Saturday, May 18, 2024
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प्रतिभा सुमन शर्मा की कहानी – सम्पूर्ण बहुमत की सरकार

वरुण और राशिदा की शादी का उनके घर में थोड़ा बहुत विरोध तो हुआ लेकिन फिर सब ठीक हो गया क्योंकि वरुण के माँ बाबा खुद एक कॉलिज में प्रोफेसर थे। दोनों ही धर्म और जाति की प्रथाओं को नहीं मानते थे लेकिन फिर भी माँ के मन मे कहीं न कहीं एक मुस्लिम के लिए अखर थी। माँ ने दोनों से इतना ही कहा कि “बस हमे तो कोई उतनी प्रॉब्लम नहीं है पर कल को तुम ही इस फैसले को नहीं निभा पाए तो?” इस पर वरुण ने कहा, “न निभा पाने का तो कोई मतलब ही नहीं माँ मैं और राशिदा साथ पढ़े है एक अच्छी अंडरस्टैंडिंग शेयर करते है हम दोनों।
उधर राशिदा के पापा खुद बहुत ही सक्सेसफुल वकील थे और उनकी अम्मी भी अच्छी खासी पोस्ट ग्रेजुएट थी। प्राइवेट स्कूल में टीचर थी। अम्मू प्लीज़ ! बस इतना ही कहा राशिदा ने और अम्मी ने ब्लेसिंग दे दी। पापा को तो पहले से ही अंदेशा था इसलिए वह बस बोले तो इतना ही कि ‘अगर तुमने सोचा है तो कुछ सोचकर ही फैसला लिया होगा। इंटरकास्ट तो ठीक था लेकिन इंट्ररिलीजियन? चलो! सोच लो ठीक से हफ्ते भर बाद बताना। राशिदा ने भी “कहा ठीक है पर फैसला वही होगा जो अब है पापा।”
हफ्ते भर बाद दोनों की शादी दोनों के रिवाज़ो से करना यानी एक प्रकार से मुसीबत मोल लेना था, इसलिए कोर्ट की मंजूरी से शादी करना ही ठीक लगा दोनों पक्ष को ।
दोनों का शुरुआती दाम्पत्य जीवन बहुत सुखमय रहा। और इस दौरान सरकार बदली!
एक दिन राशिदा और वरुण आफिस की पार्टी में आए हुए थे। जिनके घर पार्टी थी वह एक विशेष समुदाय से नफरत करते है यह उनकी बातों से साफ झलक रहा था। यह बात राशिदा ने पार्टी के चलते नोटिस की। राशिदा मुस्लिम है यह उन्हें मालूम था फिर भी उन्होंने घर मे पार्टी रखी थी जिसमें उनके बीवी बच्चे सब थे, मित्र भी थे और ऑफिस के अन्य लोग भी।
पार्टी में अचानक न जाने क्यों व्हाट्सएप के किसी फॉरवर्ड मैसेज पर बहस शुरु हो गई। वरूण उन सब मे राशिदा को ध्यान में रखते हुए संभलकर बाते कर रहा था।
फिर न जाने क्या हुआ कि बात बढ़ते बढ़ते इतनी बढ़ गई कि गाली गलौच पर उतर आए संस्कारी घर के बच्चे। क्योंकि पार्टी के होस्ट ही विशेष धर्म के लोगों के खिलाफ आग उगल रहे थे, तो आग और भड़की और लोग हाथापाई पर उतर आए। नारे लगाने लगे- इष्टदेव की जय…। वरुण इस पूरी बहस और लड़ाई का इकलौता दावेदार था जो जमकर मुस्लिम को डिफेंड कर रहा था। वहाँ मौजूद लोग वरुण को भला बुरा कहने लगे। राशिदा को गालियां देने लगे। वरुण ने सीधे सीधे राशिदा का हाथ पकड़ा और घर चला आया। और दूसरे ही दिन ऑफिस जाकर रिजाइन लेटर दे आया ।
वरूण के हिसाब से बात रफा-दफा हो गयी थी। इसलिए उसने उस बात को और नहीं खींचा। वरुण ने उसके और राशिदा के रिलेशनशिप में कभी भी बाहरी लोगों को तवज्जो नहीं दी थी।
कुछ समय बाद वरुण ने नए कंपनी में एप्लीकेशन दी पर न जाने क्यों सारे मेरिट्स के बाद भी वरूण रिजेक्ट हो गया। ऐसा काफी बार होने के बाद वरुण को ध्यान आया कि वह टारगेट हो रहा है। इधर राशिदा के स्कूल से राशिदा को रिज़ाइन करने को कहा गया था। क्योंकि वह भी एक मुस्लिम स्कूल था। एक अंजाना प्रेशर था दोनों के ऊपर! कौन कहाँ से हमला कर रहा है वह उसकी आँखों के सामने नहीं था लेकिन वरुण और राशिदा पर उनकी पूरी नजर थी। क्यों? क्यों कि वरुण एक मुस्लिम लड़की से प्यार करता था और उससे शादी कर चुका था। राशिदा के साथ भी सेम किस्सा था महज़ इसलिए दोनों जगह जगह टारगेट किए जा रहे थे।
एक दिन दोनों सिनेमा देखकर लौट रहे थे अचानक न जाने कहाँ से मुंह ढके चार पाँच भगवाधारी आए और रास्ते में वरुण और राशिदा को घेर लिया। रास्ता सुनसान था उस वक़्त। उन्होंने वरुण और राशिदा को बहुत मारा। राशिदा को उस वक़्त मालूम नही था कि वह प्रेगनेंट है। उसके पेट मे लात घूँसे जड़ कर मास्क पहने वे भगवाधारी  जय इष्टदेव की..का नारा लगाते हुए निकल गए। वरुण घायल हो हिल ही नहीं पा रहा था राशिदा को भी जमकर लाते लगी थी। राशिदा के ब्लीडिंग हो रही थी और उसकी पूरी शलवार खून से लथपथ थी। खुद को जैसे तैसे घसीटते हुए राशिदा वरुण तक पहुंची। वरुण की सांस चल रही थी पर वह बेहोश था। राशिदा हिम्मत जुटा कर अपने फोन से एम्बुलेंस वालों का नंबर डायल किया।
वरुण को होश आया तब डॉक्टर्स से उसने पूछा कि वह यहाँ कैसे आया और उसकी पत्नी कहाँ हौ? डॉक्टर्स ने बताया राशिदा दूसरे चेंबर में है गाईनाकोलॉजी सेक्शन में और उनका अबॉर्शन हो गया है। उसको अभी होश नहीं आया है। वरुण की आंखों से आसूं बह रहे थे। हॉस्पिटल में वरुण के माँ-बाप उससे मिलने आए। वरुण उनके किसी भी सवालों के जवाब देने की हालत में नहीं था। वह वहाँ काफी देर तक बैठे रहे। उन्हें जैसे ही पता चला कि राशिदा को होश आ गया है तो राशिदा को मिलने उसके चेम्बर में चले गए। राशिदा रो रही थी। उसी समय राशिदा के माँ बाप भी मिलने पहुंचे। दोनो तरफ के लोग गले मिले। समय बहुत कठिन था। किसी को क्या बोले और क्या कहें, कौन कहाँ शिकायत करे, किससे करें नहीं मालूम पर राशिदा से मिलने पुलिस आ पहुंची उसी वक्त। राशिदा ने सारी कहाँनी बताई। पुलिस रिपोर्ट लिखकर चली गयी। थोड़ी देर में उसके और वरुण के माँ बाप भी हौसला अफज़ाई कर चले गए।
राशिदा ने जाते हुए पापा का हाथ पकड़ लिया। पापा और बेटी गले लगकर ख़ूब रोए। कुछ पैसे भी छोड़ गए राशिदा के लिए। दोनों को ठीक होने में दो हफ्ते का समय लग गया। वरुण और राशिदा की सारी पूंजी हॉस्पिटल के बिल चुकता करने में चली गई।
वरुण का आज डिस्चार्ज था। उसे लगा डिस्चार्ज मिलते ही वह राशिदा के चेम्बर में जाएगा और उससे गले मिलेगा। वह गया भी। लेकिन वहाँ एक वकील खड़ी थी और वरुण को किसी पेपर्स पर साइन करने को कह रही थी। वह डिवोर्स पेपर्स थे।
वरुण ने कहा एक बार वह राशिदा से मिलकर बात करना चाहता है पर वकील ने कहा कि पेपर्स पर साइन करने के बाद कर राशिदा से बात कर सकते है वह भी फ़ोन  पर । जैसे ही वरुण ने साइन किया वकील ने राशिदा को फ़ोन लगाया कि पेपर्स साइन हो गए हैं आप बात कर लीजिए।
वरुण ने राशिदा को पूछा कि क्यों कर रही हो ऐसा? प्लीज राशिदा मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता।
राशिदा ने कहा और मेरे साथ तुमको वह लोग जीने नहीं देंगे। तुम कहीं भी हो जिंदा हो यह मेरे लिए काफी है। मैं तुमसे प्यार करती हूं बहुत प्यार। इसलिए तुम्हारी जिंदगी से ज्यादा कुछ नहीं है मेरे लिए। तुम रास्ते पर ऐसे पड़े थे एक पल लगा मैने तुमको खो दिया। वह पल मैं कभी भी भुला नहीं सकती वरुण।
तुमको किसी ने धमकाया है क्या? वरुण ने पूछा, मुझे जिंदगी ने धमकाया है वरुण! मेरे जानने से पहले ही मेरे माँ बनने का हक मुझसे छीन लिया गया। और क्या देखना बाकी है? तुम इतने काबिल होने के बावजूद बिना काम के घूम रहे हो मैं मुस्लिम संस्था या स्कूल के अलावा कहीं नौकरी नही कर सकती वहाँ भी मेहरबानी पर नौकरी करना काबिलियत पर नहीं। मै वाकई बहुत डर गई हूं। हमारा साथ रहना ठीक नहीं होगा न तुम्हारे फ्यूचर के लिए न मेरे… इसलिए हमें अलग रहना होगा। और राशिदा ने फ़ोन काट दिया। बस ख़त्म अब आप मेरी क्लाएन्ट से मिलने की कोशिश भी मत करना। आप समझदार है और समझदार को इशारा काफी होता है।और वकील कागज लेकर चली गयी।
वरुण वही बैठ गया जैसे उसके पैरों में बिल्कुल शक्ति ही न बची थी किसी चीज से लड़ने की। शून्य में ताक रहा था। वकील की ओझल होती आकृति देख रहा था और उसके हाथों में डिवोर्स पेपर्स थे जिसकी उसने इस जिंदगी जीते जी कभी भी कोई उम्मीद नहीं की थी।
वरुण आज टीवी के सामने बैठ कर आज फिर चुनावी नतीजे देख रहा था और इस बार फिर सरकार पूर्ण बहुमत से फिर से चुनकर आयी थी। उसने रिमोट से टीवी बंद किया और आराम चेयर पर बैठे बैठे शून्य मे ताकने लगा।
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