होमकविताहेमन्त कुमार शर्मा की कविता - मैं बोलता तेरी तर्जुमानी कविता हेमन्त कुमार शर्मा की कविता – मैं बोलता तेरी तर्जुमानी By Editor September 3, 2023 2 319 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp मैं बोलता तेरी तर्जुमानी है, मेरे शब्द उस अधीरे की कहानी हैं। जो मजदूर बिखरा दिन भर, अन्न पाया बस मुट्ठी भर। मेरे शब्द उसकी मौन बानीं है। राह के दरख़्त सब काट दिये, समतल मग सब पाट दिये। उनकी असमय मौत मेरी जुबानी है। शिक्षा कुछ काम ना आई, सब डूब गई जो की थी पढ़ाई। उस साक्षर की कथा बनानी है। सुंदर पर भीतर से जो काले हैं, गिनती में नहीं और मुॅंह पे तालें है। इन अच्छे बुरों की बात सबको बतानी है। हेमन्त कुमार शर्मा ग्राम – कोना पोस्ट – नानकपुर हरियाणा। Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखडॉ. ममता पंत की कविताएँअगला लेखडॉ ममता मेहता का व्यंग्य – मेरे अपने Editor RELATED ARTICLES कविता पद्मा मिश्रा की दो कविताएँ April 5, 2026 कविता अंतरीपा ठाकुर मुखर्जी की कविताएँ April 5, 2026 कविता हूबनाथ पांडेय की कविता – ईश्वर और विज्ञान April 4, 2026 2 टिप्पणी सुंदर पर भीतर से जो काले हैं, गिनती में नहीं और मुॅंह पे तालें है। इन अच्छे बुरों की बात सबको बतानी है। बहुत अच्छी रचना! जवाब दें धन्यवाद आपका।—–हेमन्त जवाब दें कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest संपादकीय – बा…बा… ब्लैक शीप…! April 11, 2026 डॉ. जमुना कृष्णराज की पुस्तक ‘अव्वैयार की अमृतवाणी’ का लोकार्पण। April 5, 2026 पुस्तक-समीक्षा – मेरे भगत सिंह – डॉ. शिवजी श्रीवास्तव April 5, 2026 गणेश शंकर विद्यार्थी के द्विशताब्दी वर्ष एवं हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफर पर सप्रे संग्रहालय में कार्यक्रम April 5, 2026 और अधिक लोड करें
सुंदर पर भीतर से जो काले हैं, गिनती में नहीं और मुॅंह पे तालें है। इन अच्छे बुरों की बात सबको बतानी है। बहुत अच्छी रचना! जवाब दें
सुंदर पर भीतर से जो काले हैं,
गिनती में नहीं और मुॅंह पे तालें है।
इन अच्छे बुरों की बात सबको बतानी है।
बहुत अच्छी रचना!
धन्यवाद आपका।—–हेमन्त