तुम्हारे और मेरे हाथों में
तुम्हारे गोरे नाज़ुक
मेंहदी लगे हाथों में
एक प्रेमी का
बेहद भारी,गर्म हाथ है.
और
मेरे फटे हाथों में
बेरोजगार
ठंडी कलम
व भूखे रोते हुए
कुछेक सफ़ेद काग़ज है।
प्यासी की प्यासी रह गई
मेरी आँखों से आँसू बहकर
गालों के मार्ग से होकर
जा पड़े
मरुधर की छाती पर
चूस गई
फिर पड़े
चूस गई
फिर पड़े
चूस गई
इस तरह-
मेरी आँखों का घट
समूचा रीत गया
पर मरुधर
प्यासी की प्यासी रह गई.!