नॉटिंघम में हिन्दी साहित्य का सम्मान 3
एक ज़माना था जब नॉटिंघम में एक क़िले का निर्माण हुआ था ताकि ग़ैरों को उससे बाहर रखा जा सके। मगर आज वहीं क़िला अपने तमाम शहरियों का स्वागत करता है। नॉटिंघम रॉबिन हुड, लॉर्ड बायरन और डी.एच. लॉरेंस का शहर है।
हाल ही में इस क़िले पर “नॉटिंघम आपके चेहरे पर है” (Nottingham is on your face) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहां नॉटिंघम के एक सौ महत्वपूर्ण चेहरों को एक लाइट-शो के ज़रिये दिखाया गया। वहाँ इतिहास से लेकर समकालीन महत्वपूर्ण चेहरे तो दिखाई दिये ही, उसके साथ ही साथ नॉटिंघम के साहित्यकारों की कविताओं एवं रचनाओं में से कुछ पंक्तियां उद्धृत की गयीं है।
इस परियोजना के पीछे मुख्य प्रेरक शक्ति अधिकारी श्री जोश का कहना है, “यह हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण था कि हम नेतृत्व शुरू करने के लिए अपने महल की दीवारों पर अपने शहर के लोगों को के चित्र प्रदर्शित करते हुए इस कैसल के द्वार फिर से खोल दिये जाएं।
नॉटिंघम में हिन्दी साहित्य का सम्मान 4
जय वर्मा
ऐतिहासिक रूप से, नॉटिंघम कैसल की दीवारों को लोगों को बाहर रखने के लिए बनाया गया था और हम उन्हें फिर से एक नया उद्देश्य देना चाहते थे। इस ऐतिहासिक स्थल पर स्थानीय लोगों का एक व्यापक प्रतिनिधित्व देखकर, हम चाहते हैं कि हर कोई यह जान सके कि नॉटिंघम कैसल उनकी अपनी जगह है; एक स्वागत, जीवंत, रचनात्मक विश्व स्तरीय जगह है जो उनकी पहुंच के भीतर है। 
ब्रिटेन के हिन्दी जगत के लिये यह गर्व का विषय है कि हमारी प्रिय रचनाकार जय वर्मा (जो कि नॉटिंघम की हिन्दी संस्था ‘काव्यरंग’ की अध्यक्ष भी हैं) की कविता ‘शांतिदूत नेल्सन मंडेला’ के अंग्रेज़ी अनुवाद में से चार पंक्तियां इस लाइट-शो में शामिल की गयी हैं।
पुरवाई पत्रिका, एवं कथा यू.के. जय वर्मा जी को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिये बधाई देते हैं। यह वैश्विक हिन्दी के लिये गर्व का पल है। उनकी कविता में से उद्धृत की गयी पंक्तियां हैं –
“Bonding all in the
thread of unity,
Being companion in joys
and sorrows alike.” – Jai Verma. 
जय वर्मा की हिन्दी में लिखी गयी कविता हम यहां अपने पाठकों के साथ साझा कर रहे हैं –
हे शान्ति दूत, हे क्रान्‍ति‍ दूत
अपनाए वे, जो थे अछूत
तुम लड़े उसी के लि‍ए सदा
दक्षि‍ण अफ्रीका के सपूत 
तुम नहीं डि‍गे जंजीरों में
चीखों को दबा लि‍या उर में
था रंग भेद संघर्ष कि‍या
था नस्‍ल भेद, तुमने जो जि‍या
दि‍खलाया स्‍वयं न्यायपथ
औरों के लिए, नि‍र्बल के लि‍ए
तुम व्रती रहे मानवता के
अनुभूति सत्य संधान कि‍या
हिंसा का नहीं है मूल्‍य यहॉं
संकल्प कर लिया दृढ़ मन में
वि‍श्‍वास दि‍ला, भाईचारा
तकदीर लिखी अफ्रीका की
हे शान्‍ति‍ दूत, हे क्रान्‍ति‍ दूत
अपनाए वे, जो थे अछूत ।
तप से पावन, अपना जीवन
कर मार्ग दि‍खाया सबको फि‍र
इक नया राष्ट्र, इक नया बोध
सहयोग, संगठन, त्‍याग, प्रेम
निस्वार्थ समर्पण से तुमने
आक्रोश, घृणा कर दि‍ए दूर
एकता में बाँधकर सबको
दुख-सुख में बनकर साथी
अमन शान्ति के अग्रदूत
हे शान्‍ति‍ दूत, हे क्रान्‍ति‍ दूत
अपनाए वे, जो थे अछूत । 
अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस
से राजनीति में आए तुम
देकर नारा, क्‍यों रंग भेद
हो मानव मानव में अभेद
खामोश देश कब तक रहता
परवशता में डर क्‍यों सहता
लेकर संकल्‍प देश हित का
आज़ादी लक्ष्‍य था जीवन का
इति‍हास दिया इक नया हमें
साहस, तुममें था वो अकूत
हे शान्ति दूत, हे क्रान्‍ति‍ दूत
अपनाए वे, जो थे अछूत  
सच्चाई के कंटक पथ पर
तुम चले हाथ में ले मशाल
मानवता और उसूलों के
सीने में सुलगे थे अंगार
मुख से निकली न कोई आह
सह गए कठि‍न व्रत, अरे वाह
गाँधी जी से प्रेरित होकर
अपनाया मार्ग अहिंसा का
दिन रात घुटे और कष्‍ट सहे
रोबेन टापू की कठिन जेल
सत्ताईस साल कटे तपकर
कुन्‍दन बनकर बाहर आए
दी नयी दिशा अफ्रीका को
बलिदान कि‍या फि‍र नि‍ज कुटुंब
हे शान्ति दूत, हे क्रान्‍ति‍ दूत
अपनाए वे, जो थे अछूत
एएनसी को नव रुप दि‍या
आज़ाद देश को करवाने
मन की कटुता को कि‍या दूर
सम्‍मान मनुज का करवाने
शोषण से किया मुक्त उनको
जो थे किसान, मज़दूर वि‍कल
धरती मॉं से वंचित न रहे
कोई, ये स्वप्‍न बना दृगजल
काला हो, भूरा हो कि‍ श्वेत
भूखा न सोये कोई घर में
हैं श्वेत हमारे भाई बंधु
ये सुलह नीति दी थी तुमने
स्‍थापि‍त करके लोकतंत्र
अधिकार दि‍ला मत देने का
सब को समान, कर साधि‍कार
हर्षित दुनि‍यॉं ने तभी दि‍या
नोबेल शान्ति का पुरूस्कार
हे शान्ति दूत, हे क्रान्‍ति‍ दूत
अपनाए वे, जो थे अछूत
आया फि‍र सन् दो हजार सात
इति‍हास यहॉं एक नया बना
स्वर्णाक्षर में लिख गया पाठ
जीते जी तुमने क्‍या देखा
लंदन पार्लियामेंट स्क्वेयर में
आदमकद एक नई प्रतिमा
काँसे की मूरत कहती क्‍या
लन्‍दन को मि‍ली नई गरि‍मा
साथी बन स्वागत में चहके
सर विंस्टन चर्चिल और लिंकन
आश्वत हो गये देख तुम्हें
ओ अमन शाँति के महादूत
हे शान्ति दूत, हे क्रान्‍ति‍ दूत
अपनाए वे, जो थे अछूत
हैं झुका रहे अब शीश सभी
प्राणी, दक्षिण अफ्रिका में
मानवता को जो चुभते थे
तुमने सारे हर लि‍ए शूल
बन गये मसीहा, शान्‍ति‍ प्रेम
भाईचारे, समरसता के
परवशता से आज़ादी दी
अफ्रीका के पावन सपूत
हे शान्ति दूत, हे क्रान्‍ति‍ दूत
अपनाए वे, जो थे अछूत

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