Wednesday, May 22, 2024
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वन्दना यादव का स्तंभ ‘मन के दस्तावेज़’ – प्रेम में होना यानी…!

प्रेम अनमोल है। यह एक दिन मिलने वाला उपहार नहीं है जिसके एक निश्चित दिन पर मिलने पर प्राप्त करने वाला/करने वाली खुशियों से सराबोर हो जाएंगे। ना ही प्रेम एक विशेष दिन को उत्सवमयी बनाने का हक़ मांगता है। प्रेम हर दिन की, हर सांस के साथ गुनगुनाने की ज़रूरत का नाम है। हर पल प्रेम में होना ऐसी अनुभूति है जो जीवन को सार्थक बनाती है। यह एक स्त्री-पुरुष के मध्य का प्रेम भी हो सकता है और अन्य किसी रिश्ते पर निछावर होने, प्रेम देने या प्रेम पाने का कारक भी हो सकता है। 
दरअसल प्रेम में होना यानी जीवन जीने की ललक होना है। प्रेम में होना यानी विनम्र होना है। यह ऐसी भावना है जो कहती है कि  किसी का ध्यान रखना, उसकी परवाह करना, किसी के चेहरे पर खुशी देखना मेरे जीवनका सबसे बड़ा सुख है। प्रेम के मायने किसी की आँखों की चमक में अपना सुख तलाशना है।
प्रेम सिर्फ लेना या लेने के बदले देना नहीं है। इतनी गहरी भावना को सिर्फ एक दिन तक या एक व्यक्ति तक सीमित नहीं कर सकते। यह हर दिन होने वाली क्रिया है। यह सब ओर फैलाने, हर दिन पाने, प्रतिदिन अपनों और अनजान लोगों में बाँटने से प्राप्त होने वाली सुखमय अनुभूति का नाम है। इसे एक इंसान से आगे बढ़ा कर हर एक की पहुंच तक फैलाने के प्रयास का नाम प्रेम में होना है। पशु-पक्षी, नदी-झरने, पर्वत-मरूथल यानी प्रकृति के हर ज़र्रे से प्रेम करना, प्रेम में होना है, प्रेम-उत्सव मनाना है। 
आप सभी को प्रेम में रहने, हर पल के प्रेम-उत्सव मनाने की शुभकामनाएं। 
वन्दना यादव
वन्दना यादव
चर्चित लेखिका. संपर्क - yvandana184@gmail.com
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21 टिप्पणी

    • सबसे जटिल बात को सबसे सरल भाषा में कहा जाना चाहिए।
      आपके इस बार का ‘मन के दस्तावेज़’ पसंद आया, जान कर अच्छा लगा।

    • जीवन जीने की ललक तभी पैदा होती है जबहम खुद के या अपने साथ किसी अन्य के प्रेम में होते हैं। इसीलिए प्रेम में होना आवश्यक है।

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