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अमित कुमार मल्ल की कहानी – भेदभाव

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राम बदन का जन्म अवध क्षेत्र के तराई बेल्ट  के एक गांव में हुआ था , जहां उनके पिताजी गांव के पोस्टमैन थे  ।उसकी मां खेतो में मजदूरी करती थी । राम बदन के घर  में , मिट्टी की दीवारें थी और उन पर फुस  की छत पड़ी थी । घर मे, एक ही कमरा था । इसके एक कोने में,  खाना बनाने  की व्यवस्था थी , दूसरे कोने में सोने की , तीसरे कोने में घर का सामान पड़ा था ,जिनमे सस्ते जस्ते के कुछ बर्तन , थोड़ा अनाज , दो एक कपड़े आदि थे ।

नहाने के लिए घर के बाहर सरकारी चापाकल था  ।घर की औरतों को दिन निकलने के पहले नहाना होता था और घर के मर्द भी काम पर जाने के पहले नहा लेते थे। दखिन टोला में दो ही सरकारी चापा कल था , इसलिये दिन निकलने पर भीड़ बढ़ जाती ।उसका घर गांव के दक्षिण में था और उस जैसे अधिकांश लोगों का घर उसी टोले में था जिसे दक्षिण टोला बोलते थे ।

राम बदन के पिताजी, उस दक्षिण टोला  के पहले  इंटर पास व्यक्ति थे जिनको गांव के डाक खाने में  पोस्टमैन का काम मिला था। पोस्टमैन का काम यह होता था कि उसे पास के कस्बे में से रोज चिट्टियां , पार्सल , मनीऑर्डर आदि गांव ले आना होता था और फिर शाम को गांव के पोस्ट ऑफिस से गांववालो बांटना होता था । गांव से जो चिट्टियां, मनीऑर्डर  \, पार्सल गांव से बाहर जानी होती है उन्हें  अगले दिन ले जाकर , कस्बे में के मुख्य डाकघर में पहुंचाना होता था । यह सरकारी नौकरी थी । गांव के सभी लोगो से संपर्क होता ही रहता था ।इसलिये उसके समाज के लोगो मे उसके पिता जी का ,सबसे अधिक गांव वालों में मान था ।

उसके आसपास वाले , चाचा चाची बताते थे कि सामाजिक भेदभाव के कारण ,पहले गांव के बड़े लोग छोटी-छोटी बात पर मारते पीटते  थे , धूप में खड़ा कर कर पीठ पर ईंटा लाद  देते थे ,पूरी मजदूरी नहीं देते थे ,पैसे में मजदूरी नही देते थे, कई बार  बेगार भी कराते थे  ।

राम बदन में जब से होश संभाला, उसने देखा कि पहले जैसा भेदभाव व प्रताड़ना अब नही है । अब हर कोई  ,कम से कम अपनी सुविधानुसार मजदूरी कर सकता है ,नगद मजदूरी भी मिलती है , जहाँ अधिक मजदूरी मिले वहाँ जाकर मजदूरी कर सकता है।

राम बदन के बाबूजी को ,अपने समाज में सबसे पढ़े लिखे होने  के कारण ,  पता था कि उनके समाज के लोगो को, आगे बढ़ने के लिए क्या-क्या करना है ?  उन्हें पता था की उसके समाज के लोगों के लिए फीस में छूट है , एडमिशन में आरक्षण है ।इस अवसर का लाभ लेकर ,अपने बच्चों को पढ़ाई करानी चाहिये । उन्होंने रामबदन को प्रोत्साहित किया और  राम बदन गांव के प्राइमरी पाठशाला से लेकर जूनियर हाई स्कूल और पड़ोसी कस्बे के सरकारी इंटर कॉलेज तक मेहनत से  पढ़ता चला गया ।

गांव के प्राइमरी स्कूल में तो कभी अच्छा नंबर नहीं मिला लेकिन नवी क्लास आते जाते , राम बदन  का मन पढ़ाई लिखाई में लगने लगा और उसको पता चल गया कि शिक्षा एक मात्र साधन है ,जो उसके व उसके समाज के साथ हो रहे भेदभाव को खत्म कर सकता है । हाई स्कूल में उसे 55 परसेंट मिला ।इंटर में  और ज्यादा मेहनत की तो सत्तावन परसेंट प्राप्त हुआ।

सरकारी इंटर कॉलेज में एक हिंदी के  मास्टर साहब थे जो उसी के समाज के थे ,उनसे रामबदन को हरदम मार्गदर्शन मिलता रहा । मास्टर साहब भेद  भाव का सामाजिक आर्थिक विश्लेषण करते रहते थे और बताते  कि किस प्रकार गांव में जाति के आधार पर भेदभाव पहले  से कम तो जरूर हुआ है लेकिन अभी भी बना हुआ है।
मास्टर साहब ने एक  दिन कहा ,

– तुम कस्बे में किसी भी दुकान पर किसी के साथ बैठकर चाय पी लो ,कोई तुम्हें टोकेगा नहीं लेकिन गांव के बाजार में ,तमाम सुधार के बाद भी तो तुम चाय पियोगे ,कोई बड़ा  आ गया, तो तुम …….बेंच को छोड़ दोगे ।
– सर …. गांव में ही ऐसा क्यों है ?
– इसका कारण गांव की व्यवस्था । ……यह बहुत समय से जाति की व्यवस्था में जकड़ी हुई है । यथास्थिति वाद में…….जड़ता में…..जकड़ी हुई है ।………समय के साथ गांव में रोशनी आई ।गांव में नए विचार आए, जिनसे गांव की पुरानी जड़ता , पुरानी व्यवस्था काफी हद तक , टूटी है ।
– जी ।
–  ……..कई जगह जातिगत विषमता के बंधन लगभग टूट गए ।….. इसके  टूटने का एक कारण और भी है कि जैसे ही देश आजाद हुआ  ,विधायिका यानी कि लोकसभा  व विधानसभा तथा सरकारी सेवाओं में आरक्षण का प्रावधान किया गया । आरक्षण की वजह से ,हम लोगों के  ,हमारे  समाज के बहुत से लोग , नौकरी पाकर आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बने । अधिकार मिला । विधायिका के सदस्य बनकर , आर्थिक रूप से , प्रसनिक रूप से ,सामाजिक रूप से मजबूत हुए । आगे बढ़े। लेकिन……….. ऐसे अधिकतर लोग कस्बे व शहरों में बस गए। इसलिए शहरों में जातिगत विषमता,  सामाजिक विषमता बहुत तेजी से कम हो गई , लेकिन गांव में ऐसा उतनी गति से नहीं हो पाया ।
– जी ।

मास्टर साहब ने बात आगे बढ़ाई ,

– दुनिया मे सफल होने के लिये या तो पूंजी होनी चाहिए , या सत्ता होनी चाहिये या शिक्षा होनी चाहिये। हमारे समाज के लोगों के पास पैसा नही है। इसको आने में बहुत समय लगेगा । सत्ता मिलने में समय लगेगा ।सबसे पहले हम शिक्षित ही सकते हैं और वहाँ से सत्ता तथा समृद्धि का रास्ता मिलेगा ।

राम बदन  ने सोच लिया कि वह ऐसी पढ़ाई करेगा कि वह जल्दी से जल्दी नौकरी प्राप्त करें और किसी बड़े शहर में रहेगा, जहां पर उसे भेदभाव न झेलना पड़े । मास्टर साहब बताते थे कि जितने भी लिपिक व निरीक्षक संवर्ग की नौकरी है वह जल्दी से जल्दी मिल जाती हैं और इनके लिए बहुत ज्यादा क्वालिफिकेशन की आवश्यकता नहीं है। वह इंटर के बाद ही मिल जाती हैं कंपटीशन  में  अंग्रेजी और गणित की तैयारी ज्यादा जरूरत है ।अगर ध्यान देकर पढ़ा जाएगा इसमें सिलेक्शन हो जाएगा ।इसके लिये एस0 एस0 सी प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करता है।

राम बदन  8 किलोमीटर साइकिल चला कर कस्बे के स्कूल  जाता था। वहां पर स्कूल में पढ़ता । फिर मास्टर साहब के यहां जाकर , एस0 एस0 सी 0 की पढ़ाई पढ़ता था ।शाम को वापस गांव आता था ।

इंटर करने के अगले साल ही उसने स्टाफ सलेक्शन कमिशन   की  परीक्षा दी । उसके परिश्रम , मास्टर साहब के गाइडेंस , से उसका लिपिक संवर्ग में चयन  हो गया ।उसके पिताजी , मास्टर साहब , गांव के समाज के लोग बहुत खुश हुए कि इतनी कम उम्र में, उसे एस0 एस 0सी 0की प्रतिष्ठित नौकरी मिल गई।  राम बदन को लगा कि वह शहर में रहेगा, बराबरी से रहेगा । कोई भेदभाव नही रहेगा । भेदभाव रहित समाज मे उसे आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।

चयन के बाद पुलिस वेरिफिकेशन हुआ ,मेडिकल हुआ और  6 महीना बाद उसका नियुक्ति पत्र मिला। जिसके अनुसार उसकी तैनाती उसके गांव से सैकड़ों किलोमीटर दूर के बड़े शहर में, हुई। उस बड़े शहर में कोई जानने वाला नही था । मास्टर जी ने यहाँ भी मदद की । उन्होंने  बताया..

– उस शहर में चौक के पास, रैदास मंदिर है और वहां पर मंदिर का धर्मशाला है ।वहां पर मुफ्त में रहने को मिल जाएगा । …… तुम वहाँ अनुरोध कर के अधिक समय तक रुककर , किराये का मकान ढूंढना ।जब तुम्हें  मिल जाए तो धर्मशाला छोड़ देना ।

राम बदन ने रैदास धर्मशाला  में समान रखा , और अपनी पूरी बात बताते हुए , रूम किराये पर लेने तक वहाँ रहने देने का अनुरोध किया । वहाँ मौजूद आदमी ने बताया

– सामान्यतया लोग अधिकतम 7 दिन रहते हैं। यदि और आपको रुकना होगा तो ,आगे की , ….बाद में देखी जाएगी  ।
तैयार होकर , अपने कार्यालय में जाकर , राम बदन ने अपना योगदान दिया । जो आवश्यक फॉर्म व घोषणा पत्र भर कर देने थे , वह दे दिये। उसे उसका  कार्य भी बता दिया गया और कहा गया कि वह धीरे धीरे सीख ले ।
दो दिन बाद मास्टर साहब का फोन भी आया । उन्होंने हालचाल पूछा ,
–  तुम  खाना कहाँ खाते हो ?
–  बाहर ।
– क्यो ?
–   …..धर्मशाले में……. तो केवल रुकने की व्यवस्था है ।
– चाहो तो तुम,…. खाना बना सकते हो । …. वहाँ बर्तन , नॉमिनल किराये पर मिल जाएगा।
– दोपहर में ,तो दफ्तर की कैंटीन में कहा लेता हूँ ……..और रात में किसी होटल में खा लेता हूँ ।
–  ठीक है । …… कैसा लग रहा है ….?
– गुरु जी  !! बहुत अच्छा लग रहा है।…..समानता का मतलब  ..अब समझ मे आ रहा है ।
–  आर्थिक रूप से आत्म निर्भरता बहुत बड़ी बात है।…. उसी के साथ …. तुम समाज की मुख्य धारा में पहुंच गए ….. अब किसी भेदभाव के आधार पर तुम्हारा हक़ कोई नही छीन सकता ।
-……जी……एक बात यहाँ की बहुत पसंद आई ।…………..कोई पूछने वाला नहीं है कि वह किस समाज  का है । ……… लोग नाम पूछते हैं फिर , उसके बाद काम पूछते हैं।
– यह तो तुमको पहले ही बताया था कि शहर में भेदभाव नही है।……. जितना मेहनत करोगे…..उतना आगे बढ़ोगे ।
वह  मनोयोग , निष्ठा व मेहनत से निर्धारित कार्य , दफ्तर में काम करने लगा ।उस  दफ्तर में उसके समाज के दो चार लोग और मिले जो दूसरे जनपदों से थे ।उन लोगों ने बताया कि हम एक समाज के सब लोग मिलजुल कर रहते हैं और मानते हैं कि संविधान के अनुच्छेद-15 में राज्य के समक्ष  समस्त लोगों को बराबरी का अधिकार है, भेदभाव मना किया गया है , इसलिए कोई हमें दबा नहीं सकता ।कोई हमसे भेदभाव नहीं कर सकता। जहाँ ऐसा होगा हम सब लोग मिलकर विरोध करेंगे।  राम बदन ने , उनकी बातो से सहमति व्यक्त किया।
राम बदन ने अनुरोध किया ,
– रहने के लिये , किराये पर कमरा की जरूरत है । …………धर्मशाले में रहते बहुत दिन हो गया ।
साथियों ने बताया ,
– अब तुम सरकारी दफ्तर के सम्मानित महत्वपूर्ण कर्मचारी हो ।तुम्हे अपनी गरिमा के अनुसार रहना चाहिये ।
– ठीक है ।
–  मेरे अपार्टमेंट में एक कमरे वाला फ्लैट किराये के लिये खाली है ।….. प्रयास करूंगा कि तुम्हे मिल जाय ।
– वह महंगा होगा ।
–  अब ……तुम  गांव में नहीं  रह रहे हो ।ऑफिस  के मर्यादा के अनुसार रहना है । उसी के अनुरूप जीवन स्तर रखना है।

साथी के अपार्टमेंट में एक रूम वाला फ्लैट किराये पर ले लिया तथा धीरे-धीरे  समाज के समस्त कार्यों में भाग लेने लगा उसके मन में यह बैठ गया कि अब कोई भी भेदभाव नहीं होना है । साथ ही साथ ,वह उस अपार्टमेंट के आर 0डब्ल्यू 0ए 0की गतिविधियों में भी भाग लेने लगा और सक्रिय रहता था ।दफ्तर के जो उसके समाज के  सहयोगी थे तथा अपार्टमेंट के अन्य लोगो के साथ वह खेलने  लगा , गप शप करने लगा ।समय बिताने लगा ।

थोड़े दिन बाद आर 0 डब्लू 0 ए 0का चुनाव होने का था ।वह आर0डब्ल्यू0ए 0के चुनाव में अपने  लोगों के ग्रुप के साथ घूमने लगा , प्रचार करने लगा । वह प्रयास करने लगा कि जिस ग्रुप के लोगों के साथ व जुड़ा है  ,उनका कैंडिडेट चुनाव जीत जाए ।

इसी भागदौड़ – प्रचार – प्रसार के बीच एक  दिन विपक्षी गुट के एक प्रमुख आदमी ,अकेले में , टकरा गया । उसने कहा ,
– भाई ! तुम तो बहुत मेहनत कर रहे हो इस चुनाव में ।
–  हां । मैं मेहनत कर रहा हूं ताकि मेरे पक्ष के लोग आर 0डब्लू 0ए 0का चुनाव जीते।
– लेकिन ….तुम्हारी मेहनत तो बेकार है सब।
– क्यों ?
–  क्योंकि तुम चाहे जितना मेहनत कर लो , तुमको तो वोट डालने को तो मिलेगा नहीं ?
– क्यों नहीं वोट डालने को मिलेगा ?जब भारत के संविधान में सबको अधिकार मिला कि सब लोग बराबरी से वोट कर सकेंगे तो आर0डब्लू0ए 0के चुनाव में, मैं क्यों नहीं वोट नही डाल सकता ?

राम बदन ने प्रतिवाद किया।

– तुम तो बहुत जानकार निकले  ।
– अगर मैंने कोई गलत बात कही हो तो, बताइए ….. इस देश में सबको बराबरी का हक है….सब लोग बराबरी से , विधानसभा , लोकसभा , नगर निकाय के लिये वोट देते हैं तो …… अपार्टमेंट के आर 0 डब्ल्यू 0 ए 0 के चुनाव में……… क्यो बाकी लोग वोट डालेंगे और मैं वोट क्यों नहीं डालूंगा ?
– देखो !! आर0 डब्लू 0ए 0 में ,जो फ्लैट मालिक होते हैं , केवल  उनको  ही वोट डालने का अधिकार है  ।जो किराएदार होते हैं उनको वोट डालने का अधिकार नहीं है।
– ठीक है ,मैं किराएदार हूं ।लेकिन किरायेदार के रूप में , मैं भी तो इस सोसाइटी में रह रहा हूं । और जितने भी अपार्टमेंट के, आर0 डब्लू0 ए0 के  चार्ज हैं ,सब मैं दे रहा हूं । तब मेरी राय , मेरा वोट क्यो नही मान्य होगा ?
– चाहे जो तर्क दो ,लेकिन  आर 0 डब्ल्यू0ए 0 के चुनाव में  तुम्हें  वोट नहीं डालना है।
–  यह तो संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 का उल्लंघन है।मूल अधिकार का उल्लंघन है।
– तुम  चाहे जो समझो ,लेकिन तुम फ्लैट  के ओनर नहीं हो , इसलिए आर0 डब्ल्यू 0 ए 0 के गठन   के लिए होने वाले चुनाव में तुम्हारा वोट नहीं है और न तुम  वोट दे पाओगे ।
– यह तो  ….बहुत बड़ा भेदभाव है ।
– वह तो है ……लेकिन सही यही है तुम वोट नहीं डाल सकते ।

यह कहते हुए वह चला गया । राम बदन निशब्द हो गया । किंकर्तव्यविमूढ़ खड़ा रहा । वह सोचता रह गया कि  गांव का भेदभाव……… जातिगत था ….परंपरा से था …..अशिक्षा के कारण था…….लेकिन  ….. शहर में ….तो शिक्षा भी है .. आधुनिक विचार भी  है …….फिर भी …..यहाँ ….भेदभाव है , …..भले ही आधार बदल गया हो ,…..लेकिन भेदभाव है ….आर्थिक आधार पर है ……….। राम बदन ने जोर की सांस ली ..और सोचा……देखे…..शहरी भेदभाव से….. कब मुक्ति मिलती है ?…….इससे कैसे लड़े ….?

कई काव्य-संग्रह और पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां-कविताएँ प्रकाशित. सम्पर्क - amitkumar261161@gmail.com

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