Monday, February 23, 2026
होमग़ज़ल एवं गीतसोनिया अक्स सोनम की ग़ज़लें

सोनिया अक्स सोनम की ग़ज़लें

1.
नसीब अपना किसी रोज़ आज़माओ तो
हवा के सामने कोई दिया जलाओ तो 
चलो कि रो नहीं सकते हमारे साथ अगर
हमारे हाल पे थोड़ा सा मुस्कुराओ तो
हकीकतों से तुम्हें रूबरू कराएंगे
तुम अपनी दुनिया से बाहर निकल के आओ तो 
समझ ही लेंगे ये कॉलेज का सिलेबस भी
पहाड़ा प्यार का पहले हमें पढ़ाओ तो 
बड़े बुज़ुर्ग मुहब्बत से रोकते तो नहीं
मगर ये कहते हैँ पहले ज़रा कमाओ तो 
तुम्हारी दी हुई सारी सज़ाएं हैँ मंज़ूर
मगर हमारी ख़ताएं हमें बताओ तो 
न जाने क्या हुआ इक रोज़ उसने मुझसे कहा
ग़ज़ल कोई मुझे सोनम ज़रा सुनाओ तो
2.
अगर हो वाबस्ता आशिक़ी से कहो सभी से
छुपाना क्या है भला किसी से कहो सभी से 
बचाओ दुनिया को तीरगी से कहो सभी से
अंधेरे डरते हैँ रौशनी से कहो सभी से 
तुम्हारी चीख ओ पुकार से मसअला नहीं कुछ
हमारा झगड़ा है खामुशी से कहो सभी से 
चमन में जाते हो तो चमन से सबक़ भी सीखो
जो तितलियों ने कहा कली से कहो सभी से 
ये इश्क़ क्या है बुरी बला है बुरी बला है
बताओ सबको कहो सभी से कहो सभी से
ख़ुदा की रहमत से नाउमीदी रखें न हरगिज़
परेशाँ है जो भी ज़िन्दगी से कहो सभी से 
बिछड़ के जाते हुए जो उसने कहा था सोनम
कभी न कोई कहे किसी से कहो सभी से
3.
ये नहीं मालूम क्या उसने कहा
मैंने तो बस ये सुना उसने कहा 
बाद में इंसाँ नहीं रहने दिया
पहले पहले तो ख़ुदा उसने कहा
हम तो दोनों दो बदन इक जान हैँ
फ़र्क़ क्या मैंने कहा उसने कहा 
मौत कहती है जिसे दुनिया उसे
ज़िन्दगी का फलसफ़ा उसने कहा 
मैंने सीने से लगा के रख लिया
दर्द को जिस दिन दवा उसने कहा 
पोंछ डाले अपने आंसू और फिर
ये है मेरा फ़ैसला उसने कहा 
मुझमे उसको अक्स आता है नज़र
यानी मुझको आइना उसने कहा
सोनिया अक्स सोनम, पानीपत
Email: [email protected] 


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