शाम सुहानी थी।पुरवाई के झोंके तन– मन को उड़ाए जा रहे थे।भंवरा के खुले बाल बार – बार हवा के झोंके से उसके चेहरे पर आ रहे थे और वह उन्हें कभी ऐसे ही छोड़ देती तो कभी समेटकर पीछे करती।लेकिन बालों के साथ अठखेलियां करती हवा उसके प्रयास को धता दे रही थी।पार्क में चहलकदमी करता भंवरा के साथ सोपान इस पूरी प्रक्रिया के मज़े लेता मन्द– मन्द मुस्कुरा रहा था।दोनों के बीच प्रेम मौन हो अपने होने को परिभाषित कर रहा था l जिसे तोड़ते हुए अचानक भंवरा ने कहा –
“सोपान, पता है मैंने तुमसे मिलने के काफी पहले एक सपना देखा था।“
“कैसा सपना?”
“यह कि मैं चारो तरफ ऊंचे पहाड़ से घिरे एक बहुत ही खूबसूरत जगह पर हूं।पहाड़ के एक तरफ से झरने के रूप में अद्भुत रोशनी सी झर रही है जो नीचे एक जगह पानी की तरह जमा हो रही है।उस रोशनी – जल में तुम्हारी आकृति का एक पुरुष क्रीड़ा कर रहा है।कई लोग भीड़ की शक्ल में किनारे खड़े हैं। उनमें से एक मैं भी हो जाती हूं।अचानक उस जल को उछालते हुए तुम्हारी नजर मुझ पर जाती है। तुम किनारे तक आ मेरा हाथ पकड़ उस रोशनी – जल की क्रीड़ा में अपने साथ मुझे शामिल कर लेते हो।“
“ अच्छा ! फिर क्या होता है?” – हँसते हुए सोपान ने कहा
“ सोपान,न तो यह झूठ है और न ही मैं कोई मजाक कर रही हूं। कई बातें जो घटित होने वाली होती हैं उनका पता मुझे स्वप्न में या फिर मेरी अनुभूतियों में हो जाता है।“
“ यानी तुम्हारे पास अतीन्द्रिय शक्ति है।“
“मैं ऐसा नहीं कह रही।लेकिन मैं सबकुछ सच शेयर कर रही हूं।तुमसे मिलने से पहले भी मुझे अपने आसपास तुम्हारी अस्पष्ट उपस्थिति का अहसास होता था।“ – भंवरा का स्वर सोपान की टिप्पणी से रूआंसा सा था।
“ भंवरा,आओ यहां कुछ देर बैठते हैं।“- भंवरा की बातों को अनसुना करते हुए सोपान ने पास की एक खाली बेंच की ओर इशारा किया l
“ तुम मुझे सीरियसली नहीं लेते हो सोपान।“ – भंवरा के चेहरे पर नाराजगी पसर गई थी।
“ तुम थोड़ी देर यहां अपना मूड ठीक करो,मैं बस आता हूं।एक जरूरी काम याद आ गया है।पूरे दस मिनट लगेंगे।“
भंवरा का मन किया वह जोर – जोर से रोना शुरू कर दे।जीवन में इतना अपमानित उसने कभी महसूस नहीं किया था।उसे लग रहा था जैसे वह नंगी खड़ी है और सोपान उसे दूर से देखते हुए कहकहे लगा रहा है।किसी तरह अपने आप पर काबू पा उसने ‘हां’ की मुद्रा में सर हिला दिया।
सोपान तेज कदमों से पार्क के बाहर चला गया और भंवरा अपने ही ख्यालों में गुम हो गई।
“ कोई नहीं था अब तक के जीवन में उसके मन में।किशोरावस्था में कभी – कभार वह नजरें चुरा कर अपने सहपाठी विशाल को देख लेती थी लेकिन कभी पढ़ाई के अलावा कोई बात नहीं हुई उससे।कॉलेज में भी धुन रही बस कैरियर बनाने की।आज जब उसने अपने पसंद कि जॉब पा ली है एनिमेशन डिजाइनर की,तब उसी फिल्ड के सोपान ने उसे आकर्षित किया।वह सोपान के पास गई या सोपान उसके पास आया यह उसे याद नहीं। वे दोनों ही एक – दूसरे के प्रेम में पिछले छः महीने से हैं।सोपान किसी भी बात को सीरियसली भले ही न लेता हो, भंवरा के प्रति अपने प्रेम को उसने सीरियसली लिया था । लेकिन आज का सोपान एकदम अलग हो भंवरा के पूरे वजूद को चिढ़ाता लग रहा था।भंवरा सोपान के इस व्यवहार से आहत थी और यह सोच सोचकर दुखी हो रही थी कि अब यह रिश्ता आगे परवान नहीं चढ़ सकता।उसका भावुक मन डूबते सूरज के साथ डूबता जा रहा था।
अचानक उसे अपने सर पर कुछ गिरता हुआ महसूस हुआ।चौंक कर वह कुछ समझ पाती कि मोगरे के कुछ फूल उसके सर से चेहरे को छूते हुए उसकी गोद में आ गिरे। उसने अकचकाकर ऊपर देखा, सोपान अपनी हथेली में मोगरे के फूल भरे हुए उसके ऊपर धीरे – धीरे गिरा रहा था।उसके चेहरे पर प्रेम की उज्जवल आभा फैली हुई थी।
भंवरा को अपनी नकारात्मक सोच से बाहर आने में कुछ सेकेंड लगे।फूलों की मदमस्त सुगंध और सोपान की इस अदा से भंवरा खिल उठी।
गहरी निराशा,दुख और अगले ही पल इतनी सुखद अनुभूतियों से गडमड हो उसका मन समझ नहीं पाया कि हँसे या रोए l इसी ऊहापोह में हँसते हुए वह अचानक अपना चेहरा दोनों हाथों से छुपा रो पड़ी। बेंच के पीछे खड़ा सोपान भंवरा के सामने आ घुटनों के बल बैठ गया | एक – एक कर उसने सभी मोगरे के फूलों को चुनकर उसके बगल में बेंच पर रख हल्के से उसका सर उठा दोनों हथेलियों के बीच उसका चेहरा ले ओठों का चुम्बन ले लिया।
सोपान के चुम्बन की गिरफ्त में सुध – बुध खोती भंवरा अपने आपको संयत कर एकदम से झल्लाकर बोल उठी –
“ प्रेम में तुम एकदम तानाशाह हो सोपान ।“
“ अच्छा ! तो क्या प्रेम में लोकतंत्र का भी कोई अस्तित्व होता है? मुझे नहीं मालूम था।“ – भंवरा की बात का मजाक उड़ाने के अंदाज में सोपान ने जवाब दिया।
इस बार हमेशा की तरह नाराज होने की जगह भंवरा खिलखिला कर हंस पड़ी।
भंवरा के हंसते चेहरे को मुग्ध हो सोपान कुछ देर तक देखता रहा और उसके ललाट पर पड़ रही सूरज की अंतिम किरण के साथ उसे चूम लिया।
पार्क में चहलकदमी बढ़ गई थी।उनके पास से गुजरते बुजुर्ग दंपति मे से साथ की बुजुर्ग महिला ने कहा – “ बेटा थोडा ओट ले लिया करो। हलांकि प्रेम सा सुंदर कुछ नहीं लेकिन हम बूढ़ों की आंखों में यही चुभ जाता है।“
दोनों के चेहरे इस कथन से लाल हो गए।सोपान ने भंवरा को वहां से चलने का संकेत किया।
पार्क के गेट से बाहर निकल सोपान ओला बुक कर बोला – “ जब तक कैब हम तक आती है मैं जो बोल रहा हूं उसे ध्यान से सुनना भंवरा।अभी हम मेरे एक साईकाटिस्ट दोस्त राजीव वोहरा के पास चल रहे हैं।राजीव अमेरिका से ह्यूमन थिंकिंग्स एंड विहेवियर पर रिसर्च कर इंडिया आया है । उसने यहीं अपनी क्लीनिक खोली है।हम उससे तुम्हारी फीलिंग और सपने का कारण जानेंगे।मैं ने उससे फोन पर बात कर ली है।तुमने अभी जो – जो मुझे बताया वह उसे भी बताना।बिना किसी झिझक के।“
“ लेकिन सोपान मुझे किसी प्रकार की कोई मेंटल प्रॉबलम नहीं और मैं अपनी फिलिंग्स को डिफाइन भी नहीं करना चाहती।फिर मैं क्यों राजीव वोहरा से यह सब डिस्कस करूं? हां,वह तुम्हारा फ्रेंड है तो उससे मिल जरूर लेते हैं।“ – भंवरा को अपने अंदर कुछ दरकता सा महसूस हुआ।
सोपान ने अपने एक हाथ के घेरे से उसे अपने करीब कर लिया।प्रेम की प्रगाढ़ता उसके स्पर्श में भंवरा महसूस कर रही थी।कैब में बैठ सोपान ने भंवरा का हाथ अपने हाथ में ले हल्के से दबाते हुए कहा –
“ भंवरा प्लीज मुझे गलत मत समझना।मैं यह सब हमारे आने वाले दिनों के लिए कर रहा हूं। तुम सेल्फ डिपेंडेंट क्रियेटिव वर्ल्ड की एक ब्राइट पर्सनालिटी हो।मैं चाहता हूँ तुम राजीव से एक या दो सिटिंग की काउंसलिंग ले लो।ताकि इस तरह की बातें तुम्हारी क्रियेटिविटी को प्रभावित न करें।“’
“ ठीक है सोपान।अगर तुम्हें ऐसा लगता है तो मैं राजीव से बात करूंगी।“ – भंवरा का स्वर बुझा हुआ था।
आलीशान केबिन में बैठा राजीव ध्यान से भंवरा की हरेक बात सुन रहा था और बीच – बीच में अपनी डायरी में कुछ नोट भी करता जा रहा था।जब भंवरा की बातें समाप्त हुईं तो राजीव ने कहा –
“ फिलहाल काउंसलिंग के लिए हर हफ्ते आना होगा l ऐसा केस बहुत कम ही आता है इसलिए मैं इसे अपने रिसर्च प्रोजेक्ट में रख रहा हूँ l भंवरा,इसके लिए पहले तुम्हारे पास्ट और प्रेजेंट को गहराई से समझना होगा ह्यूमन बिहेवियर का यह एक थोड़ा पेचीदा केस है।जिसे समझने और ट्रीटमेंट में टाइम लगेगा l आई होप कि मुझे इसमें तुम्हारा पूरा सहयोग मिलेगा l “
अब तक भंवरा का मन कहीं डूब चुका था लेकिन उसने सोपान के लिए सारी बातें मान ली।
अब हफ्ते में जो एक दिन फ्री मिलता भंवरा उस दिन राजीव के पास होती।साथ में सोपान भी रहता।कभी एक घंटा तो कभी दो घंटे की काउंसलिंग चलती रहती।राजीव हर बार कुछ नए अजीब से सवालों की लिस्ट के साथ मिलता और भंवरा एक अजीब मन:स्थिति में उन पूछे गए सवालों के जवाब देती।सोपान से कई बार वह इस प्रक्रिया को वहीं छोड़ देने को कहती पर , सोपान का हरेक बार यही कहना होता कि –
“ भंवरा तुम्हारी क्रियेटिविटी की बेहतरी के लिए जरूरी है कि तुम मानसिक रूप से अपनी अस्वभाविक धारणाओं से मुक्त रहो।“
दो महीने की साप्ताहिक सिटिंग और काउंसलिंग में भंवरा को भी कुछ बेहतर लगने लगा । अब राजीव के सवाल उसे परेशान भी नहीं करते थे।एक दिन राजीव के क्लिनिक से निकलते हुए सोपान ने कहा –
“ मेरा एक एनिमेशन रिसर्च प्रोजेक्ट जो 3D रिलेटेड है वह एस्मा लियों से स्वीकृत हो गया है l”
“ तो क्या तुम अब फ़्रांस जा रहे हो ? “
“ हाँ l “
“ कितने समय के लिए ? ‘
“वे पूरे दो वर्षों का अप्रूवल देते हैं तब तक के लिए । तुम्हें तो मालूम ही है कि एस्मा स्कूल की एनीमेशन मूवीज का कितना क्रेज है पूरी दुनिया भर में l “
“ लेकिन सोपान हम यहां कुछ अलग और नई सोच के साथ भी काम कर सकते हैं।जरूरी नहीं कि हम केवल हाई – फाई टेक्नोलॉजी का ही सहारा लें ।“
“ तुम समझी नहीं भंवरा मैं एनिमेशन में टेक्नोलोजी सम्बन्धी उनके रिसर्च सीखना चाहता हूं।मुझे जाने दो प्लीज ! बस दो साल की ही तो बात है।“
सोपान ने भंवरा का हाथ पकड़ उसकी आंखों में झांकते हुए कहा।
“ ठीक है सोपान।लेकिन मुझे भूल मत जाना “
“ आज के इस ग्लोबलाइजेशन के दौर में कैसी बच्चों सी बातें कर रही हो डियर ! हम वॉट्सएप और वीडियो चैट से संपर्क में तो रहेंगे ही।“
“ ठीक है सोपान।“
सोपान के जाने के बाद भंवरा अपने आपको काफी अकेला महसूस करने लगी।राजीव के अटपटे सवाल कभी उसे रोचक लगते तो कभी उबाऊ भी क्योंकि उन सवालों में अपनी हंसी के रंग भरने वाला सोपान अब उसके साथ नहीं था।कितना दिलकश होता था जबकि सोपान राजीव की क्लिनिक से बाहर निकल उसका हाथ पकड राजीव की नक़ल करते हुए कहता –
“अच्छा भंवरा, यह बताओ तुम अपनी कल्पना में या सपनों में बेलगाम घोड़ों को भागते हुए देखती हो या नहीं?”
और सोपान के बोलने के अंदाज पर भंवरा खिलखिला कर कहती – “ सोपान , तुम ने कभी देखा है बेलगाम घोड़ों को भागते हुए सपने या कल्पना में?बिलकुल एक ऐड मूवी की तरह l “
“ डियर , कल्पना में तो नहीं देखा पर , तुम कहो तो अभी भाग कर दिखाता हूँ l “
फिर तो ,भंवरा पेट पकड़–पकडकर हंसती l
लेकिन, अब इन मस्तियों के लिए सोपान उसके करीब नहीं था l
कभी – कभी राजीव का अपने प्रति व्यवहार उसे अटपटा लगता । वह इसकी शिकायत वॉट्सएप कॉल पर सोपान से भी करती। सोपान हरेक बार ‘ टेक इट इजी डियर ‘ बोलकर उसे चुप करा देता।
धीरे – धीरे भंवरा ने सोपान को राजीव की बातें बतानी बन्द कर दीं और अपने अकेलेपन से जूझते हुए उसने कुछ शॉर्ट एनिमेशन मूवीज बनाना शुरू किया।उस पूरी सीरीज का नाम उसने रखा – ‘ प्रेम में लोकतन्त्र ‘ l उसने पहले एपिसोड में एक फीमेल खरगोश रोज़ा को अपने मेल साथी सैम से वही बातें करते चित्रित किया जो उसने सोपान से को थी।अपने सपने और अहसास की। सोपान की तरह का ही रिएक्शन सैम का भी रखा ; स्थितियां भी वही बस अंत में उसने थोड़े बदलाव किए जबकि सोपान के यह कहने पर कि “ तो क्या प्रेम में भी लोकतंत्र का अस्तित्व होता है ?” खुद के हंसने की जगह उसने रोज़ा से बुलवाया –
“ होता है न सैम! तभी तो मेरे आसपास ये मोगरा के फूल बिखरे पड़े हैं।“
और इसके बाद सैम तथा रोज़ा आलिंगनबद्ध हो प्रेम की खूबसूरती में डूब जाते हैं।
रोजा – सैम की यह एनिमेटेड जोड़ी यू ट्यूब पर खूब हिट हुई । धीरे – धीरे ‘ प्रेम में लोकतन्त्र ‘ सीरीज दुनिया भर में इंग्लिश सबटाइटल के साथ लोकप्रिय होता गया।
भँवरा अपने इस सीरीज मे कुछ नए रंग भरना चाहती थी । आज उसने राजीव की काउंसलिंग के बाद ऐसे नए प्रयोग करने को सोचा था। परंतु , राजीव ने काउंसलिंग की बजाय आज उसका हाथ अपने हाथ मे ले उसे प्रोपोज किया – यह जानते हुये भी कि वह और सोपान प्रेम में हैं । राजीव को बिना कोई जवाब दिये एक झटके के साथ हाथ छुड़ाकर क्लीनिक से घर चली आई थी । वह राजीव के इस व्यवहार से काफी डिस्टर्ब थी और सोपान को उसके दोस्त की यह करतूत बताना चाहती थी। कई बार उसने सोपान को कॉल करना चाहा । फिर यह सोचकर रुक जाती कि सोपान कहीं इस बात का कोई गलत मतलब न निकाल ले। बेहतर होगा कि अब वह राजीव के पास जाएगी ही नहीं । चाहे कितने भी उसके काल्स आयें अब उसे अवॉइड करेगी ।
इसी सोच में डूबी थी कि फोन की घंटी बज उठी।देखा तो सोपान का कॉल था। खुद के विचारों को परे झटक उसने कॉल रिसिव किया। सोपान शायद किसी जल्दी मे था । उसने एस्मा मे होने वाले ‘ एनीमेशन फेस्टिवल ‘ मे रजिस्ट्रेशन संबंधी सूचना देते हुये उसे ‘ प्रेम का लोकतन्त्र ‘ का रजिस्ट्रेशन कराने की सलाह दी और फोन कट कर दिया । भँवरा को सोपान की यह सलाह अच्छी लगी।राजीव से छुटकारे का भी उपाय इसमें उसे नजर आया। उसने एस्मा की साइट खोल उसके रूल्स के हिसाब से फॉर्म भरकर भेज दिया ।
दो महीने बाद, भंवरा को ‘प्रेम में लोकतन्त्र‘ मूवी के साथ ‘एनिमेशन फेस्टिवल लियों’ में शामिल होने का इन्विटेशन मिला। एयरपोर्ट पर सोपान उसे रिसीव करने आया।रास्ते भर दोनों अपने – अपने एनिमेशन के स्टाइल और आइडिया पर बातें करते रहे।खासकर सोपान भंवरा के सीरीज के नाम पर देर तक हंसता और उसे छेड़ता रहा।जब भंवरा का होटल आ गया तो सोपान ने कहा –
“ भंवरा, तुम जल्दी से फ्रेश होकर मेरे लैब में चलो मुझे तुम्हे कुछ दिखाना है ।“
“ ठीक है सोपान।मैं भी तुम्हें कुछ बताना चाहती हूं।तुम अपने लैब का एड्रेस मुझे दे दो मैं जल्दी से जल्दी वहां पहुंचूंगी।“
लगभग दो घंटे बाद भंवरा सोपान के लैब के बाहर थी। सोपान उसका इन्तजार कर रहा था।मिलते ही भंवरा ने कहा –
“ सोपान तुम्हारा दोस्त राजीव बड़ा अजीब इंसान है। उसने मुझे प्रपोज किया था।“
“राजीव ने तुम्हें प्रपोज किया?”- सवाल पूछते हुये सोपान का स्वर और चेहरा गहरे अवसाद में था। लेकिन ,अगले ही पल उसने खुद को संयत करते हुये कहा —
“ राजीव ने मुझे भी एक वीडियो क्लिप भेजी है और उसे तुम्हारे साथ देखने को कहा है।आओ देखते हैं।“
सोपान ने मोबाइल ऑन किया।राजीव की आवाज़ के साथ उसका चेहरा स्क्रीन पर उभर आया –
“ भंवरा बहुत प्यारी और भावुक लड़की है सोपान । तुम्हारे जाने के बाद मैं ने भंवरा में काफी परिवर्तन नोटिस किए। रिसर्च में मेरे पल्ले कुछ खास नहीं आया सिवाय इसके कि मानव मन की बहुत सारी गुत्थियों के आगे आज का साइंस मौन है।मन असीम है। इसे समझने का दावा करने वाले हम सीमाओं में बंधे हैं।“
वीडियो क्लिप समाप्त होने पर कुछ देर भंवरा और सोपान एक – दूसरे को देखते चुप खड़े रहे।भंवरा के मन में पूरा वर्ष और उसमें झेले गए प्रश्न घूमने लगे।उसने एकदम से कहा – “ सोपान ,तुमने मेरी फीलिंग्स का मजाक बना दिया।मैं अब तुम्हारा साथ नहीं दे पाउंगी।मुझे माफ़ कर दो।“
“ जैसा तुम चाहो भंवरा।मैं तुम्हे नहीं रोकूंगा। बस ,एक बार लैब में मेरे साथ चलो। “
भंवरा बिना कुछ कहे चुपचाप सोपान के साथ उसके लैब में चली आई।लैब में एक तरफ एक विशालकाय स्क्रीन लगी थी।उसके सामने एक प्रोजेक्टर था।सोपान ने पहले गहरी निगाहें भंवरा पर डाली फिर प्रोजेक्टर ऑन कर दिया।स्क्रीन पर एक लड़की का चेहरा पहाड़ और झरने के बीच 3D विजुअल में उभरा। भंवरा अवाक रह गई।बिना किसी स्पैक्टल के वह जो विजुअलिटी अनुभव कर रही थी वह अद्भुत थी । सबसे अनोखी बात तो यह कि उस लड़की का चेहरा एनिमेशन मे होने के बावजूद उससे मिल रहा था।मूवी आगे बढ़ी,अब एनिमेशन की विजुअलिटी और भी शार्प होती गई।मूवी में उसका वही सपना फिल्माया गया था l उसके इफेक्ट्स इतने खूबसूरत थे कि अपना खुद का सपना होने के बावजूद भंवरा उसमें खोती गई । उसका मुंह आश्चर्य से खुला रह गया।जब रोशनी – जल से उसकी तरफ आता सोपान उसका हाथ पकड़ता है वह सीन तो ऐसा था मानो किसी देवदूत सा उभरता सोपान देवकन्या का हाथ अपने हाथ में लेना चाहता हो और वे दोनों अभी आकर भंवरा में समा जायेंगे l भंवरा का पुलकित मन उद्वेलित हो उठा ; अनायास ही वह सोपान से लिपट गई l उसके मुँह से हल्के स्वर में बस यही निकला –
“ अमेजिंग !”
“ नहीं , अमेजिंग नहीं l “
“ क्या मतलब है तुम्हारा सोपान ?”
“ इस मूवी का नाम हम अमेजिंग नहीं रख सकते l यह नहीं जंच रहा l “
“ ओह ! हमेशा की तरह तुमने मुझे फिर से चौंका दिया l “
“ नाम बताओ भंवरा l “
“ प्यार का एनीमेशन l “
“ परफेक्ट ! एक मिनट रुको बस अभी आता हूँ l “ – कह सोपान लैब में बने छोटे से स्टोर रूम में चला गया और एक फ़ाइल लेकर लौटा l
“ क्या है इसमें ?”
“ ये रहे दो हवाई टिकट हमारी वापसी के l हम फेस्टिवल के बाद साथ इंडिया वापस लौट जायेंगे l “
“ लेकिन अभी तो तुम्हारा एस्मा से मिला प्रोजेक्ट टाइम बचा हुआ है l”
“ मेरा काम पूरा हो गया भंवरा l मैं हमारे सपनों में रंग भरना चाहता था l फिर , ‘ प्रेम का लोकतंत्र ‘ की अगली कड़ियों में ऐसे 3D इफेक्ट्स कौन डालेगा ?”
“ ‘ प्रेम का लोकतंत्र’ में किसी 3D इफेक्ट की जरूरत नहीं है सोपान। ”
“ ओह ! सॉरी भंवरा , मैं भूल गया था तुम मुझसे नाराज हो और अब हम अलग हो रहे हैं l “- सोपान के स्वर में गहरी निराशा थी।
भंवरा सोपान की बात को नजरंदाज कर अपनी टैक्सी बुला वहाँ से अपने होटल की तरफ निकल गई।
सोपान भँवरा को जाते हुये तब तक देखता रहा जब तक कि टैक्सी उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गई। अपने से हरेक पल दूर जाती भँवरा उसे अंदर से विह्वल किए दे रही थी। उसका मन चाहता था कि वह दौड़ कर भँवरा को पकड़ ले । उससे माफी मांग ले या फिर जो वह कहे वैसा ही करे।
लेकिन भँवरा जा चुकी थी । सोपान का हृदय भाय – भाय करने लगा । एक भँवरा ही तो थी जिसे उसने अपने अब तक के जीवन मे पूरे मन से प्यार किया था। कॉलेज मे लड़कियों के बीच वह सदा ही अलोकप्रिय रहा। लड़कियां उसे खडूस कहकर बुलाती थीं । उसने भी उनके इस सम्बोधन को सहर्ष स्वीकार लिया था। उसे अपनी पुस्तकें और विषय पर गंभीर चर्चाएं पसंद थीं।जिसमें उसका हमेशा साथ दे ऐसी कोई उसे नहीं मिल पाई थी ।
ज़हीन भँवरा उसे पहले दिन से ही आकर्षित करने लगी थी। उसका अपने काम पर फोकस करना उसे बहुत पसंद आता था। काम के कारण अगर वह कभी उसे नजरअंदाज भी कर देती तब भी उसे बुरा नहीं लगता और भँवरा भी कुछ ऐसी ही थी। दोनों ने एक – दूसरे के काम को प्राथमिकता देते हुये एक – दूसरे को चाहा था । लेकिन आज ?
सोपान को अपना अस्तित्व बिखरता मालूम हुआ। उसने लैब मे रखी कुर्सी पर बैठ ,अपना सर कुर्सी के बैक पर टिकाकर आँखें बंद कर ली। आँखों मे गहरी जलन महसूस हुई तो उसने सायास आँखें मिचमीचाई और लाख रोकने पर भी आँखों से आंसुओं का सैलाब सा फूट पड़ा। खुद पर काफी नियंत्रण के बाद भी आंसुओं के साथ उसके गले से घुटी – घुटी सी आवाज निकलने लगी। वह तब तक रोता रहा जब तक कि उसके आँसू सूख नहीं गए और दुख की अधिकता मे झपकी सी नहीं आ गई।
अचानक उसके कानों मे ‘ प्रेम का लोकतन्त्र ‘ एनीमेशन सीरीज का टाइटल सॉन्ग पड़ा –
“ये है प्रेम का लोकतन्त्र
रोजा – सैम के प्रेम का लोकतन्त्र
प्रेम का लोकतन्त्र , प्रेम का लोकतन्त्र “
सोपान ने आँखें खोलकर देखा तो सामने की स्क्रीन पर रोजा – सैम की जोड़ी टाइटल सॉन्ग के साथ नाचती नजर आ रही थी। अभी वह कुछ समझ पाता इससे पहले ही दृश्य बदला। रोजा सैम की आँखों मे देखते हुये उसका हाथ थामे कह रही थी –
“ ओ सैम ,तुम कितने प्यारे हो ! तुमने मेरे लिए मेरे ही सपनों का कितना खूबसूरत विजुअल बनाया है! मैं तो तुम पर फिदा हो गई। “
“रोजा , मैं तुम्हारे लिए ही तो जीता हूँ! “
“हाँ सैम, मुझे भी इस बात का आज गहरे एहसास हुआ । क्या तुम मुझसे शादी करोगे ?”
जवाब मे सैम रोजा को अपनी बाँहों मे भर लेता है और लगभग डेढ़ मिनट की यह एनीमेशन मूवी खत्म हो गई।
स्क्रीन ब्लैंक होते ही सोपान ने चौंक कर प्रोजेक्टर की तरफ देखा । वहाँ मुस्कुराती हुई भँवरा खड़ी थी। सोपान से नजरें मिलती ही भँवरा ने धीमे स्वर मे कहा – “ मुझसे शादी करोगे सोपान ?”
एक पल को तो सोपान को लगा कि सपना देख रहा है।वह बस भौंचक होकर भँवरा को देखता रह गया।
भँवरा ने मुस्कुराते हुये फिर कहा –
“मुझसे शादी करोगे सोपान ? सॉरी, तुम्हारे विजुअल की तरह …. । “
भँवरा की बात पूरी होने से पहले ही सोपान ने उसे अपने प्रगाढ़ आलिंगन मे ले उसके ओठों पर अपने ओठ रख दिये।

