Wednesday, May 22, 2024
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लता तेजेश्वर ‘रेणुका’ की कविताएँ

1 – मौत से पहले
मौत से आँखें मिला कर
चलने से पहले
इतना तो बन जाऊँ क़ाबिल–
मौत भी मुझे मार न सके
जिन्दा रहूँ मैं, सबके दिल में।
मौत से न डरती मैं, डरती जिंदगी से
पाप पुण्य के मेले में न रह जाऊँ किसी कोने में।
मौत से न डरती मैं, डरती जिंदगी से
जो अन्याय को पहचान कर
चुपचाप सह लेती है,
उफ़ तक नहीं करती, क्या यही जिंदगी है ?
मौत भी हमें प्यार से गोद में भर लेती है
ऐसी जिंदगी किस काम की
जो मौत से पहले मार देती है ?
अन्याय अत्याचार तब होता है
जब आप सहते हो दोस्तो!
अन्याय बलात्कार तब होता है
जब आप ना लड़ते हो दोस्तो!
खुदको खड़ा कर सामना करो
उसका, जो आप को रास्ता दिखाने
से पहले छीन लेता है,
जिंदगी सड़ने का नाम नहीं लड़ने है नाम
मौत से डरने से क्या होता है? जिंदगी से लड़ो।
2 – आक्रोश
अंधेरा चीर कर सूरज निकला
शरीर से उसके ख़ून की बूँदें टपक रही थीं।
कुछ बूँदें धरती पर छिड़क गयीं
धरती की आँखें आंसुओं से भर आईं।
दिल चीर कर निकाला
बिलख-बिलख कर रोने लगी।
हवा रुक गई, बादल थम गए
पेड़-पत्तों ने हिलने से इन्कार कर दिया।
सागर लहराना भूल गया,
पक्षियों ने उड़ना छोड़ दिया।
पर मानव को एहसास तक नहीं हुआ,
अपने देश में ख़ून ख़राबा चलता रहा,
अत्याचार बलात्कार सहता रहा
अन्याय के आगे सिर झुका दिया,
पेड़-पौधे काटता रहा
अपनी बर्बादी पर आप दस्तख़त करता रहा।
धरती माँ रो रही है,
बच्चों का भविष्य को देख रही है
मैया यशोदा की तरह दंडित करती
तो क्या मानव को अहसास होता?
सहने की भी हद होती है, माँ भी अब बेबस है
सब्र का बाँध टूट गया, वायु में जहर फैलने लगा
नदी ने रास्ता बदल दिया, रेगिस्तान में बाढ़ आई
गाँव, शहर पानी से भर गए।
ये कैसा युग आया?
सागर में प्रबाल हुए, ग्रीष्म ने अनल बरसाए –
ठंडी ने कोहरा फैलाया।
बढ़ रही है और बढ़ती रहेगी ये बर्बादी
न जाने कहाँ होगा इसका अंत
ये तो मानव है, प्रकृति की नज़ाकत को समझे
माँ की मूलतत्व की कद्र करे।
आगे बढ़े, जरूर बढ़े, प्रकृति का नाश न करे
जगत का कल्याण करे व सच्चाई की रक्षा करे।
यही कुर्बानी धरती माँ के लिए
कपूर होगा, आरती होगी
यही कुर्बानी दिया बनकर
हम सब को रास्ता दिखाएगी।

लता तेजेश्वर ‘रेणुका’
अंग्रेजी और हिंदी के 8 संकलनों में कविता, लघुकथा, उपन्यास के अंश (खट्टे मीठे रिश्ते) संकलित,
करीब 200से ज्यादा रचनाओं का 50से ज्यादा विख्यात पत्र, पत्रिकाओं, अखबारों, ब्लॉग व अंतर्जाल पटल में प्रकाशित, और कई पुस्तक प्रकाशित.
रेडियो – आकशवाणी, राजस्थान रेडियो में कविताएँ प्रसारित,
टीवी चैनलों- कलिंगा tv, इंडिया tv, kcn headlines यूट्यूब चैनल, और मेरे द्वारा ‘साहित्य संकल्प’ नाम से यूट्यूब चैनल स्थापन जिसमें का पर संस्था के रचनाकारों को रचनाएँ पढ़ने का मौका देने के साथ ही अपनी रचनाएँ और ब्लॉग लेखन आदि प्रसारित। कई साक्षात्कार और किताब पर चर्चा आदि प्रसारित।
मेरी स्वलिखित प्रकाशित पुस्तकें और ई-पुस्तकें:
1.मैं साक्षी इस धरती की, काव्यसंग्रह,
2. हवेली, (सस्पेन्स, थ्रिलर काल्पनिक उपन्यास),
3. The waves of Life, अंग्रेजी में काव्य और कहानी संग्रह,
4. चाँदनी रात में तुम, काव्यसंग्रह,
5. सैलाब, (भोपाल के सबसे बड़ा दुर्घटना गैस रिसाव से आधारित उपन्यास),
6. भावनाएँ महकतीं हैं, काव्यसंग्रह,
7. सुनो हे भागीरथी, काव्यसंग्रह,
8. लहराता चाँद, (मानसिक बीमारी स्क्रिज़ोफ्रेनिया और सामाजिक बुराइयों पर केंद्रित उपन्यास),
9. चंद फुहारें, क्षणिका संग्रह, 2023
अन्य दो पुस्तकें प्रकाशन के लिए तैयार।
तीन संकलनों का संपादन : 1.सीप के मोती, 2.गुलिस्ताँ(25रचनाकारों के द्वारा संकलित 21भाषाओं की लिपिओं के साथ प्रकाशित), 3. मैं भी सैनिक (लघुकथा संकलन)
matrubharati.com साइट पर दो उपन्यासों ‘सैलाब’, ‘लहराता चाँद’ का सीरियल के तहत प्रकाशन, और पाठकों द्वारा चयनित रीडर्स चॉइस अवार्ड प्राप्त, दो विषयों में आमंत्रित लेखनों को पुरस्कृत। इसके अलावा अन्य कई जगह प्रख्यात ऑनलाइन वेबसाइटों पर जैसे प्रतिलिपि, storymirror,… आदि पर रचनाओं का प्रस्तुतिकरण
प्रमुख सम्मान प्राप्त: 2 राष्ट्र स्तरीय सम्मान, रीडर्स चॉइस अवार्ड, विद्योत्तमा सम्मान , नारी गौरत सम्मान, बहुभाषी लेखिका सम्मान, महादेवी वर्मा सम्मान, सहित कुल 16 सम्मानों से सम्मनित।
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