Wednesday, February 11, 2026
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विवेक रंजन श्रीवास्तव का व्यंग्य – गए थे कुंभ, मिल गई मोनालिसा!

धन्य हैं वे श्रद्धालु जो कुंभ में गंगा दर्शन की जगह मोनालिसा की चितवन लीला की रील सत्संग में व्यस्त हैं। स्त्री की आंखों की गहरी झील में डूबना मानवीय फितरत है। मेनका मिल जाएं तो ऋषि मुनियों के तप भी भंग हो जाते हैं। हिंदी लोकोक्तियाँ और कहावतें बरसों के अध्ययन और जीवन दर्शन, मनोविज्ञान पर आधारित हैं। “आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास” एक प्रचलित लोकोक्ति है। इसका अर्थ है कि किसी विशेष उद्देश्य से हटकर किसी अन्य कार्य में व्यस्त हो जाना। बड़े लक्ष्य तय करने के बाद छोटे-मोटे इतर कामों में भटक जाना। 
कुम्भ में इंदौर की जो मोनालिसा रुद्राक्ष और 108 मोतियों वाली जप मालाएं बेचती हैं उनकी मुस्कान से अधिक उनकी भूरी आंखों की चर्चा है। वे शालीन इंडियन ब्लैक ब्यूटी आइकन बन गई हैं। यह सब सोशल मीडिया का कमल है। एक विदेशी युवती सौ रुपए लेकर कुंभ यात्रियों के साथ सेल्फी खिंचवा रही है। दिल्ली में वड़ा पाव बेचने वाली सोशल मीडिया से ऐसी वायरल हुई कि रियल्टी शो में पहुंच गई। मुंबई के फुटपाथ पर लता मंगेशकर की आवाज में गाने वाली सोशल मीडिया की कृपा से रातों रात स्टार बन गई। जाने कितने उदाहरण हैं सोशल मीडियाई ताकत के कुछ भले, कुछ बुरे। बेरोज़गारी का हल सोशल इन्फ्लूएंसर बन कर यू ट्यूब और रील से कमाई है। 
तो कुंभ में मिली मोनालिसा की भूरी चितवन इन दिनों मीडिया में है। यद्यपि इतालवी चित्रकार लियोनार्दो दा विंची की विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग मोनालिसा, स्मित (मुस्कान) के लिए सुप्रसिद्ध है। यह पेंटिंग 16वीं शताब्दी में बनाई गई थी।  यह पेंटिंग फ़्लोरेंस के एक व्यापारी फ़्रांसेस्को देल जियोकॉन्डो की पत्नी लीज़ा घेरार्दिनी को मॉडल बनाकर की गई थी। 
यह सुप्रसिद्व पेंटिंग आजकल पेरिस के लूवर म्यूज़ियम में रखी हुई है। इस पेंटिंग को बनाने में  लिओनार्दो दा विंची को 14 वर्ष लग गए थे। पेंटिंग में 30 से ज़्यादा ऑयल पेंट कलर लेयर्स हैं। इस पेंटिंग की स्मित (मुस्कान) ही इसकी विशेषता है। यूं भी कहा गया है कि अगर किसी परिस्थिति के लिए आपके पास सही शब्द न मिलें तो सिर्फ मुस्कुरा दीजिये, शब्द उलझा सकते हैं किन्तु मुस्कुराहट हमेशा काम कर जाती है।
तो अपना कहना है कि मुस्कराते रहिए। माला फ़ेरत युग गया, माया मिली न राम, कुंभ स्नान से अमरत्व मिले न मिले, पाप धुले न धुलें , किसे पता  है। पर राम नामी माला खरीदिए, मोनालिसा के संग सेल्फी सत्संग कीजिए, इसमें त्वरित प्रसन्नता सुनिश्चित है। हमारे धार्मिक मेले , तीज त्यौहार और तीर्थ समाज के व्यवसायिक ताने-बाने को लेकर भी तय किए गए हैं। आप भी कुंभ में डुबकी लगाएं । 
विवेक रंजन श्रीवास्तव
ए 233,ओल्ड मिनाल रेजीडेंसी,
भोपाल
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