होमकवितात्रिवेंद्र कुमार पाठक की कविता - क्या बताएं कि क्या हालत है कविता त्रिवेंद्र कुमार पाठक की कविता – क्या बताएं कि क्या हालत है By Editor April 25, 2019 0 516 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp त्रिवेंद्र कुमार पाठक क्या बताएं किसी को कि क्या हालत है? या कहें कि नादाँ दिल की शरारत है, गुमसुम है दिल, अरमान है बहके बहके से, और “पाठक” है खामोश, ये भी तो शराफत है… समंदर में आये तूफान तो लोग कहते है आफत है और दरिया मचल भी जाए तो भी नजाकत है उसने हमें याद भी न किया और हम जिन्दा है क्या बताएं किसी को कि क्या हालत है? “पाठक” तो तन्हाई में भी बहुत माकूल रहते हैं फिर किसी के साथ की क्या जरुरत है पर इस नादाँ दिल को कौन समझाए शरारतें ही तो इस दिल की बुरी आदत हैं… Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखकुसुम भट्ट की कहानी – तीसरी आँखअगला लेखरमेश वशिष्ठ का आलेख – अधूरी खामोशी Editor RELATED ARTICLES कविता निज़ाम फतेहपुरी के दोहे October 3, 2026 कविता सीमा द्विवेदी की दो कविताएँ October 3, 2026 कविता निधि गुप्ता की कविता-घर आँगन October 3, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 शोध आलेख : हिन्दी ग़ज़ल का संक्षिप्त इतिहास एवं नवछंद विधान – हिंदकी March 22, 2020 अपनी बात…… April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest निज़ाम फतेहपुरी के दोहे October 3, 2026 दीपक शर्मा की कहानी कुर्सी के कवि October 3, 2026 सीमा द्विवेदी की दो कविताएँ October 3, 2026 नीलिमा शर्मा की कहानी – लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पायी October 3, 2026 और अधिक लोड करें