Wednesday, May 22, 2024
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वन्दना यादव का स्तंभ ‘मन के दस्तावेज़’ – सफलता यानी निरंतरता

हम सब सामाजिक प्राणी हैं। हम अपने बचपन से ही समाज में मिसाल के तौर पर पहचाने जाने वाले नायकों के क़िस्से और उनकी सफ़लता की गौरवगाथाएं सुनाते हुए बड़े होते हैं। प्रत्येक पीढ़ी ऐसी गाथाओं को जन्म देती रही है और हर पीढ़ी के बच्चे ऐसे क़िस्सों को सुन-सुन कर बड़े होते हैं। जिन्होंने कुछ असंभव किया या विलक्षण को प्राप्त किया, मानव इतिहास ऐसेअद्भुत मानवों की वीरगाथाओं से भरा पड़ा है। जितना हम आगे बढ़ते हैं उतना ही अपने इतिहास से सीख लेने के लिए लौटते भी हैं। क्या आप भी ऐसी अविस्मरणीय गाथा के नायक बनना चाहते हैं जिसे वर्षों तक याद किया जाए? जिसकी सफ़लताएं युवाओं के लिए मिसाल बन जाएं और तारीख़ उनके जुनून की गवाही दे? यदि यह सही है तो उसके लिए आपको अभी, इसी वक़्त से तैयारी करनी होगी।
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सफ़लता का उम्र, जाति-धर्म या स्त्री-पुरूष होने से कोई सरोकार नहीं है। सफलता किसी को भी मिल सकती है बेशक सफ़लता चाहने वाला व्यक्ति, अपनी मंज़िल पर पहुंचने के लिए जुनून की हद तक मेहनत करे। जिस तरह गाड़ी चलाते समय रास्ते के भटकावों से दूर रह कर अपना पूरा ध्यान, लक्ष्य पर पहुंचने में लगाने वाले लोग ही निर्धारित स्थान पर पहुंचते हैं, उसी तरह जिन लोगों ने जीवन में अपने लक्ष्य निर्धारित किए हैं उन्हें भी अपना सारा ध्यान केन्द्रित करने पर ही सफ़लता मिलती है।
इस ओर क़दम बढ़ाने से पहले याद रखें कि सफ़लता कोई पायदान या शिखर पर पहुँचना भर नहीं है। यह हर दिन, हर पल, हर क्षण चलने वाली निरंतर यात्रा है। लगातार किया गया परिश्रम आपके हिस्से में एक के बाद एक सफ़लताएं ला सकता है। इसीलिए कभी भी मेहनत से पीछे नहीं हटना है और ना ही एक लक्ष्य पर पहुंच कर आराम करना है। अपना सफ़र निरंतर जारी रखें और हमेशा आगे से आगे बढ़ने का विकल्प चुनें। 
आप निरंतरता की राह चुनें क्योंकि सफ़लता की राह पर चलने वाले व्यक्ति के लिए कोई भी मंज़िल अंतिम नहीं होती। हर मंज़िल एक पड़ाव होती है जहाँ पहुँच कर कुछ लम्हों के लिए सुकून महसूस किया जा सकता है मगर वह ख़ुशी इतनी लंबी ना रहे कि आप रास्ते से उतर कर सुस्ताने लगें। एक मंज़िल पर पहुंच कर ख़ुशी मनाएं और उसके तुरंत बाद अगले लक्ष्य की ओर बढ़ चलें। इस राह पर चलते हुए प्रकृति का सिद्धांत याद रखें। प्रकृति कभी ठहरती नहीं है और ना ही विश्राम करती है। वृक्ष एक उम्र के बाद ठूंठ हो जाते हैं मगर अपने जीवन काल में ही वे अपने समान अनेक वृक्षों को जन्म दे देते हैं। यह अनवरत चलने वाला चक्र है। घने जंगलों का अस्तित्व इसी वजह से बरक़रार है। नदी और हवा भी कभी थमते नहीं। जब-जब पानी किसी गड्ढे में ठहरा, वह दूषित हो गया। ठहरे पानी में कीड़े पड़ जाते हैं वह किसी उपयोग के लायक नहीं बचता इसी तरह किसी पुरानी हवेली के बंद दरवाज़े लंबें अर्से के बाद खोलने पर आपने महसूस किया होगा कि वहाँ मौजूद हवा में अजब सी महक और ठंडापन है। बंद जगह पर हवा भी अपनी ताज़गी खो देती है। याद रखें कि हम भी प्रकृति का ही हिस्सा हैं। निरंतर प्रगतिशील रहने का प्राकृतिक स्वभाव हमें याद रखना है। यही जीवन है और यही सफ़लता की कुंजी है।
आप जब भी अपनी मंज़िल का चुनाव करें, सबसे पहले अपने पर भरोसा रखें। अपनी काबिलियत पर यक़ीन करें उसके बाद आगे क़दम बढ़ाएं। सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि सफ़लता निरंतरता में है। किसी जगह या मुकाम पर पहुंच कर रूकना, सफल होना नहीं है। हर व्यक्ति को सफ़ल होने का हक़ है। हर क्षेत्र में सफ़लता के शिखर पर पहुंचने वाले व्यक्ति अपनी मंज़िल पर पहुंच कर भी रूके नहीं। वे व्यक्तिगत उपलब्धियों से आगे बढ़ कर बड़े जन-समूह के लिए किए जाने वाली उपलब्धियाँ हासिल करने में लग गए। याद रखें कि यह अनंत की यात्रा है जो अनवरत चलती रहती है। आप सफ़ल रहे तो उपलब्धि हासिल होगी, नहीं तो जो अनुभव मिलेगा वह अगली यात्रा में मार्गदर्शन करेगा इसीलिए पूरी तैयारी के साथ अपनी सफ़लताओं की यात्रा शुरू करें। जब भी आप मंज़िल के लिए अपना सफ़र शुरू करें, ख़ुद को यक़ीन दिलाएं कि हाँ, ‘अब मंज़िल मेरी है!’  मैं आपको यक़ीन दिलवाती हूँ कि इस भरोसे के साथ शुरू किया गया कार्य मुकाम तक ज़रूर पहुंचेगा।
वन्दना यादव
वन्दना यादव
चर्चित लेखिका. संपर्क - yvandana184@gmail.com
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1 टिप्पणी

  1. यथार्थ पूर्ण एवं मोटीवेशनल लेख के लिये आदरणीय लेखिका को हृदय से धन्यवाद और बधाई लेकिन अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि,आज देश में सड़क तो बनाई जा रही है लेकिन मध्यम और निम्न केटेगरी के घुटने तोड़ कर जीवन भर घुटने के लिये छोड़ दिया जाता है ये कहकर हमारे बच्चे विदेश में पढ़ाई करेंगे। तुम सिर्फ़ वोट देने के लिये हो नाली से गैस निकलती है उससे भजिया तलों बेचो। वाह

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