‘समकालीन कविता में अधूरापन कविता का एक प्रमुख स्वर रहा है। इसी परंपरा में हरीश अरोड़ा की कविताएँ न केवल अधूरी इच्छाओं के एक कोलाज है बल्कि यह खोए हुए समय की गवाहियाँ देती हैं।’ ये विचार दिल्ली हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा दिल्ली पुस्तक मेला-2025 के अवसर पर अद्विक प्रकाशन से प्रकाशित हरीश अरोड़ा के छठे कविता संग्रह ‘तुम्हारी चुप्पियाँ एक घोषणापत्र हैं’ के लोकार्पण के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित लीलाधर मंडलोई ने कहे। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन मे कई बार जो अनकहा रह जाता है कवि उसे अपनी कविता में शब्द देता है। हरीश की जीवन की चुप्पियाँ इस संग्रह में पूरी तरह से उभर कर आती दिखाई देती हैं। मैं उन्हें महसूस कर सकता हूँ।’
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही वरिष्ठ गीतकार इंदिरा मोहन ने कहा कि हरीश अरोड़ा का यह कविता संग्रह सघन अनुभूतियों का सृजन है जिसका साध्य उसी में अंतर्निहित है। उन्होंने यह भी कहा कि इन संग्रह को पढ़ते हुए पाठक कविता की भाव तरंगों में बहता नहीं, ठहरता है और अंतर्मन में झाँकने को विवश हो जाता है जहाँ राग भी है, विराग भी। समकालीन कविता में अपनी कविताओं के माध्यम से गहरे तक दखल रखने वाले हरीश अरोड़ा ने अपनी कविता यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संग्रह की कविताओं में चुप्पियों के वृत उन सभी परतों को खोल देता है जो विगत कई वर्षों के अनुभव का संसार है। लेकिन चुप्पियाँ ही अपने आप में एक अनुगूँज पैदा करता हैं।

