुवाद है, जिसे प्रभात रंजन ने बखूबी हिंदी पाठकों के लिए बंया करने का प्रयास किया है।
कबीर बेदी ने एक अंतर्राष्ट्रीय सितारा  होने के बावजूद अपने जीवन की घटनाओं, उतार-चढ़ाव, विडंबनाओं, उपलब्धियों, असफलताओं और बेबसियों का बेबाक वर्णन सहज-सरल और रोचकता के समावेश से किया है।उन्होंने सभी पुरुषों की तरह अपनी तमाम खूबियों और कमियों को स्वीकार कर विश्लेषित किया है।
दिल्ली के मध्यमवर्गी परिवार का एक युवा उस समय के युवाओं के समान ही था। ऑल इंडिया रेडियो या दूर दर्शन में नौकरी का सपना लिए, एक अस्थाई पद पर,विश्व प्रसिद्ध  बीगल संगीत बैंड का इंटरव्यू लेना और फिर रिकॉर्ड कॉपी का ना मिलना और मुंबई की ओर उस सृजन कर्मी का बढ़ना,विज्ञापन व्यापार जगत में एक मजबूत और युवा के रूप में स्थापित होना, फिल्म जगत में पहुंचना और फिर से संघर्ष कर सफलता की सीढ़ियां चढ़ना!!! साथ में निजी जीवन में प्रेम और विवाह का एक बार नहीं कई बार सुंदर से सुंदर और आकर्षक से आकर्षकतम रूप में आना,,,, किसी जादुई कहानी और उसके किरदार से कम नहीं।

कबीर बेदी के जीवन की विभिन्न सोपान की यात्रा बेहद चुनौती भरी जोखिम भरी रही है।यह जीवन यात्रा पाठकों को गहरे परंतु सीधे सच्चे अंदाज़ से रोमांचित ही नहीं वरन प्रोत्साहित भी करती है-अपना जीवन कड़ी मेहनत,स्वाभिमान और संघर्ष से जिएं।
समीक्षित पुस्तक में यह आत्म कथ्य कुल साथ चैप्टर्स यथा बीटल्स के साथ घरबदर: हिम्मत और धोखा, संयोग और विकल्प: कबीर और किशमिश, प्रेम और प्रसिद्धि के दिन : संदूकन और परवीन बाबी, क्रांति से धर्म तक:बाबाऔर फ्रेडा,बीच पर टहलते हुए: बीच और मान्यताएं, अलविदा सिद्धार्थ,पीड़ा और आनंद: बर्बादी और पुनरुत्थान। पुस्तक परत दर परत बस क्रॉनिकल अंदाज़ में कबीर बेदी के जीवन के पन्नों को खोलती जाती है।
इसमें एक युवा का स्वभाव, उसकी मान्यताएं उसका बचपन, यौवन और वयस्क जवां नायक जीवन के संघर्षों को बयाँ करता नजर आता है। हर अध्याय में श्वेत श्याम या रंगीन  चित्रों की श्रृंखला आपको कबीर बेदी के जीवन की घटनाओं को बेहतर ढंग से दर्शाती है।बॉलीवुड हॉलीवुड का मेगा स्टार भारत यूरोप या विदेशों में रच बस कर अपनी अभिनेता या टीवी प्रस्तोता की यात्रा में अपने तीन तीन जीवन साथियों से विरह और मिलन के सोपानों और अपने पुत्र पुत्रियों के साथ प्रसिद्धि और उपलब्धियों के साथ जीवन यात्रा पर दिखलाई पड़ता है। संदूक नामक सीरीज ने यूरोपियन टेलीविजन में सफलता के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे और 2010 में उन्हें इटली का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान प्राप्त हुआ और साथ ही साथ उन्हें नाइट की उपाधि भी दी गई। हॉलीवुड की बेहतरीन फिल्मों में से कुछ  यथा ऑक्टोपसी और जब बोल्ड एंड द ब्यूटीफुल में कबीर बेदी भारतीय अभिनेताओं के योगदान के परचम को पकड़े और लहराते देखें जा सकते हैं। और हो भी क्यों ना क्योंकि कबीर बेदी में रेडियो,टेलीविजन,थिएटर फिल्म सभी विधाओं में काम करके भारत और विश्व को एक सशक्त और स्थापित अभिनेता प्रदान किया। अस्तु प्रस्तुत पुस्तक उनकी जीत और त्रासदी उपलब्धियों और गलतियों यादों और पछतावा प्रसंगों और चिंताओं प्रेम और को देने तथा दिल तोड़ देने वाले सदमों की कहानियों को प्रभावी ढंग से बयां करती है।अपने बेटे सिद्धार्थ जोकि सिजोफ्रेनिया से ग्रसित थे उन्हें बचाने का कड़ा संघर्ष पाठकों को कबीर बेदी के रूप में जिम्मेंदार पिता का रूप दिखाता है।
कबीर बेदी एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज के मतदान करने वाले सदस्य हैं और यही संस्था ऑस्कर अवॉर्ड्स भी देती है। कबीर बेदी एक मानव प्रेमी भी हैं और वे समाज सेवा के कामों के लिए भी जाने जाते हैं वे साइटसेवर्स इंडिया की मानद ब्रांड ब्रांड एंबेसडर हैं, जो नेत्रहीनों को नेत्र प्रदान करने का कार्य करती है। वे केयर एंड शेयर इटैलिया के भी ब्रांड एंबेसडर हैं जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सड़क पर रहने वाले बच्चों को स्कूल से लाकर यूनिवर्सिटी तक पढ़ाने का काम करती है।पुस्तक के अंत में एक पूरा अध्याय परंतु बेहद वस्तुपरक अंदाज़ में उन लोगों को समर्पित किया गया है जिन्होंने इस पुस्तक के लिखने में अहम किरदार अदा किया है।
चलते चलते बता दे,कबीर बेदी अपनी पत्नी परवीन दोसांज के साथ जुहू मुंबई में रहते हैं वह अपनी अगली किताब लिख रहे हैं अभिनय रत हैं। टेलीविजन पर कमेंट्री भी करते हैं और अपनी आवाज उन्होंने विज्ञापन फिल्मों और चित्रों के लिए भी प्रदान की है यह बहुदा अपने तीन प्रिय शहरों रूम लंदन और लॉस एंजेलिस में आते जाते रहते हैं।आत्म कथा पुस्तक को पढ़ने के बाद यदि कबीर बेदी साहाब के बारे में यदि एक लाइन में कहा जाए तो कबीर के लिए पूरी दुनिया एक रंगमंच है। पुस्तक निश्चित रूप से खरीद कर पढ़ने और लाइब्रेरी में रखने  योग्य है।

सूर्यकांत शर्मा
ईमेल – suryakant_sharma03@yahoo.co.in

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