Wednesday, February 11, 2026
होमसाहित्यिक हलचलसाहित्य सरिता कार्यक्रम के अंतर्गत काव्य-गोष्ठी का आयोजन

साहित्य सरिता कार्यक्रम के अंतर्गत काव्य-गोष्ठी का आयोजन

खूब गिनता है वो शख्स कदम मेरे बच्चों के,
जिनके अपने बच्चों में ऐब हजारों हैं!
प्राचीन कला केंद्र के सभागार में संस्कार भारती चंडीगढ़ एवं बृहस्पति कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य सरिता कार्यक्रम के अंतर्गत अप्रैल के पहले रविवार शानदार काव्य गोष्ठी आयोजन किया गया। संस्कार भारती के मार्गदर्शक प्रोफेसर सौभाग्य वर्द्धन ने बताया कि इस काव्य गोष्ठी में ट्राइसिटी के अतिरिक्त चेन्नई, दिल्ली, पानीपत, अंबाला के कवियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुमेश गुप्ता की सरस्वती वंदना से हुआ।

मंच संचालन करते हुए कवि डा.अनीश गर्ग ने अपनी पंक्तियां कुछ यूं तंज भरते हुए खूब तालियां बटोरीं ,”अपने किए अंजाम से कुछ यूं जूझ रहे है..बेटे की चाहत वाले बेटियों का पता पूछ रहे हैं…कोख में दफनाने वाले गली में कंजक ढूंढ रहे हैं…”, डॉ त्रिपत मेहता ने एक मां के हवाले से कहा,”जा बेटा में केवल दुआ दूँगी तुझे कि अपनी जीवन संगिनी की अस्मिता की सदा रक्षा करना”, राजेश गणेश ने औरत की वेदना पर पढ़ा,”हो सके तो कभी किसी औरत से उसकी उदासी की वज़ह पूछना”, नवोदित युवा कवयित्री सुरभि ने कहा,”क्या हो अगर चाँद हो एक ऊन का गोला, जिससे कोई सितारे बुनता हो, टूट कर जो गिरे ज़मीन पर तो शायद इंसान बनता हो”, पल्लवी रामपाल ने कहा,”औरत धारे सूर्यमुखी, पुष्प का रूप जो रोशनाती हुई, राह दिखलाती सदैव, संग खड़ी जो..दिखलाती राह संग खड़ी जो”, युवा कवि श्याम सुंदर ने कहा,”लिखना होता नहीं आसान तथ्यों को जुटाना पड़ता है”, पेशे से अध्यापक कवि नरेश कुमार ने मंदोदरी के जन्म के बारे में कुछ क्यों कहा,”उस बाला का मायासुर ने नाम रखा था मंदोदरी,सभी संतानों में बनी वही सुता थी सर्वोपरी”, वरिष्ठ कवि डा. अनीश गर्ग ने अपने अंदाज में पढ़ा,”दिल तोड़ने वाले लोग मुजरिम से कम नहीं है.. करके कत्ल मेरा उन्हें कोई गम नहीं है”, वरिष्ठ कवि डा. अश्वनी शांडिल्य ने कहा,”मजबूरियों के दर्द की रस्सी से बांधकर,प्यारे वतन से दूर ले जाती अक्सर रोटियां”, कवयित्री स्मृति शर्मा ने कुछ यूं शेर पढ़ा,”दौर-ए-गम में अक़्सर चश्म-ए-तर भी सूख जाते हैं,बुरे हालात में सब चाहने वाले वाले रूठ जाते हैं”, दिल्ली से आयी पुरवाई की उपसम्पादक कवियत्री/कहानीकार नीलिमा शर्मा ने अपनी पंक्तियों से खूब तालियां बटोरीं,”दिल तो था आज तेरी पेशानी चूम लूँ,डर था लेकिन कहीं आखिरी बार न हो”।

 

अपनी कविता “पचपन साल की लड़की” कविता में उन्होंने मध्यवय महिला की हृदय में उठती पीड़ा को बताया। उनके शेर “खूब गिनता है वो शख्स कदम मेरे बच्चों के, जिसके अपने बच्चों में ऐब हजारों है” ने खूब वाहवाही पायी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता निभाते हुए डा. मंजु चौहान ने सभी कवियों की सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की  और अपनी रचना कुछ यूं रखी, “बात इतनी सी है,बस इतना सा अरमान लिखना चाहती हूं, मैं उसके दर्द भरे दिल पर कुछ मुस्कान लिखना चाहती हूं”। तमिलनाडु के कवि संजय रामन ने हिंदी अनुवाद के साथ तमिल कविता पढ़ी, “गहन प्रेम की तूलिका से चित्रित करता हूं जीवन अपना”।
इस कार्यक्रम में अन्य कवि अश्विनी भीम, अन्नु रानी शर्मा, कंवलजीत कंवल, हनी खेड़ा, राम, राजिंदर रैना, सुरजीत सिंह धीर, एच सी गेरा, राजन सुदामा, संगीता शर्मा कुंद्रा, अमृत सोनी ने अपनी खूबसूरत रचनाएं पेश कीं। संस्कार भारती के अध्यक्ष यशपाल कुमार ने सभी का आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया‌।

 

RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest